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तहसीलदार को ज्ञापन देने पहुंचे अनुसूचित जाति वर्ग के लोग।
चरखी दादरी। अनुसूचित जाति वर्ग को आरक्षण दिए जाने के कोर्ट के फैसले के बाद 42 जातियों के लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की है। इन जातियों से संबंधित विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से सर्वोच्च न्यायालय के अनुसूचित जाति के आरक्षण में वर्गीकरण के निर्णय का स्वागत किया है।
इस दौरान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 20 प्रतिशत आरक्षण में अनुसूचित जाति वर्ग ए की 42 जातियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की मांग की गई। वार्ड 11 स्थित सामुदायिक केंद्र में एकत्रित हुए समाज के लोगों ने कोर्ट के निर्णय पर प्रसन्नता जाहिर की।
इस दौरान संत कबीर सामाजिक सेवा समिति प्रधान दयानंद खनगवाल, प्रवक्ता मास्टर मुकेश बुमरा, पार्षद विनोद वाल्मीकि, संजय बिडलान, धर्मबीर मोरवाल, अरुण वाल्मीकि, रोहताश सोलंकी, राजेश डाबला ने विचार रखे।
पार्षद विनोद ने कहा कि एक विशेष जाति 1950 से 20 प्रतिशत आरक्षण का फायदा अकेली लेती रही है। जबकि बाकी 42 जातियों को आरक्षण में आंशिक भागीदारी मिली है। 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने अनुसूचित जाति के आरक्षण को दो भागों एससी ए व एससी बी में वर्गीकृत करके वंचित 42 जातियों को भी मुख्यधारा में लाने का काम किया था। 2006 में इस आरक्षण को पुन: एकत्रित कर दिया। इससे इन 42 जातियों का हक छीना जाता रहा है। अब बीते एक अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय की सात जजों की बेंच ने वर्गीकरण कर सभी 42 वंचित जातियों को आरक्षण का लाभ देने का फैसला दिया है। राज्य सरकारों को भी निर्देश दिए हैं कि आरक्षण में वर्गीकरण करके कोटे में कोटा लागू कर सकती है।
इन लोगों ने मंगलवार को तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। राज्य सरकार से जल्द नई आरक्षण नीति लागू करने की मांग की। इस अवसर पर धर्मबीर डाबला, बृजेश, मदन सिंह मास्टर, बलराज सिवान, महेश सुरलिया, सन्नी, जसबीर, जिला पार्षद श्यामलाल महराणा, देवदत खटक, राजेंद्र नीमली, बलराज खरेरा, पार्षद कौशल्या देवी, कुलदीप मोरवाल, नरेश बुमरा, मुकेश बुमरा, धन सिंह कादमा आदि मौजूद रहे।
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Charkhi Dadri News: अनुसूचित जाति के लोगों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन



