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17 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा ह्यूमन एंड एनवायर्नमेंटल फिजियोलॉजी रिसर्च यूनिट (HEPRU) की एक हालिया स्टडी के मुताबिक, 37 डिग्री से ज्यादा टेम्परेचर होने पर ही हमारे शरीर को समस्या होने लगती है और यह हरकत में आ जाता है। अभी तक की स्टडीज में माना जाता था कि इंसान 40-42 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर आराम से सहन कर लेता है, पर ऐसा नहीं है। अगर वातावरण में नमी यानी ह्यूमिडिटी है तो यह और खतरनाक हो सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल देश के नॉर्थ-वेस्ट राज्यों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या दोगुनी हो सकती है। आमतौर पर अप्रैल से जून के महीनों में लगातार 5-6 दिन लू चलती है, लेकिन इस बार 10 से 12 दिनों के ऐसे कई दौर आ सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हीटवेव के दिनों की संख्या दोगुनी हुई तो 2025 अब तक का सबसे गर्म साल होगा।
इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में जानेंगे कि इंसान कितना टेम्परेचर सहन कर सकता है? साथ ही जानेंगे कि-
- वेब बल्ब टेम्परेचर क्या है?
- टेम्परेचर बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
- इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
इंसान कितना टेम्परेचर सहन कर सकता है?
हमारा शरीर एक खास सीमा तक यानी 37 डिग्री सेल्सियस तक ही गर्मी सहन कर सकता है। अगर तापमान इससे थोड़ा बढ़ता है तो शरीर खुद को ठंडा करने के लिए पसीना निकालता है। यह सबकुछ हमारे शरीर के थर्मोरेगुलेशन यानी तापमान नियंत्रण प्रणाली पर निर्भर करता है।

37 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा टेम्परेचर होने पर क्या होता है?
डॉ. सुनील राणा कहते हैं कि 37 डिग्री सेल्सियस तक तो सबकुछ ठीक है। इसके बाद शरीर को समस्या होने लगती है। इसके लिए शरीर कुछ देर कर तो पसीने से खुद को ठंडा कर सकता है। अगर टेम्परेचर 42 डिग्री के पार जाने लगता है तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। ग्राफिक से समझिए-

ग्राफिक में दिए सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए-
37°C – 38°C- आमतौर पर सब कुछ सामान्य रहता है, लेकिन शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ने पर पसीना निकलने लगता है। हल्की थकावट और कमजोरी महसूस हो सकती है।
38°C – 40°C- पसीना बढ़ने लगता है, लेकिन अगर हवा में नमी ज्यादा है तो पसीना वाष्पित नहीं हो पाता है। इससे शरीर का तापमान और बढ़ सकता है। इसमें व्यक्ति को चक्कर, सिरदर्द और थकावट की समस्या हो सकती है।
40°C – 42°C- शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली दबाव में आ जाती है। पसीना कम होने लगता है और शरीर का तापमान बढ़ सकता है। हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शरीर के अंगों की काम करने की क्षमता भी कम हो सकती है। अगर शरीर का तापमान सामान्य नहीं किया गया तो यह खतरनाक हो सकता है।
42°C – 45°C- यह स्थिति गंभीर है। शरीर का तापमान इस सीमा तक बढ़ने से अंग काम करना बंद कर सकते हैं। अगर इस स्थिति में तत्काल इलाज न मिले तो यह लाइफ थ्रेटनिंग हो सकता है।
45°C से ज्यादा- जब शरीर का तापमान 45°C से ऊपर चला जाता है तो यह शरीर के लिए जहर की तरह काम कर सकता है। लिवर, किडनी और कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं। अगर तत्काल इलाज न मिले तो स्ट्रोक या मौत हो सकती है।
हवा में नमी है तो हाई टेम्परेचर ज्यादा खतरनाक
शरीर का तापमान सामान्य रखने के लिए पसीना एक महत्वपूर्ण तरीका है। जब शरीर का टेम्परेचर बढ़ता है तो पसीना निकलता है और जब यह वाष्पित होता है शरीर को ठंडा हो जाता है।
जब हवा में नमी होती है तो क्या होता है?
- नमी का मतलब है कि हवा में पहले से पानी मौजूद है तो यह पानी पसीने को सही से सूखने नहीं देता है।
- अगर पसीना सूख नहीं रहा है तो शरीर का टेम्परेचर कम नहीं होगा और उसकी पसीने वाली तरकीब काम नहीं आएगी। इसे वेट बल्ब टेम्परेचर कहा जाता है।
वेट बल्ब टेम्परेचर क्या है?
ज्यादा टेम्परेचर के साथ ज्यादा ह्यूमिडिटी का मेल हो जाए तो वेट बल्ब जैसे हालात बन जाते हैं। अगर थर्मामीटर को गीला करके टेम्परेचर नोट करें तो उसे वेट बल्ब टेंपरेचर कहा जाता है।

