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संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 18 Aug 2024 05:36 AM IST
हरपाल सिंह बूरा।
हिसार। हरियाणा टैक्स ट्रिब्यूनल के पूर्व न्यायिक सदस्य हरपाल सिंह बूरा ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिसर्च में उठाए गए आरोपों ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। जिनके जवाब सेबी, इसके अध्यक्ष, बोर्ड के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों से मांगने की जरूरत है। सेबी या नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक हिंडनबर्ग के आरोपों के खिलाफ अडानी कंपनियों की गंभीर जांच शुरू नहीं की है, जिसमें अमेरिका की सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के साथ सहयोग भी शामिल होना चाहिए था। ऐसा आमतौर पर ऐसे गंभीर मामलों में किया जाता है।
सेबी की मौजूदा चुप्पी, हिंडनबर्ग की पिछली रिपोर्ट में लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद, गहन समीक्षा की मांग करती है। इससे एक बड़े उभरते बाजार में रेगुलेटर की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यह समझ में नहीं आता कि सेबी की चेयरपर्सन ने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया। खासकर जब उनके और उनके पति के अडानी से जुड़े ऑफशोर फंड्स में संभावित निवेश की जांच चल रही है।
ऑफशोर कंपनियों में उनके निवेश के सबूत मौजूद हैं और हिंडनबर्ग द्वारा आरोपित लोगों से कोई स्पष्ट खंडन नहीं आया है। बाजार की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसकी जांच के लिए जल्द से जल्द जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी गठित की जानी चाहिए।
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हिंडनबर्ग की जांच के लिए जेपीसी बने : हरपाल



