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किरेन रिजीजू (बाएं) असदुद्दीन ओवैसी (दाएं)
लोकसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों के कड़े विरोध के बीच वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर दिया गया। इस बिल को पिछले साल आठ अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। इसके बाद संसोधित विधेयक पेश हुआ, जिसे सदन से पारित कर दिया गया। अब इस विधेयक को लेकर नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी हैं। राहुल गांधी ने इसे एक हथियार करार दिया, जबकि गिरिराज सिंह ने कहा कि इस बिल के जरिए सरकार ने कांग्रेस की भूल सुधारी है।

- कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि वक्फ बिल को जबरन पास कराया गया, यह संविधान पर खुला हमला है। उन्होंने कहा “कल, वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 लोकसभा में पारित हो गया, और आज इसे राज्यसभा में पेश किया जाना है। विधेयक को वास्तव में जबरन पारित किया गया। हमारी पार्टी की स्थिति स्पष्ट है। यह विधेयक संविधान पर एक बेशर्म हमला है। यह हमारे समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में रखने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।”
- विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा “वक्फ (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों और संपत्ति के अधिकारों को हड़पने के उद्देश्य से बनाया गया एक हथियार है। आरएसएस, भाजपा और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर लक्षित है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने के लिए एक मिसाल कायम करता है। कांग्रेस पार्टी इस कानून का कड़ा विरोध करती है, क्योंकि यह भारत के मूल विचार पर हमला करता है और अनुच्छेद 25, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।”
- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “हमने 2013 में कांग्रेस द्वारा तुष्टीकरण की राजनीति के नाम पर की गई गलतियों को सुधारा है और गरीबों और महिलाओं का ख्याल रखा है। हमें उम्मीद है कि भविष्य में गरीबों को उनकी जमीन का अधिकार मिलेगा।”
- भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, “मुझे संतुष्टि है कि एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है और वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित किया गया है। वक्फ (संशोधन) विधेयक गरीब मुसलमानों को लाभ पहुंचाएगा।”
- समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, “इससे बुरा कानून इस देश में मुसलमानों के लिए कभी नहीं बना। संविधान की अनदेखी करके यह विधेयक पारित किया गया है। इस विधेयक को लेकर देश में बहुत गंभीर सवाल उठेंगे।”
- शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा, “एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मुसलमानों के ‘मसीहा’ बनने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने विधेयक की कॉपी फाड़ दी। टीएमसी, एसपी, कांग्रेस, डीएमके के नेताओं ने खुद को अल्पसंख्यकों का नेता दिखाने के लिए नाटक किया। विपक्ष ने अपना काम किया और मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने के लिए सब कुछ किया।”
- टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “यहां केवल पचास वोटों का अंतर है और आप समझ सकते हैं कि यह विधेयक कितना अलोकप्रिय और जनादेश के खिलाफ है। यह केवल पार्टी व्हिप और दो सहयोगियों की वजह से है कि वे इसे पारित कराने में कामयाब रहे। यह भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र का एक बहुत ही काला दिन है, जहां सरकार एक ऐसा विधेयक लेकर आई है जो अनुचित है और मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। संशोधन मुस्लिम समुदाय पर बहुत बुरा असर डाल रहे हैं।”

वक्फ (संशोधन) विधेयक आठ अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्ष के विरोध जताने के बाद इसी दिन यह बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था। जेपीसी ने कई बैठकें करने के बाद बिल में कई संसोधन प्रस्तावित किए थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बैठक में संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) द्वारा प्रस्तावित 14 संशोधनों को अपनी मंजूरी दी। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी की रिपोर्ट विपक्षी दलों के हंगामे और वाकआउट के बीच गत 13 फरवरी को संसद में पेश की गई थी। 14 संशोधनों के बाद बुधवार देर रात यह बिल पास हुआ। लोकसभा में बिल के पक्ष में कुल 288 वोट पड़े हैं। वहीं, बिल के विपक्ष में 232 वोट पड़े।

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लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास, सोनिया गांधी बोलीं- ‘इसे जबरन पास कराया गया’ – India TV Hindi