हीटवेव से बचने के लिए क्या करें?
अगर हीटवेव से बचना है तो सबसे पहले शरीर को हाइड्रेटेड रखें। इसके लिए खूब पानी पिएं ये सभी टिप्स फॉलो करें-
खूब पानी पीते रहें
गर्मी में पसीना ज्यादा निकलता है तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए दिनभर पानी पीते रहें। नारियल पानी या ORS का घोल भी पी सकते हैं। इससे शरीर में पानी और मिनरल्स दोनों की कमी को पूरी हो जाती है।
ठंडी जगह पर रहें
अगर बाहर बहुत गर्मी है तो जितना हो सके घर के अंदर ठंडी जगह पर रहें। एसी या कूलर का उपयोग करें। अगर ये उपलब्ध नहीं है तो पंखे का इस्तेमाल करें और ज्यादा समय किसी ठंडी जगह पर बिताएं।
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
गर्मी में हल्के रंग वाले और ढीले कपड़े पहनें। कपड़े ऐसे होने चाहिए, जिससे हवा पास होती रहे। बेहतर है कि सूती कपड़े पहनें। इससे शरीर को टेम्परेचर मेंटेन करने में मदद मिलती है।
धूप में जाने से बचें
धूप में बाहर जाने से बचें। खासकर सुबह के 11 बजे से लेकर दोपहर के 2-3 बजे तक सूरज की किरणें सबसे तीव्र होती हैं। अगर बाहर जाना ही है तो चश्मा और टोपी पहनें और छांव में रहें।
ठंडे पानी से नहाएं
गर्मी से राहत पाने के लिए ठंडे पानी से नहाएं। इससे शरीर का टेम्परेचर कम होता है और ठंडक महसूस होती है। ज्यादा गर्मी होने पर कुछ देर साफ-सुथरे गीले कपड़े भी अपने शरीर पर लपेट सकते हैं।
ह्यूमिडिटी वाले इलाके में जाने से बचें
जहां नमी ज्यादा होती है, वहां शरीर का पसीना सूखने में समस्या होती है। इसलिए एयर कंडीशनिंग और पंखा इस्तेमाल करें ताकि हवा में नमी कम हो।
भारी भोजन न करें
गर्मी में भारी भोजन या तला हुआ खाना खाने से बचें, क्योंकि इससे शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। हल्का खाना खाएं, ठंडे और पानी से भरपूर फल जैसे- खीरा, ककड़ी और सलाद खाएं।
हीट स्ट्रोक के लक्षण जानें
हीटवेव और लू से बचने के लिए हीट स्ट्रोक के लक्षण पहचानना जरूरी है:
- बहुत गर्मी होने पर भी पसीना न आना
- चक्कर आना, सिर दर्द होना
- बहुत कमजोरी या थकावट महसूस होना
- तेज बुखार होना
अगर ये लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत ठंडे स्थान पर जाएं, पानी पिएं और डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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