होलिका दहन के कितने फेरे लगाएं? क्या है सही तरीका..यहां जानिए पूरी जानकारी Haryana News & Updates

[ad_1]

फरीदाबाद: फाल्गुन महीने की पूनम की रात लोग होलिका दहन करते हैं. इसी रात मोहल्ले-मोहल्ले में लकड़ियां, उपले, सूखी टहनियां जमा की जाती हैं और बुराई के प्रतीक के तौर पर होलिका जलाई जाती है. होली की शुरुआत यहीं से होती है और सच कहूं तो, ये सिर्फ कोई रस्म नहीं है ये लोगों की आस्था और विश्वास का त्योहार है. मान्यता है कि इसी रात अच्छाई ने बुराई को हराया था और भगवान ने खुद भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. इसलिए लोग होलिका दहन को बहुत पवित्र मानते हैं.

इस बार 2 मार्च की रात होलिका दहन

होलिका दहन हमेशा रात को किया जाता है, कभी दिन में नहीं. हर साल शुभ मुहूर्त देखकर ही सब लोग इसे करते हैं. इस बार 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा. वैदिक पंचांग में यही तारीख निकली है.

होलिका दहन से पहले ठीक से पूजा-पाठ करना जरूरी

Local18 से बातचीत में कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया कि होलिका दहन से पहले ठीक से पूजा-पाठ करना जरूरी है. पूजा में रोली, चावल, हल्दी, फूल, नारियल, गेहूं की बालियां और उपले जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं फिर अग्नि प्रज्वलित की जाती है. उन्होंने बताया कि होलिका की अग्नि की परिक्रमा करने का भी खास महत्व है लेकिन लोग अकसर कन्फ्यूज रहते हैं कि कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए.

सात बार परिक्रमा करना जरूरी

वेदांताचार्य के मुताबिक अग्नि की सात बार परिक्रमा करना सबसे अच्छा माना जाता है. जैसे भगवान विष्णु की 4 बार परिक्रमा होती है, वैसे ही यहां 7 बार. अगर समय कम हो तो कम से कम तीन परिक्रमा जरूर करें. श्रद्धा और समय हो तो सात ही करें. परिक्रमा हमेशा दाईं ओर से होती है यानी अग्नि आपकी दायीं तरफ रहे. जहां से शुरू किया और वहीं आकर एक चक्कर पूरा हुआ वही एक परिक्रमा है.

ओम नमः वासुदेवाय मंत्र का जाप करना जरूरी

उन्होंने ये भी बताया कि होलिका दहन के समय ओम नमः वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए. भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के सच्चे भक्त थे इसी वजह से वे अग्नि में भी सुरक्षित रहे. इसी आस्था के साथ लोग होलिका में उपले नीम या बेर की लकड़ी डालते हैं इसका मतलब है कि हमें भी हमेशा धर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए.

क्या है होलिका की की कहानी

कहानी तो सबको पता है होलिका को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि वो अग्नि में नहीं जलेगी, लेकिन जैसे ही उसने उस वरदान का गलत इस्तेमाल किया और प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की वो खुद जल गई. इसी वजह से आज भी होलिका दहन होता है, ताकि हम न भूलें कि आखिर में जीत हमेशा सच्चाई और अच्छे कर्मों की होती है चाहे रावण का पुतला जलाओ या होलिका.

होलिका दहन का असली संदेश यही है अच्छे कर्म करो धर्म के रास्ते पर चलो और बुराई से खुद को दूर रखो. यही इस त्योहार की असली सीख है.

[ad_2]