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पारंपरिक कर्नाटक की अक्की रोटी हल्की, स्वादिष्ट और पूरी तरह से ग्लूटन-फ्री है. इसमें प्याज, गाजर, हरी मिर्च और धनिया भरपूर मात्रा में मिलाए जाते हैं, जिससे यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए पचाने में आसान बनती है. इसे हाथ से बनाया जाता है और तवे पर सुनहरा होकर सेंका जाता है. अब हरियाणा में भी लोग इसे नारियल या टमाटर की चटनी, दाल या घी के साथ खाना पसंद करने लगे हैं.
कर्नाटक की अक्की रोटी हर घर की रसोई में अपनी अलग पहचान रखती है. यह चावल के आटे से बनाई जाती है, हल्की होती है और नाश्ते या हल्के भोजन के लिए बिल्कुल सही विकल्प है. पेट भरता है और स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का मन करता है.

अक्की रोटी में गेहूं नहीं होता, इसलिए यह पूरी तरह से ग्लूटन-फ्री है. जिन्हें ग्लूटन से समस्या होती है, उनके लिए यह बिल्कुल सुरक्षित विकल्प है. साथ ही, डाइटिंग कर रहे लोग इसे अपने रोज़मर्रा के खाने में आसानी से शामिल कर सकते हैं.

इस रोटी में प्याज, गाजर, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाया जाता है. इन सब्जियों से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है और फाइबर भी पर्याप्त मिलता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह रोटी हल्की और पचने में आसान होती है.
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चावल के आटे में सब्जियां डालें और थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर नरम आटा गूंथ लें. इसे बेलन की बजाय हाथ से फैलाया जाता है, जिससे इसकी खुशबू में एक अलग ही घरेलूपन और खास स्वाद बना रहता है.

तवा गर्म करें, हाथ थोड़े गीले करें और आटे की लोई तवे पर फैलाएं. ऊपर से थोड़ा तेल डालें और दोनों तरफ से सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें. गर्म-गर्म अक्की रोटी का स्वाद ही कुछ अलग और लाजवाब होता है.

अक्की रोटी हल्की होते हुए भी लंबे समय तक पेट भरा रखती है. चावल से तुरंत ऊर्जा मिलती है और सब्जियों से फाइबर मिलता है. डायबिटीज वाले लोग इसे सीमित मात्रा में खाने पर भी शरीर को पर्याप्त पोषण प्राप्त कर सकते हैं.

अब हरियाणा में भी अक्की रोटी धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है. लोग इसे नारियल या टमाटर की चटनी के साथ खाना पसंद करते हैं. इसके साथ दाल, सब्जी या घी परोसा जाए तो इसका स्वाद और पोषण दोनों ही बढ़ जाते हैं.
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