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90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण, फिर भी पांच साल में 1675 बच्चों की मौत


पानीपत। पिछले दो वर्षों तक कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को प्रभावित किया। गर्भवतियों और बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग बच्चों के नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए छह से 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाएगा। पांच साल तक के जिन बच्चों की टीके की खुराक रह गई है, उन्हें टीका लगाया जाएगा। विभाग जिले में 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण करने का दावा करता है। बावजूद इसके विभिन्न कारणों से पिछले पांच वर्ष में 1675 बच्चों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में 425 बच्चों की मौत हुई थी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) टीकाकरण की योजना बनाता है। यूनिसेफ आर्थिक मदद करता है। हरियाणा में करीब 90 फीसद बच्चों का ही टीकाकरण होता है। रूटीन टीकाकरण में पिछड़ने का कारण अभिभावकों की लापरपाही, विभागीय टीमों का आउट रिच तक नहीं पहुंचना और संबंधित विभागों की सुस्ती मानी जाती रही है। हालांकि, हेल्थ मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम (एचआईएमएस) पानीपत की रिपोर्ट शत-प्रतिशत टीकाकरण का दावा करती है।
शिशु मृत्यु दर घटे, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार का टीकाकरण पर विशेष फोकस रहता है। अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी केंद्रों में टीके लगवाकर, उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से बचाएं। दूसरे राज्यों के परिवारों के आवागमन के कारण कुछ बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं।

पांच वर्ष तक के बच्चों की मौत आंकड़ा
2018-19 493
2019-20 556
2020-21 425
2021-22 201
टीकाकरण की आयु और टीका
– जन्म के बाद 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी और ओपीवी (पोलियो खुराक)
– जन्म के तुरंत बाद, एक वर्ष तक बीसीजी (टीबी से बचाव)
– डेढ़ माह में ओपीवी, पैंटावैलेंट, रोटा वायरस, पीसीवी (निमोनिया)
– ढाई माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट और रोटावायरस का टीका
– साढ़े तीन माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी-13, आइवीपी
– नौ माह में एमआर(खसरा), जेई (जापानी बुखार), पीसीवी बूस्टर
– 16 से 24 माह में डीपीटी बूस्टर, विटामिन-ए, एमआर-जेई, ओपीवी बूस्टर
– पांच-छह वर्ष आयु में डीपीटी बूस्टर-टू

टीका-वैक्सीन और लाभ
बीसीजी : टीबी के खतरे को कम करता है।
ओपीवी : यह वैक्सीन पोलियो का खतरा कम करती है।
पेंटावैलेंट : गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार और पीलिया का खतरा कम।
रोटावायरस : डायरिया, बुखार-उल्टी का खतरा कम करता है।
पीसीवी : निमोनिया, दिमागी बुखार और कान के संक्रमण को कम करता है।
आइपीवी : यह पोलियोरोधी वैक्सीन है।
एमआर : यह टीका मीजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा) से बचाता है।
जेई : यह टीका बच्चों को जापानी बुखार से बचाता है।
टीडी : यह बूस्टर टीका है, टिटनेस और गलघोंटू से बचाव करता है।

छह से 12 जून तक चलेगा अभियान
छह से 12 जून तक जिले में टीकाकरण के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए आशा वर्करों की मीटिंग की जा चुकी है। जिन बच्चों के टीके की खुराक रह गई है। उनको चिह्नित कर टीका लगाया जाएगा। उनका प्रयास अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना और शिशु मृत्युदर में कमी लाना है।
– डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन

