हरियाणा के छोटे से गांव ने बदल दी परंपरा, बेटियों के नाम से हो रही घर की पहचान Haryana News & Updates

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अंबाला: अक्सर देखा जाता है कि घर के बाहर लगी नेम प्लेट पर पुरुषों का नाम लिखा होता है और उसी नाम से घर की पहचान भी होती है. लेकिन अंबाला के खेड़ा गनी गांव ने इस परंपरा को बदलते हुए एक भावुक और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है. दरअसल, इस गांव में अब घरों के बाहर पढ़ी-लिखी महिलाओं के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही हैं. जैसे ही ये नेम प्लेट घरों के बाहर लगीं, महिलाओं की आंखों में खुशी और गर्व साफ दिखाई देने लगा.

क्यों बना है चर्चा में

बता दें कि अंबाला जिले का खेड़ा गनी गांव भले ही छोटा है, लेकिन ग्राम पंचायत के इस फैसले के बाद आज यह न केवल हरियाणा बल्कि विदेशों तक चर्चा का विषय बन गया है. जब लोकल 18 की टीम ने स्थानीय महिलाओं से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने जिंदगी भर पढ़ाई की और डिग्रियां भी हासिल कीं, लेकिन कभी यह एहसास नहीं हुआ कि उनकी पढ़ाई उनकी इतनी बड़ी पहचान बन सकती है. आज जब घर के बाहर उनके नाम की नेम प्लेट लगी है, तो उन्हें पहली बार सच में गर्व महसूस हो रहा है. महिलाओं का कहना है कि ग्राम पंचायत के इस फैसले ने उन्हें सम्मान दिया है और अब गांव की बेटियों को भी एक नया संदेश मिल रहा है कि पढ़ाई सिर्फ डिग्री लेने के लिए नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने के लिए भी होती है.

करीब 30 से ज्यादा घरों के बाहर बहू-बेटियों के नाम की नेम प्लेट

गांव के सरपंच परवीन धीमन ने बताया कि कुछ समय पहले गांव में एक महिला ग्राम सभा आयोजित की गई थी. वहीं से यह विचार सामने आया कि गांव में सर्वे किया जाए कि कितनी बहू-बेटियां ग्रेजुएशन तक पढ़ी हुई हैं. उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान आंकड़े चौंकाने वाले थे, क्योंकि गांव की बहू-बेटियां काफी ज्यादा पढ़ी-लिखी निकलीं. इसके बाद गांव में अब तक करीब 30 से ज्यादा घरों के बाहर बहू-बेटियों के नाम की नेम प्लेट उनकी क्वालिफिकेशन के साथ लगाई जा चुकी है.

गांव की कुल आबादी लगभग 400 के आसपास

उन्होंने बताया कि गांव की कुल आबादी लगभग 400 के आसपास है और करीब 300 वोटर हैं, जिनमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या अधिक है और वे काफी पढ़ी-लिखी भी हैं. खास बात यह है कि कई घर ऐसे भी हैं जहां एक साथ दो या तीन महिलाओं के नाम लिखे गए हैं.

खेड़ा गनी गांव की यह पहल सिर्फ नेम प्लेट लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, उनकी शिक्षा और उनकी पहचान को नया मुकाम देने की शुरुआत है. सरपंच ने बताया कि कई बच्चियां ऐसी होती हैं जो 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं, लेकिन अब उन्हें प्रेरणा मिल रही है कि कम से कम ग्रेजुएशन जरूर करें, ताकि उनके नाम की नेम प्लेट भी घर के बाहर लग सके. उन्होंने कहा कि अब गांव की छोटी बेटियां इन नेम प्लेट को देखकर पढ़ाई के प्रति ज्यादा जागरूक हो रही हैं.

वहीं अलका सैनी ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र जिले की रहने वाली हैं और खेड़ा गनी गांव की बहू हैं. उन्होंने कहा कि गांव में बहू-बेटियों की क्वालिफिकेशन के साथ नेम प्लेट लगाए जाने से उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है. उनके मुताबिक गांव में बेटियों की पढ़ाई को लेकर एक बड़ा सम्मान दिया गया है और अब लगता है कि हरियाणा के सभी गांवों में भी इस तरह बेटियों के नाम की नेम प्लेट घरों के बाहर लगाई जानी चाहिए.

हर लड़की को अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए

खेड़ा गनी गांव की बेटी निशा ने बताया कि उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई की है और अब नौकरी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत ने महिलाओं और बेटियों को नई पहचान देने की कोशिश की है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हर लड़की को अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए, ताकि समाज में उसकी भी एक अलग पहचान बन सके.

बेटी सिमरन सैनी ने बताया कि उन्होंने बीकॉम से ग्रेजुएशन पूरा किया है और अब एमकॉम की पढ़ाई कर रही हैं. साथ ही वह ट्यूशन भी पढ़ाती हैं. उन्होंने बताया कि जब गांव की बच्चियां ट्यूशन पढ़ने आती हैं, तो अक्सर पूछती हैं कि दीदी, आपके घर के बाहर जो नेम प्लेट लगी है, वैसी हम भी अपने घर के बाहर लगवाना चाहते हैं. तब उन्हें ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि वे भी आगे बढ़कर गांव का नाम रोशन करें और उनके नाम की नेम प्लेट भी घर के बाहर लग सके.

ग्राम पंचायत का बेहद सराहनीय कदम

सिमरन ने बताया कि जब कोई व्यक्ति घर के बाहर लगी नेम प्लेट देखता है, तो माता-पिता से कहता है कि आपकी बेटी इतनी पढ़ी-लिखी है, जिससे उन्हें काफी गर्व महसूस होता है. उन्होंने कहा कि पहले घर के बाहर पुरुषों के नाम की नेम प्लेट लगती थी, लेकिन अब उनके गांव में बेटियों और बहुओं के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही है, जो ग्राम पंचायत का बेहद सराहनीय कदम है. उन्होंने कहा कि इस नाम और क्वालिफिकेशन वाली प्लेट को देखकर अब आगे बढ़ने की प्रेरणा और भी ज्यादा मिल रही है.

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