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800 परिवारों ने आशियाने बचाने के लिए लगाई गुहार


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गुरुग्राम। मानेसर नगर निगम के कासन, सहरावन और कुकडौला के ग्रामीणों ने हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना एवं विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के स्टेट ऑफिसर सुनील दत्त पालीवाल को प्रबंध निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर 800 परिवारों ने आशियाने बचाने की गुहार लगाई है।
एचएसआईआईडीसी की ओर से तीनों गांवों के अलावा अलियर, ढाणा, बास, कुशला, ततारपुर, मोकलवास, नखडौला, नैनवाल, खोह सहित आसपास की 1810 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है। निगम की ओर से सेक्शन चार के बाद सेक्शन छह के नोटिस भी दे दिए हैं। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिग्रहण को निरस्त कर दिया है, बावजूद इसके एचएसआईआईडीसी गैर कानूनी तरीके से जमीन अधिग्रहण पर अड़ा है।
खोह के सरपंच रोहतास के अनुसार 1997 से यहां लगातार भूमि अधिग्रहित की जा रही है। जिस कारण परिवार बार-बार विस्थापित होकर यहां बसे हैं। 250 परिवार तो छह दशक पहले बसी ढाणियों में रह रहे हैं, जबकि 550 परिवार विस्थापित होकर लाल डोरे के बाहर बसने को मजबूर हुए हैं। इन परिवारों से उनके आशियाने छीने जा रहे हैं।
कासन गांव के एडवोकेट वीके चौहान ने बताया कि जनवरी 2011 में निगम ने 1810 एकड़ अधिग्रहण के लिए सेक्शन 4 के नोटिस जारी किए थे, जिस पर कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया। हाईकोर्ट ने कुछ दिन के स्टे के बाद दिसंबर 2019 को इस मामले को निरस्त कर दिया। अगस्त 2020 में एचएसआईआईडीसी ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 6 के तहत नोटिस जारी कर दिया। चौहान ने कहा कि जब सरकार ने इस अधिनियम को ही समाप्त कर दिया है तो इस एक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण का औचित्य ही नहीं है। सरकार ने 2013 में नया संशोधित कानून पारित कर दिया है जो 2014 से लागू है। ग्रामीणों ने कानूनी तौर पर अधिग्रहण रद्द करने की मांग की है। इन लोगों ने कहा कि पिछले दिनों रेवाड़ी के बावल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ऐसा ही अधिग्रहण रद्द किया है। उन्हें भी अधिग्रहण से मुक्ति दी जाए।

गुरुग्राम। मानेसर नगर निगम के कासन, सहरावन और कुकडौला के ग्रामीणों ने हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना एवं विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के स्टेट ऑफिसर सुनील दत्त पालीवाल को प्रबंध निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर 800 परिवारों ने आशियाने बचाने की गुहार लगाई है।

एचएसआईआईडीसी की ओर से तीनों गांवों के अलावा अलियर, ढाणा, बास, कुशला, ततारपुर, मोकलवास, नखडौला, नैनवाल, खोह सहित आसपास की 1810 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है। निगम की ओर से सेक्शन चार के बाद सेक्शन छह के नोटिस भी दे दिए हैं। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिग्रहण को निरस्त कर दिया है, बावजूद इसके एचएसआईआईडीसी गैर कानूनी तरीके से जमीन अधिग्रहण पर अड़ा है।

खोह के सरपंच रोहतास के अनुसार 1997 से यहां लगातार भूमि अधिग्रहित की जा रही है। जिस कारण परिवार बार-बार विस्थापित होकर यहां बसे हैं। 250 परिवार तो छह दशक पहले बसी ढाणियों में रह रहे हैं, जबकि 550 परिवार विस्थापित होकर लाल डोरे के बाहर बसने को मजबूर हुए हैं। इन परिवारों से उनके आशियाने छीने जा रहे हैं।

कासन गांव के एडवोकेट वीके चौहान ने बताया कि जनवरी 2011 में निगम ने 1810 एकड़ अधिग्रहण के लिए सेक्शन 4 के नोटिस जारी किए थे, जिस पर कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया। हाईकोर्ट ने कुछ दिन के स्टे के बाद दिसंबर 2019 को इस मामले को निरस्त कर दिया। अगस्त 2020 में एचएसआईआईडीसी ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 6 के तहत नोटिस जारी कर दिया। चौहान ने कहा कि जब सरकार ने इस अधिनियम को ही समाप्त कर दिया है तो इस एक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण का औचित्य ही नहीं है। सरकार ने 2013 में नया संशोधित कानून पारित कर दिया है जो 2014 से लागू है। ग्रामीणों ने कानूनी तौर पर अधिग्रहण रद्द करने की मांग की है। इन लोगों ने कहा कि पिछले दिनों रेवाड़ी के बावल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ऐसा ही अधिग्रहण रद्द किया है। उन्हें भी अधिग्रहण से मुक्ति दी जाए।

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