सिंचाई ठप, सूखती फसल..बिजली विभाग की मनमानी से परेशान सूनपेड़ गांव के किसान Haryana News & Updates

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फरीदाबाद: फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके में सुनपेड़ गांव है, जहां के लोग सब्जियां उगाने के लिए जाने जाते हैं. गांव के किसान पूरे साल खेतों में पसीना बहाते हैं, ताकि घर-परिवार का खर्च चल सके. इस समय यहां तोरी की खेती खूब हो रही है. किसानों ने बढ़िया किस्म की तोरी लगाई है जिसकी बल्लभगढ़ और फरीदाबाद की मंडियों में अच्छी मांग रहती है.

साथ ही खेतों में गेहूं की फसल भी खड़ी है. वैसे सब्जियों के दाम ठीक मिल रहे हैं लेकिन किसान खुश नहीं हैं. वजह साफ है पिछले 10 दिन से खेतों में बिजली गायब है. बिजली नहीं तो सिंचाई नहीं और अब सब्जियां सूखने लगी हैं. किसानों को डर है कि कहीं महीनों की मेहनत बेकार न हो जाए.

वक्त पर सिंचाई है जरूरी

Local18 से बात करते हुए सुनपेड़ गांव के किसान महेंद्र सैनी ने बताया कि कितनी भी अच्छी वैरायटी हो मंडी में जितना भी अच्छा रेट मिले असली फायदा तब ही है जब वक्त पर पानी मिले. पिछले 10 दिन से बिजली नहीं है, ट्रांसफार्मर खराब पड़ा है और सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है. उन्होंने जेई साहब से शिकायत भी की मगर अब तक कोई हल नहीं निकला. बिजली के बिना सब्जियां सूख रही हैं और अब लागत डूबने का डर है. सिंचाई के लिए दूसरा कोई साधन भी नहीं है किसान पूरी तरह बिजली पर निर्भर हैं.

नुकसान का डर सता रहा है

किसानों की चिंता बढ़ रही है अगर ट्रांसफार्मर जल्दी ठीक नहीं हुआ, तो नुकसान तय है. अच्छी किस्में इसी उम्मीद से बोई थीं कि अच्छा मुनाफा होगा लेकिन पानी के बिना फसल कहां बचेगी? महेंद्र सैनी ने सरकार से गुजारिश की है कि जल्दी ट्रांसफार्मर ठीक करवाएं ताकि समय पर सिंचाई हो सके और मेहनत बेकार न जाए.

बजट को लेकर भी जताई नाराजगी

महेंद्र ने आने वाले बजट को लेकर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है हर बार बजट में किसानों के लिए कुछ खास नहीं होता. डीएपी और यूरिया खाद वक्त पर नहीं मिलती. सरकार डीएपी का रेट तो 1300 रुपये बताती है, लेकिन असल में ये महंगे दामों पर मिलती है. यूरिया की कहानी भी यही है…पहले 50 किलो की बोरी मिलती थी अब 45 किलो में ही दाम बढ़ा दिए हैं.

गेहूं का रेट अभी 2475 रुपये क्विंटल है लेकिन एक एकड़ में गेहूं की लागत ही करीब 20 हजार रुपये आ जाती है. ऐसे में किसानों के पास बचता ही क्या है? अगर थोड़ी बहुत बचत हो भी जाती है तो बिजली जैसी दिक्कतें उसे भी निगल जाती हैं. किसानों का सवाल साफ है अगर सरकार वक्त पर खाद और बिजली जैसी जरूरी चीजें नहीं देगी, तो किसान आखिर जाएगा कहां?

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