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अमर उजाला संवाद में शहर में जल जमाव की समस्या पर लोगों ने रखे विचार
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही प्रदेश सरकार को भी ठहराया जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक बारिश में शहर के कई हिस्सों के झील में तब्दील हो जाने की मुख्य वजह गुरुग्राम का अनियोजित विकास और भ्रष्टाचार है। सेक्टर चार के सामुदायिक भवन में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने जलभराव की समस्या के लिए बगैर योजना के विकास और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया।
धनवापुर निवासी विजय दहिया ने कहा कि पहले शहर की संरचना में बरसाती नाले नजफगढ़ ड्रेन से जुड़े हुए थे। लो-लाइन एरिया और ड्रेन के बीच अनियोजित और अव्यवस्थित तरीके से बसी हुईं कॉलोनियां नहीं थी। ऐसे में पानी आसानी से बह जाता था। शहर का विकास हुआ तो सेक्टर चार के बीच में लक्ष्मण विहार बस गया। सड़कें लगातार ऊंची की गई मगर सेक्टरों और कॉलोनियों के घर नीचे हो गए। पानी के निकलने का रास्ता ही नहीं रहा। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सड़कें बार-बार बनती हैं मगर योजनाबद्ध तरीके का अभाव है।
सेक्टर चार-सात आरडब्ल्यूए उर्वा के अध्यक्ष धर्म सागर ने सड़क बनाने से पहले नाला नहीं बनाया जाना और ड्रेन लाइन की सफाई नहीं हो पाने को इसका जिम्मेदार बताया। स्थानीय निवासी मनोज भारद्वाज ने कहा कि सेक्टर चार को बसे 40 साल से ज्यादा हो गए, मगर अभी ड्रेनेज और सीवेज की पुरानी लाइनें बदली नहीं गईं। पूरे शहर की बात की जाए तो कई कालोनियां ऐसी हैं जहां एक मंजिला मकान अब तीन से चार मंजिला हो चुके हैं। ऐसे में शहर भर में पूरी ड्रेनेज लाइन बदले जाने की जरूरत है।
वीरेंद्र सिंह मलिक और आरके शर्मा ने कहा कि मानसून से पहले पहले ड्रेनेज लाइनों की सफाई होती थी। अब न तो ड्रेनेज लाइन की सफाई होती है और न ही गंदगी की सफाई हो रही है। अधूरे नाले मुख्य नालों से नहीं जोड़े गए हैं। सुशील कुमार और नवदीप चौधरी ने कहा कि ड्रेनेज लाइनों को बनाने वाले ठेकेदारों की पेमेंट निवासियों से सहमति के बाद मिलने चाहिए। सड़क बनाने से पहले ड्रेनेज लाइन बनाई जानी चाहिए। संवाद कार्यक्रम में धीरज सेठी, वर्षा मल्होत्रा, सुरेश मल्होत्रा, धर्म सागर, मनोज भारद्वाज, सुधीर सेवक, विजय भगत, वीरेंद्र सिंह मलिक, विजय दहिया, डॉ. कृष्ण यादव, आरके शर्मा, केएल जुनेजा, एसके यादव, सुशील कुमार, राम अवतार सिंह, नवदीप चौधरी, एसके मानक और सुखबीर यादव आदि ने अपने विचार रखे।
लोगों ने कहा
जरा सी बारिश में शहर का बुरा हाल हो जाता है। ड्रेनेज और सीवेज लाइनों की अच्छी तरह सफाई हुई होती और उन्हें मुख्य लाइन से जोड़ा गया होता तो यह समस्या इतनी भयंकर नहीं होती। बारिश में पानी जमा होने के कारण सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। – धीरज सेठी
सेक्टर चार मार्केट में कई रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए थे मगर एक भी कारगर साबित नहीं हुआ। प्रशासन को रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने से पहले किसी विशेषज्ञ की सहायता से जमीन की जांच करा लेनी चाहिए। जहां-जहां सिस्टम बने थे काफी पानी भरा है। – वर्षा मल्होत्रा
सरकार को भी इस ओर देखना चाहिए। दो बार यहां मनोहर लाल मुख्यमंत्री बने हैं, इसके बावजूद उन्होंने प्रदेश की आर्थिक राजधानी की इस ज्वलंत समस्या पर ध्यान नहीं दिया। इसीलिए संबंधित अधिकारी भी लापरवाह हो गए। जिस तरह प्रापर्टी टैक्स, पानी, बिजली का बिल समय पर नहीं दिए जाने पर सरकार लोगों पर जुर्माना लगाती है। ऐसे ही नगर निगम पर भी जुर्माना ड्रेनेज लाइन के बरसात में कारगर नहीं होने, अधूरा नाला महीनों छोड़ देने, एक महीने पहले बनी सड़क टूट जाने पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। – धर्म सागर, अध्यक्ष उर्वा
पुराने सेक्टरों में नई ड्रेनेज और सीवेज लाइनें बिछाए जाने की जरूरत है। हर ग्रीन बेल्ट पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाई जाए और सारी ड्रेन लाइन को साफ किया जाए। 75 प्रतिशत से ज्यादा ड्रेन और सीवेज लाइन जाम हुई पड़ी है। – मनोज भारद्वाज
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Gurugram News: अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का परिणाम है शहर में जलभराव

