सिही गांव की बदहाल सड़कों ने खोली प्रशासन की पोल, यहां बरसात में गलियां… Haryana News & Updates

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फरीदाबाद: फरीदाबाद का सिही गांव एक ऐसा नाम जो इतिहास, आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि यह वही गांव है जिसे संत सूरदास जी की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है. महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांवों में भी इसका नाम शामिल था, जिसे उस समय श्रीपत कहा जाता था. लेकिन आज यही ऐतिहासिक गांव बदहाल हालत में है जहां कि गलियां लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं.

जगह-जगह पानी और गंदगी का अंबार

Local18 से बातचीत में गांव के लोगों ने अपनी नाराजगी और दर्द खुलकर जाहिर किया. सिही गांव के मोरा चौक और आसपास की गलियों में हालात इतने खराब हैं कि बरसात के दिनों में यहां से निकलना तक मुश्किल हो जाता है. जगह-जगह पानी भर जाता है जो कई दिनों तक सड़कों पर ही जमा रहता है और गंदगी का अंबार लगा रहता है.

स्थानीय निवासी महेश चंद्र शर्मा ने बताया दो दिन के लिए सफाई की गाड़ी आई थी, मशीनें भी लगाई गई थीं लेकिन उसके बाद सब कुछ बंद हो गया. आज तक उन मशीनों का कुछ पता नहीं है. हर बार यही कहा जाता है कि पूरे गांव की सफाई होगी, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं. बरसात में तो यहां घुटनों तक पानी भर जाता है और लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है.

पिछले 10 सालों से कोई ठोस काम नहीं हुआ

स्थानीय निवासी राजेश शर्मा ने बताया हमारा गांव ऐतिहासिक है, लेकिन यहां के हालात देखकर ऐसा नहीं लगता. पिछले 10 सालों से कोई ठोस काम नहीं हुआ है. बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, महिलाएं मंदिर तक नहीं पहुंच पातीं. यह बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है.

गंदगी के कारण ग्राहक दुकान पर नहीं आते

अजय मलिक जिनकी मोरा चौक पर दुकान है बताते हैं गंदगी के कारण ग्राहक दुकान पर नहीं आते. कई बार सामान नाली में गिर जाता है जिससे नुकसान होता है. हाल ही में एक महिला मंदिर जाते समय फिसलकर गिर गई और उनका पैर टूट गया. यहां आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता.

पंकज ने बताया गली में इतनी गंदगी है कि बच्चे तक बाहर नहीं निकल सकते. कई बार तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि हमें 8 से 10 दिन तक काम पर जाना छोड़ना पड़ता है.

संतोष ने बताया दुकान पर ग्राहक नहीं आते, क्योंकि यहां घुटनों तक पानी भर जाता है. पिछले 2 से 3 साल से हालात और ज्यादा खराब हो गए हैं.

अब तो निकलना भी मुश्किल हो गया है

बुजुर्ग राजन ने बताया मैं दो महीने से यहां रह रहा हूं और लगातार यही हालत देख रहा हूं. पिछले कुछ दिनों में समस्या और बढ़ गई है अब तो निकलना भी मुश्किल हो गया है.

वहीं पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले आकाश ने बताया गंदगी की वजह से खेलने और स्कूल जाने में बहुत दिक्कत होती है. आइसक्रीम बेचने वाले रामजी ने बताया पिछले कई दिनों से यहां गंदगी बनी हुई है. आने-जाने में बहुत परेशानी होती है जिससे काम पर भी असर पड़ता है.

शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं

गांव के लोगों का कहना है कि शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार सिर्फ कुछ दिन की सफाई होती है और फिर हालात पहले जैसे हो जाते हैं. अब लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि इस ऐतिहासिक गांव की पहचान उसकी बदहाली नहीं बल्कि उसकी विरासत से हो.

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