मूल खबर…
90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण, फिर भी पांच साल में 1675 बच्चों की मौत
– 12 जून तक स्वास्थ्य विभाग चलाएगा टीकाकरण अभियान
– जिन बच्चों की टीकाकरण की खुराक रह गई है उनको लगाया जाएगा टीका
संदीप सिंह
पानीपत। पिछले दो साल तक कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को प्रभावित किया। गर्भवतियों व बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग बच्चों के नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाएगा। पांच साल के तक के जिन बच्चों की टीके की खुराक रह गई है। उनको टीका लगाया जाएगा। विभाग जिले में 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण करने का दावा करता हैं। बावजूद इसके विभिन्न कारणों से पिछले पांच साल में 1675 बच्चों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में 425 बच्चों की मौत हो चुकी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) टीकाकरण की प्लानिंग करता है। यूनिसेफ आर्थिक मदद प्रदान करता है। हरियाणा में करीब 90 फीसद बच्चों का ही टीकाकरण होता है। रूटीन टीकाकरण में पिछड़ने का कारण अभिभावकों की लापरपाही,विभागीय टीमों का आउट रिच तक नहीं पहुंचना और संबंधित विभागों की सुस्ती को माना जाता रहा है। हालांकि, हेल्थ मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (एचआइएमएस) पानीपत की रिपोर्ट शत-प्रतिशत टीकाकरण का दावा करती है।
शिशु मृत्यु दर घटे, इसके लिए केंद्र और हरियाणा सरकार का टीकाकरण पर विशेष फोकस रहता है।अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी केंद्रों में टीका लगवाकर, उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से बचाएं। दूसरे राज्यों के परिवारों के आवागमन के कारण कुछ बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं।
शून्य से पांच वर्ष के बच्चों की मौत
2018-19 493
2019-20 556
020-21 425
2021-22 201
टीकाकरण की आयु टीका-वैक्सीन
– जन्म के बाद 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी व ओपीवी (पोलियो खुराक)
– जन्म के तुरंत बाद, एक वर्ष तक बीसीजी (टीबी से बचाव)
– डेढ़ माह में ओपीवी, पैंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी (निमोनिया)
– ढाई माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट और रोटावायरस का टीका-वैक्सीन
– साढ़े तीन माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी-13, आइवीपी
– नौ माह में एमआर(खसरा), जेई (जापानी बुखार), पीसीवी बूस्टर
– 16 से 24 माह में डीपीटी बूस्टर, विटामिन-ए, एमआर-जेई, ओपीवी बूस्टर
– पांच-छह आयु में डीपीटी बूस्टर-टू
टीका-वैकसीन और लाभ
बीसीजी : टीबी के खतरे को कम करता है।
ओपीवी : यह वैक्सीन पोलियो का खतरा कम करती है।
पैंटावैलेंट : गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार और पीलिया का खतरा कम।
रोटावायरस : डायरिया, बुखार-उल्टी का खतरा कम करता है।
पीसीवी : निमोनिया, दिमागी बुखार व कान के संक्रमण को कम करता है।
आइपीवी : यह पोलियो रोधी वैक्सीन है।
एमआर : यह टीका मीजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा) से बचाता है।
जेई : यह टीका बच्चों को जापानी बुखार से बचाता है।
टीडी : यह बूस्टर टीका है, टिटनेस और गलघोंटू से बचाव करता है।
12 जून तक चलेगा अभियान, अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने का प्रयास- डॉ शशि
12 जून तक जिले में टीकाकरण के लिए अभियान चलेगा। इसके लिए आशा वर्करों की मीटिंग की जा चुकी है। आशा वर्कर व एएनएम इसके लिए फील्ड में उतर चकी हैं। जिन बच्चों के टीके की खुराक रह गई है। उनको चिह्नित कर टीका लगाया जाएगा। उनका प्रयास अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना और शिशु मृत्यूदर में कमी लाना है।
डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन

पानीपत। पिछले दो वर्षों तक कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को प्रभावित किया। गर्भवतियों और बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग बच्चों के नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए छह से 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाएगा। पांच साल तक के जिन बच्चों की टीके की खुराक रह गई है, उन्हें टीका लगाया जाएगा। विभाग जिले में 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण करने का दावा करता है। बावजूद इसके विभिन्न कारणों से पिछले पांच वर्ष में 1675 बच्चों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में 425 बच्चों की मौत हुई थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) टीकाकरण की योजना बनाता है। यूनिसेफ आर्थिक मदद करता है। हरियाणा में करीब 90 फीसद बच्चों का ही टीकाकरण होता है। रूटीन टीकाकरण में पिछड़ने का कारण अभिभावकों की लापरपाही, विभागीय टीमों का आउट रिच तक नहीं पहुंचना और संबंधित विभागों की सुस्ती मानी जाती रही है। हालांकि, हेल्थ मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम (एचआईएमएस) पानीपत की रिपोर्ट शत-प्रतिशत टीकाकरण का दावा करती है।

शिशु मृत्यु दर घटे, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार का टीकाकरण पर विशेष फोकस रहता है। अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी केंद्रों में टीके लगवाकर, उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से बचाएं। दूसरे राज्यों के परिवारों के आवागमन के कारण कुछ बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं।



पांच वर्ष तक के बच्चों की मौत आंकड़ा

2018-19 493

2019-20 556

2020-21 425

2021-22 201

टीकाकरण की आयु और टीका

– जन्म के बाद 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी और ओपीवी (पोलियो खुराक)

– जन्म के तुरंत बाद, एक वर्ष तक बीसीजी (टीबी से बचाव)

– डेढ़ माह में ओपीवी, पैंटावैलेंट, रोटा वायरस, पीसीवी (निमोनिया)

– ढाई माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट और रोटावायरस का टीका

– साढ़े तीन माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी-13, आइवीपी

– नौ माह में एमआर(खसरा), जेई (जापानी बुखार), पीसीवी बूस्टर

– 16 से 24 माह में डीपीटी बूस्टर, विटामिन-ए, एमआर-जेई, ओपीवी बूस्टर

– पांच-छह वर्ष आयु में डीपीटी बूस्टर-टू



टीका-वैक्सीन और लाभ

बीसीजी : टीबी के खतरे को कम करता है।

ओपीवी : यह वैक्सीन पोलियो का खतरा कम करती है।

पेंटावैलेंट : गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार और पीलिया का खतरा कम।

