साइबर लिटरेसी- क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर फ्रॉड: ठगी के तरीके पहचानें, सही तरीका और प्रोसेस जानें, ये 6 गलतियां न करें Health Updates

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5 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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हाल ही में उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में एक शख्स के साथ 2.35 लाख रुपए की ठगी हुई। शख्स को अनजान नंबर से कॉल आया था, जिसमें स्कैमर्स ने उसकी क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का लालच दिया था। इस प्रोसेस में लिंक के जरिए एप इंस्टॉल करने को कहा गया। इसके तुरंत बाद मोबाइल हैक हो गया और उसका बैंक अकाउंट खाली हो गया।

बीते कुछ दिनों में क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर फोन करते हैं, भरोसा जीतते हैं और फिर लिंक, ओटीपी या कार्ड डिटेल लेकर आपका बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं।

बीते महीने मुंबई में भी एक ऐसा केस सामने आया। जहां एक शख्स से 2.45 रुपए ठग लिए गए। अच्छी बात यह रही कि समय पर शिकायत करने से रकम वापस मिल गई, लेकिन हर मामले में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं। अक्सर लोग डर के कारण या जानकारी की कमी से शिकायत नहीं करते हैं।

आज साइबर लिटरेसी कॉलम में क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर हो रहे फ्रॉड की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ठग क्रेडिट लिमिट फ्रॉड को कैसे अंजाम देते हैं?
  • क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का सही तरीका क्या है?
  • अगर फ्रॉड हो जाए तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- ‘क्रेडिट लिमिट फ्रॉड’ क्या है?

जवाब- यह एक तरह का डिजिटल और फाइनेंशियल फ्रॉड है।

  • इसमें ठग क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देते हैं।
  • स्कैमर फोन कॉल, SMS, वॉट्सएप या ई-मेल के जरिए संपर्क करते हैं।
  • वे दावा करते हैं कि इसके लिए कोई डॉक्यूमेंट नहीं देना होगा।
  • वे कहते हैं कि क्रेडिट लिमिट तुरंत बढ़ जाएगी।
  • वे कई बार खुद को बैंक का अधिकारी बताते हैं।
  • भरोसा जीतने के बाद OTP, CVV या कार्ड डिटेल मांगते हैं।

स्कैमर को जैसे ही इन्फॉर्मेशन मिलती है, वे अकाउंट से पैसे उड़ा देते हैं। इस फ्रॉड का शिकार ज्यादातर वे लोग होते हैं, जो जल्दी क्रेडिट लिमिट बढ़ाना चाहते हैं।

सवाल- ठग खुद को बैंक अधिकारी साबित करने के लिए किन-किन तरीकों का सहारा लेते हैं?

जवाब- इसके लिए ठग ये तरीके अपनाते हैं-

  • ठग कॉल करते समय खुद को बैंक का प्रतिनिधि या ऑफिसर बताते हैं।
  • कई बार कॉलर ID में किसी बैंक का नाम भी दिखता है।
  • वॉट्सएप पर प्रोफाइल फोटो में बैंक लोगो लगाते हैं।
  • ई-मेल में बैंक जैसी डिजाइन और सिग्नेचर का इस्तेमाल करते हैं।
  • यूजर के बारे में कुछ बेसिक जानकारी बताकर भरोसा जीतते हैं।
  • फिर कहते हैं कि आपका कार्ड ‘प्री-अप्रूव्ड’ कैटेगरी में है।
  • जल्दी फैसला लेने का दबाव बनाते हैं।
  • डर और लालच दोनों का मनोवैज्ञानिक इस्तेमाल करते हैं।

सवाल- फ्रॉड कॉल्स या मैसेज में कौन-से ‘रेड फ्लैग’ होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

जवाब- इस तरह के फ्रॉड में कई कॉमन रेड फ्लैग दिखते हैं। जैसे रिक्वेस्ट के बिना क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का ऑफर मिले। कॉल पर बार-बार जल्दी निर्णय लेने का दबाव बनाया जाए। OTP, CVV या क्रेडिट कार्ड नंबर मांगा जाए।

फ्रॉड के सभी रेड फ्लैग ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठग कौन-कौन सी जानकारियां चुराते हैं?

