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5 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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इस डिजिटल युग में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने लेन-देन को बहुत आसान बना दिया है। हालांकि इस सुविधा के साथ कुछ खतरे भी हैं। अक्सर UPI से जुड़े स्कैम सामने आते रहते हैं। अब साइबर क्रिमिनल्स ने UPI के जरिए स्कैम का एक नया तरीका ढूंढ निकाला है। इस स्कैम ने आम UPI यूजर्स के साथ-साथ साइबर क्राइम एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
इस स्कैम में साइबर क्रिमिनल्स पहले यूजर के खाते में छोटी-सी रकम डालते हैं और फिर चालाकी से बड़ी राशि वापस ठग लेते हैं। इसे ‘जंप्ड डिपॉजिट स्कैम’ नाम दिया गया है। कुछ दिन पहले तमिलनाडु की साइबर क्राइम विंग ने इस नए स्कैम को सबसे पहले पकड़ा था।
तमिलनाडु साइबर क्राइम पुलिस ने चेतावनी दी है कि सिर्फ अनजान कॉल या लिंक ही नहीं, बल्कि अचानक खाते में आई रकम भी खतरे का संकेत हो सकती है।
तो चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में ‘जंप्ड डिपॉजिट स्कैम’ के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- साइबर अपराधी जंप्ड डिपॉजिट स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?
- UPI के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है?
एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- जंप्ड डिपॉजिट स्कैम क्या है?
जवाब- यह एक नया UPI बेस्ड साइबर फ्रॉड है। इसमें ठग पहले यूजर के बैंक खाते में जानबूझकर छोटी राशि ट्रांसफर करते हैं, ताकि यूजर का ध्यान जाए। अचानक पैसे आने पर अक्सर लोग बैलेंस चेक करने या यह देखने के लिए UPI एप खोलते हैं कि पैसा कहां से आया है। इसी दौरान ठग फर्जी ‘UPI मनी रिक्वेस्ट’ भेज देते हैं।
यूजर बैलेंस चेक करने के लिए जल्दी में UPI पिन डालता है। लेकिन अनजाने में वह उस पेमेंट रिक्वेस्ट को मंजूरी दे देता है। पिन डालते ही खाते से बड़ी रकम ठग के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाती है।
कुछ मामलों में ठग कॉल या मैसेज करके दावा करते हैं कि ‘गलती से पैसे भेज दिए हैं, प्लीज वापस कर दीजिए।’ जैसे ही यूजर एप पर जाता है, साइबर क्रिमिनल फर्जी मनी रिक्वेस्ट भेजकर ठगी को अंजाम देते हैं।
सवाल- साइबर अपराधी जंप्ड डिपॉजिट स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?
जवाब- मान लीजिए आपके खाते में अचानक UPI के जरिए 50 रुपए जमा होने का मैसेज आता है। इसे देखने के लिए आप तुरंत बैंक एप खोलते हैं और बैलेंस चेक करने के लिए PIN डालते हैं। इसी दौरान ठग 500 रुपए भेजने के लिए आपको एक फर्जी मनी रिक्वेस्ट भेजता है।
चूंकि आप पहले से एप में होते हैं, ध्यान नहीं देते और रिक्वेस्ट को सही समझकर दोबारा PIN डाल देते हैं। इससे पूरे 500 रुपए ठग के खाते में चले जाते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- लोग क्यों आसानी से इस स्कैम के झांसे में आ जाते हैं?
जवाब- अचानक खाते में पैसे आने पर अक्सर लोग सोर्स और बैलेंस चेक करने के लिए एप पर जाते हैं। इसके अलावा UPI की प्रक्रिया तेज और आसान होने के कारण लोग बिना ध्यान दिए मनी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेते हैं। साइबर अपराधी इसी जल्दबाजी और डिजिटल जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं।
अक्सर यूजर यह नहीं समझ पाते कि बैलेंस चेक करने और पैसा भेजने, दोनों के लिए PIN डालना अलग-अलग कार्रवाई है। यही भ्रम और जल्दबाजी यूजर को स्कैम का शिकार बना देती है।
सवाल- जंप्ड डिपॉजिट स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
जवाब- इस स्कैम से बचने के लिए UPI यूजर्स को थोड़ी समझदारी और धैर्य बरतने की जरूरत है। खाते में अचानक आई रकम देखकर जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने से नुकसान हो सकता है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें।

सवाल- UPI के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना और क्या सावधानियां बरतना जरूरी हैं?
जवाब- UPI के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए सतर्कता और सही जानकारी बेहद जरूरी है। किसी भी डिजिटल लेनदेन में जल्दबाजी करने, अनजान कॉल/मैसेज पर भरोसा करने और बिना जांचे पेमेंट करने से नुकसान हो सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से UPI यूज के सेफ्टी टिप्स समझिए-

सवाल- क्या सिर्फ बैलेंस चेक करने से भी फ्रॉड हो सकता है?
जवाब- साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा बताते हैं कि आमतौर पर बैलेंस चेक करने से फ्रॉड नहीं होता है। लेकिन इस दौरान सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अगर उसी समय कोई फर्जी मनी रिक्वेस्ट आती है और यूजर बिना ध्यान दिए उसे एक्सेप्ट कर लेता है तो ठगी हो सकती है।

सवाल- अगर पैसे वापस करने के लिए कोई कॉल या मैसेज आए तो क्या करना चाहिए?
जवाब- ऐसे में घबराकर तुरंत कोई प्रतिक्रिया न करें। सबसे सही तरीका यह है कि आप सीधे अपने बैंक या UPI एप के कस्टमर केयर से संपर्क करें। इसके अलावा कॉलर से अपने नजदीकी थाने पर आकर कैश पैसे लेने को भी बोल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
सवाल- अगर गलती से जंप्ड डिपॉजिट स्कैम का शिकार हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए?
जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं, तुरंत कुछ एक्शन लें। बिना देरी किए अपने बैंक या UPI एप के कस्टमर केयर को कॉल करके फ्रॉड की जानकारी दें। तुरंत सारे ट्रांजैक्शन ब्लॉक कराएं। इसके साथ ही नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in/ पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। ध्यान रखें, जितनी जल्दी रिपोर्ट दर्ज की जाती है, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
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