रोटावायरस : डायरिया, बुखार-उल्टी का खतरा कम करता है।

पीसीवी : निमोनिया, दिमागी बुखार और कान के संक्रमण को कम करता है।

आइपीवी : यह पोलियोरोधी वैक्सीन है।

एमआर : यह टीका मीजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा) से बचाता है।

जेई : यह टीका बच्चों को जापानी बुखार से बचाता है।

टीडी : यह बूस्टर टीका है, टिटनेस और गलघोंटू से बचाव करता है।



छह से 12 जून तक चलेगा अभियान

छह से 12 जून तक जिले में टीकाकरण के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए आशा वर्करों की मीटिंग की जा चुकी है। जिन बच्चों के टीके की खुराक रह गई है। उनको चिह्नित कर टीका लगाया जाएगा। उनका प्रयास अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना और शिशु मृत्युदर में कमी लाना है।

– डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन



मूल खबर…

90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण, फिर भी पांच साल में 1675 बच्चों की मौत

– 12 जून तक स्वास्थ्य विभाग चलाएगा टीकाकरण अभियान

– जिन बच्चों की टीकाकरण की खुराक रह गई है उनको लगाया जाएगा टीका

संदीप सिंह

पानीपत। पिछले दो साल तक कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को प्रभावित किया। गर्भवतियों व बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। अब स्वास्थ्य विभाग बच्चों के नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए 12 जून तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाएगा। पांच साल के तक के जिन बच्चों की टीके की खुराक रह गई है। उनको टीका लगाया जाएगा। विभाग जिले में 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण करने का दावा करता हैं। बावजूद इसके विभिन्न कारणों से पिछले पांच साल में 1675 बच्चों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में 425 बच्चों की मौत हो चुकी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) टीकाकरण की प्लानिंग करता है। यूनिसेफ आर्थिक मदद प्रदान करता है। हरियाणा में करीब 90 फीसद बच्चों का ही टीकाकरण होता है। रूटीन टीकाकरण में पिछड़ने का कारण अभिभावकों की लापरपाही,विभागीय टीमों का आउट रिच तक नहीं पहुंचना और संबंधित विभागों की सुस्ती को माना जाता रहा है। हालांकि, हेल्थ मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (एचआइएमएस) पानीपत की रिपोर्ट शत-प्रतिशत टीकाकरण का दावा करती है।

शिशु मृत्यु दर घटे, इसके लिए केंद्र और हरियाणा सरकार का टीकाकरण पर विशेष फोकस रहता है।अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी केंद्रों में टीका लगवाकर, उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से बचाएं। दूसरे राज्यों के परिवारों के आवागमन के कारण कुछ बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं।

शून्य से पांच वर्ष के बच्चों की मौत

2018-19 493

2019-20 556

020-21 425

2021-22 201

टीकाकरण की आयु टीका-वैक्सीन

– जन्म के बाद 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी व ओपीवी (पोलियो खुराक)

– जन्म के तुरंत बाद, एक वर्ष तक बीसीजी (टीबी से बचाव)

– डेढ़ माह में ओपीवी, पैंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी (निमोनिया)

– ढाई माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट और रोटावायरस का टीका-वैक्सीन

– साढ़े तीन माह में ओपीवी, पेंटावैलेंट, रोटावायरस, पीसीवी-13, आइवीपी

– नौ माह में एमआर(खसरा), जेई (जापानी बुखार), पीसीवी बूस्टर

– 16 से 24 माह में डीपीटी बूस्टर, विटामिन-ए, एमआर-जेई, ओपीवी बूस्टर

– पांच-छह आयु में डीपीटी बूस्टर-टू

टीका-वैकसीन और लाभ

बीसीजी : टीबी के खतरे को कम करता है।

ओपीवी : यह वैक्सीन पोलियो का खतरा कम करती है।

पैंटावैलेंट : गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार और पीलिया का खतरा कम।

रोटावायरस : डायरिया, बुखार-उल्टी का खतरा कम करता है।

पीसीवी : निमोनिया, दिमागी बुखार व कान के संक्रमण को कम करता है।

आइपीवी : यह पोलियो रोधी वैक्सीन है।

एमआर : यह टीका मीजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा) से बचाता है।

जेई : यह टीका बच्चों को जापानी बुखार से बचाता है।

टीडी : यह बूस्टर टीका है, टिटनेस और गलघोंटू से बचाव करता है।

12 जून तक चलेगा अभियान, अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने का प्रयास- डॉ शशि

12 जून तक जिले में टीकाकरण के लिए अभियान चलेगा। इसके लिए आशा वर्करों की मीटिंग की जा चुकी है। आशा वर्कर व एएनएम इसके लिए फील्ड में उतर चकी हैं। जिन बच्चों के टीके की खुराक रह गई है। उनको चिह्नित कर टीका लगाया जाएगा। उनका प्रयास अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना और शिशु मृत्यूदर में कमी लाना है।

डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन

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