25 साल पुराने मर्डर केस में बुजुर्ग को राहत: हाईकोर्ट ने हत्या की सजा बदली, गैर इरादतन हत्या मानकर जेल में बिताया समय ही माना दंड – Karnal News Chandigarh News Updates

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने करीब ढाई दशक पुराने एक मामले में 94 वर्षीय व्यक्ति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने हत्या के दोष से मुक्त करते हुए मामले को गैर इरादतन हत्या की कैटेगिरी में माना और सजा को आरोपी द्वारा पहले ही जेल में बिताए गए समय तक सीमित कर दिया। अदालत ने फैसले में आरोपी की अत्यधिक वृद्धावस्था, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और पहले से काटी गई सजा को अहम आधार बनाया। क्या था पूरा मामला
मामला करनाल से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, करनाल निवासी स्वर्ण सिंह को अपनी बेटी के कथित अवैध संबंधों को लेकर संदेह था। इसी को लेकर दिसंबर 2000 में विवाद बढ़ गया। इस दौरान हाथापाई हुई और आरोप है कि स्वर्ण सिंह ने कथित प्रेमी पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया और निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट में सुनवाई और अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस एनएस शेखावत और जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने की। अदालत ने केस के तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई से विश्लेषण किया। कोर्ट ने माना कि यह मामला सुनियोजित हत्या का नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या का बनता है। फैसले में कहा गया कि घटना अचानक हुई हाथापाई के दौरान हुई और इसमें हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता। सजा में संशोधन
कोर्ट ने अपीलकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और जेल में बिताए गए समय को देखते हुए सजा में बड़ा संशोधन किया। राज्य सरकार द्वारा पेश हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, आरोपी पहले ही 6 साल 4 महीने से अधिक समय जेल में काट चुका है। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए सजा को केवल उतनी अवधि तक सीमित कर दिया, जितनी आरोपी पहले ही जेल में भुगत चुका है। हालांकि, जुर्माने की राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया। न्यायिक संतुलन पर जोर
हाईकोर्ट ने साफ किया कि सजा तय करते समय केवल अपराध ही नहीं, बल्कि आरोपी की वर्तमान स्थिति और मानवीय पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के इस फैसले को उम्रदराज आरोपियों और लंबे समय से लंबित मामलों में न्यायिक संतुलन की मिसाल माना जा रहा है।

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25 साल पुराने मर्डर केस में बुजुर्ग को राहत: हाईकोर्ट ने हत्या की सजा बदली, गैर इरादतन हत्या मानकर जेल में बिताया समय ही माना दंड – Karnal News