जवाब- आमतौर पर ठग इस तरह की जानकारियां मांगते हैं-

  • कंप्लीट क्रेडिट कार्ड नंबर।
  • कार्ड की एक्सपायरी डेट।
  • CVV नंबर, यह कार्ड के पीछे लिखा 3 अंकों का नंबर है।
  • OTP, ट्रांजैक्शन कंप्लीट करने के लिए जरूरी है।
  • नेट बैंकिंग या मोबाइल एप लॉग-इन डिटेल।
  • रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की जानकारी।
  • ई-मेल ID और पासवर्ड।
  • कई मामलों में PAN या आधार की डिटेल।

इन जानकारियों के जरिए ठग कार्ड और अकाउंट पर पूरा कंट्रोल पा लेते हैं।

सवाल- लोग अक्सर कौन-सी कॉमन गलतियां करते हैं, जिनकी वजह से ऐसे फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं?

जवाब- आमतौर पर लोग ये कॉमन गलतियां करते हैं-

  • अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा कर लेना।
  • मान लेना कि बैंक कभी गलत कॉल नहीं करता।
  • OTP शेयर कर देना।
  • जल्दी लिमिट बढ़ाने के लालच में आ जाना।
  • किसी भी लिंक पर क्लिक कर देना।
  • बैंक एप या वेबसाइट पर ऑफर चेक न करना।
  • डर या दबाव में जल्दबाजी में फैसला लेना।
  • फ्री, प्री-अप्रूव्ड जैसे शब्दों से प्रभावित होना।
  • साइबर फ्रॉड की जानकारी न होना भी बड़ी वजह है।

सवाल- किसी अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन की स्थिति में पैसा वापस पाने की क्या प्रक्रिया होती है और इसमें समय कितना लगता है?

जवाब- इसमें लगभग 7 से 45 दिन लग सकते हैैं-

  • सबसे पहले क्रेडिट कार्ड को तुरंत ब्लॉक कराएं।
  • बैंक के कस्टमर केयर या मोबाइल एप पर शिकायत दर्ज करें।
  • ई-मेल के जरिए लिखित शिकायत भी जरूर भेजें।
  • बैंक ट्रांजैक्शन की जांच प्रक्रिया शुरू करता है।
  • जांच के दौरान चार्जबैक प्रोसेस लागू होता है।
  • अगर गलती यूजर की नहीं होती, तो रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है।
  • RBI के नियमों के अनुसार समय सीमा तय होती है।
  • आमतौर पर 7 से 45 वर्किंग डेज लग सकते हैं।
  • जल्दी शिकायत करने पर रिफंड की संभावना बढ़ जाती है।

सवाल- क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने का सही और सुरक्षित तरीका क्या है?

जवाब- बैंक ऑफिशियल तरीके से क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाते हैं। केवल बैंक के ऑफिशियल एप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें। बैंक द्वारा भेजे गए ऑफिशियल SMS या ई-मेल ही मानें। ग्राफिक में सही तरीका देखिए-

सवाल- क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति को कौन सी गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए?

जवाब- अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो ये जानना भी बेहद जरूरी है कि क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बैंक किन शर्तों पर खुद लिमिट बढ़ाता है और यूजर को कहां से आधिकारिक ऑफर चेक करना चाहिए?

जवाब- इन शर्तों पर बैंक क्रेडिट लिमिट बढ़ाते हैं-

  • नियमित और समय पर बिल भुगतान।
  • अच्छा और स्थिर क्रेडिट स्कोर।
  • कार्ड का जिम्मेदारी से इस्तेमाल।
  • इनकम में बढ़ोतरी या प्रोफाइल अपग्रेड।
  • लंबे समय से बैंक का ग्राहक होना।
  • कम लेट फीस और कोई डिफॉल्ट न होना।
  • बैंक खुद एप, ऑफिशियल SMS या ई-मेल से ऑफर देता है।
  • यूजर को ऑफर बैंक एप, नेट बैंकिंग या वेबसाइट पर ही चेक करना चाहिए।
  • किसी अनजान कॉल को कभी आधिकारिक न मानें।

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