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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Be Extremely Careful While Eating, Drinking, Cooking And Feeding
6 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
हमारी बड़ी-बूढ़ी माताएं-बहनें कहा करती थीं कि भोजन बनाने में हड़बड़ाहट नहीं करनी चाहिए, नहीं तो उसका स्वाद चला जाता है। आज की भाषा में कहें तो भोजन बनाने में टाइमिंग का बड़ा महत्व है। पूरी दुनिया में हम भारत के लोग ही हैं, जिन्होंने अन्न को बड़े अच्छे ढंग से ढाला है।
हम जो अन्न लाते हैं, उसे साफ-सुथरा करके भोजन बनाते हैं। फिर उसी भोजन को भोग लगाते हैं। किसी की ईश्वरीय-शक्ति को अर्पित करते हैं। तब वही भोग प्रसाद बन जाता है। फिर वह बांटा जाता है, प्राप्त किया जाता है। लेकिन दु:ख होता है कि हमारे देश में भी लोग अन्न का महत्व भूल रहे हैं।
जैसे सफलता के साइड-इफेक्ट्स होते हैं, प्रतिभा का साइलेंट-इफेक्ट होता है, ऐसे ही अन्न का सॉलिड-इफेक्ट होता है। भारत के परिवारों में इस समय जब हम बच्चों के लालन-पालन को लेकर चिंतित हैं तो हमें एक उपाय करना चाहिए कि बच्चों के भोजन को लेकर सावधान रहिए। जितना अच्छा, शुद्ध, संस्कारी भोजन हम बच्चों को देंगे, उनके व्यक्तित्व में उतनी ही पॉजिटिविटी आएगी।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: खाते-पीते, बनाते-खिलाते अत्यधिक सावधानी रखिए
