हाईकोर्ट की प्रदर्शनकारी PU स्टूडेंट्स को दोटूक: पहले 7 दिन पढ़ाई करो, इसके बाद मामला देखेंगे, यूनिवर्सिटी का काम एजुकेशन देना – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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पंजाब एंड हरियाणा होईकोर्ट ने स्टूडेंट को भी फटकार लगाई है।

पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट के चुनाव का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है। पूर्व सीनेटर हरप्रीत सिंह दुआ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याची समेत प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स को कड़ी फटकार लगाई है। को

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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा- पंजाब विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का चुनाव के लिए बलिदान नहीं दिया जा सकता। स्टूडेंट को पहले 7 दिन पढ़ाई करनी चाहिए। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कर रही है।

मामले में चीफ जस्टिस ने कहा,

“हम एक शैक्षणिक संस्था की बात कर रहे हैं या राजनीतिक संस्था की?” कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना है और यह मकसद धीरे-धीरे पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।

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चंडीगढ़ में पीयू में स्टूडेंट विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में गया।

चंडीगढ़ में पीयू में स्टूडेंट विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में गया।

अब पढ़िए हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में क्या कहा…

  • यूनिवर्सिटी का मेन काम एजुकेशन: सुनवाई के दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट का मेन मोटिव एजुकेशन लेना है। स्टूडेंट अपने माता-पिता के प्रयासों से यूनिवर्सिटी में पढ़ने आते हैं। इसलिए यूनिवर्सिटी का मूल ऑबजेक्टिव चुनाव नहीं बल्कि एजुकेशन है।
  • क्लास में लौटे स्टूडेंट, इसके बाद मामला देखेंगे: कोर्ट ने आगे कहा कि स्टूडेंट अपनी कक्षाओं में लौटें। चीफ जस्टिस शील नागू ने कहा- स्टूडेंट अपनी कक्षा में जाए। कम से कम सात दिन नियमित रूप से पढ़ाई करें, फिर हम इस मामले की सुनवाई करेंगे। यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को बताया था कि छात्र आंदोलन के चलते कैंपस में पढ़ाई बाधित हो रही है।
  • मध्य प्रदेश में 5 साल तक चुनाव नहीं हुआ: पीठ ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पांच साल तक यूनिवर्सिटी में चुनाव नहीं हुए, फिर भी शैक्षणिक गतिविधियां शांतिपूर्वक चलती रहीं और टीचर-स्टूडेंट भी इससे संतुष्ट है।
प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट गेट तोड़कर यूनिवर्सिटी के अंदर घुस गए थे।

प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट गेट तोड़कर यूनिवर्सिटी के अंदर घुस गए थे।

याचिकाकर्ता की मामले में 3 बातें…

  • याचिकाकर्ता हरप्रीत सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन बार-बार सीनेट चुनाव टाल रहा है, जबकि पहले भी वाइस-चांसलर की कार्यशैली पर अदालत ने टिप्पणी की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
  • हरप्रीत ने कहा कि पिछले कई दिनों से सीनेट चुनाव कार्यक्रम की तत्काल घोषणा की मांग को लेकर पीयू कैंपस में आंदोलन हो रहा है। इस सप्ताह एक अर्जी दायर की गई थी। इसमें यूनिवर्सिटी को चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
  • याची हरप्रीत सिंह दुआ चुनाव देरी को “सुनियोजित कदाचार” बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए विश्वविद्यालय चांसलर की तरफ से पेश वकील सतपाल जैन को कहा कि वह चांसलर से आग्रह करे की चुनाव कार्यक्रम को जल्द मंजूरी दे।

केंद्र सरकार ने भंग किया था सीनेट केंद्र सरकार की तरफ से 28 अक्तूबर को नोटीफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट को भंग कर दिया था। इसे लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों की तरफ से प्रदर्शन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया, मगर अब छात्र संगठन जल्द से जल्द सीनेट चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से चुनाव का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन स्टूडेंट लिखित में जल्द चुनाव कराने की मांग पर अड़े हैं। इसी को लेकर तीन बार के सीनेटर हरप्रीत सिंह दुआ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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