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डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित युवा सॉन्ग महोत्सव में लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। इस महोत्सव में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय यूटीडी की टीम ने ‘सत्यवान-सावित्री’ सॉन्ग का मंचन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अवसर पर पहुंचे डॉ. वीरेंद्र चौहान ने लोक सॉन्ग की लोकप्रियता और इसकी ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमने अपने बुजुर्गों से सुना है कि पहले लोग 20-20 कोस पैदल चलकर सॉन्ग देखने जाते थे। उस समय न गाड़ियां थीं, न सुविधाएं, लेकिन लोक कला के प्रति प्रेम और समर्पण इतना था कि लोग अपने खेत और पशुओं का काम निपटाकर पैदल ही सॉन्ग देखने जाते थे। यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।”
उन्होंने आगे कहा कि “आज हम संघर्ष कर रहे हैं लोक सॉन्ग को जिंदा रखने के लिए। समय के साथ बदलाव भी आवश्यक हैं, लेकिन हमारी लोक कला अपनी परंपराओं के मूल स्वरूप में बनी रहनी चाहिए। डीएवी कॉलेज के इस मंच से हम इस प्रयास को आगे बढ़ा रहे हैं।”
महोत्सव के दौरान एसपी चौहान ने भी अपने विचार साझा किए और कहा, “आज जो विद्या आप प्रस्तुत कर रहे हैं, उसे देख-सुनकर बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। जब तबले और हारमोनियम की धुन बजती है, तो वह बचपन की मिट्टी की सुगंध की तरह महसूस होती है। पहले लोग बड़े उत्साह से सॉन्ग देखने जाते थे, और हमें गर्व है कि हम इसे संजोने और आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।”
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VIDEO : करनाल डीएवी पीजी कॉलेज में युवा सॉन्ग महोत्सव


