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हिंदू विवाह में दुल्हन का लाल जोड़ा शुभता, शक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. लाल रंग देवी लक्ष्मी की कृपा, अग्नि की पवित्रता और साहस का प्रतीक है. इसी आस्था के कारण दुल्हन को घर की लक्ष्मी मानकर लाल परिधान पहनाने की परंपरा सदियों से निभाई जाती है.
हिंदू शादियों में दुल्हन का लाल पहनना बहुत पुरानी परंपरा मानी जाती है. लाल रंग को शुभ शुरुआत और खुशियों का प्रतीक समझा जाता है. इसलिए विवाह के दिन दुल्हन को लाल पहनाना घर-परिवार के लिए मंगल माना जाता है.

महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि विवाह केवल एक रस्म नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण संस्कार है. उनके अनुसार दुल्हन को लाल जोड़ा पहनाना इसलिए जरूरी माना गया है, क्योंकि यह रंग देवी की कृपा और परिवार की उन्नति का संकेत देता है.

मान्यता है कि लाल रंग धन और सुख-समृद्धि की देवी लक्ष्मी का प्रिय रंग है. शादी के दिन दुल्हन को देवी का स्वरूप मानकर उसे लाल परिधान दिया जाता है, ताकि नया घर खुशियों और बरकत से भरा रहे.
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लाल रंग को अग्नि का भी रूप माना गया है, चूंकि हिंदू विवाह अग्नि को साक्षी मानकर होता है इसलिए दुल्हन का लाल परिधान इस पवित्र आग की ऊर्जा और पवित्रता का संकेत माना जाता है.

लाल रंग साहस, आत्मविश्वास और नई शुरुआत को दर्शाता है. शादी लड़की के जीवन में एक बिल्कुल नया अध्याय होता है इसलिए यह रंग उसे शक्ति और सकारात्मकता से भरा हुआ माना जाता है.

समय के साथ यह परंपरा और मजबूत होती गई. लोगों का विश्वास है कि दुल्हन जब लाल पहनकर घर आती है, तो उसके साथ शुभता भी आती है. इसी वजह से दुल्हन को घर की लक्ष्मी भी कहा जाता है.

कहा जाता है कि मां धनलक्ष्मी की वेशभूषा भी लाल रंग की होती है. इसी आस्था के कारण विवाह में दुल्हन को लाल पहनाने की परंपरा आज तक निभाई जाती है ताकि परिवार पर देवी की कृपा बनी रहे.
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