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श्री चैतन्य महाप्रभु के 540वें जन्मोत्सव पर इस वर्ष एक दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग बना है। मान्यता के अनुसार जिस फाल्गुन पूर्णिमा तिथि और चंद्रग्रहण के योग में उनका अवतरण वर्ष 1486 में हुआ था, वही संयोग इस बार फिर बना हुआ है। श्रद्धालु इसे अत्यंत विशेष और विरल घटना मान रहे हैं।
सेक्टर-36 स्थित इस्कॉन मंदिर में गौर पूर्णिमा के अवसर पर भव्य आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। मंदिर के प्रवक्ता अकिंचन प्रियदास के अनुसार उस समय भी पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण था और इस वर्ष भी वही खगोलीय स्थिति बनी है जिससे उत्सव का महत्व और बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु ने कलियुग में हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से प्रेम, करुणा और शुद्ध भक्ति का संदेश दिया तथा बिना भेदभाव के मानवता को जोड़ने का कार्य किया।
सुबह मंगला आरती से आयोजन शुरू
मंदिर में प्रातः 4:30 बजे मंगला आरती के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। इसके बाद नगर कीर्तन, श्रृंगार आरती और गौर कथा का आयोजन किया गया। शाम 5 बजे भजन-संकीर्तन के उपरांत श्री गौर-निताई का अभिषेक पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से किया जाएगा, जिसके बाद प्रसाद वितरण होगा।
80 माताएं तैयार करेंगी 108 भोग
जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान को 108 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। इन व्यंजनों की तैयारी की जिम्मेदारी इस्कॉन से जुड़ी लगभग 80 माताओं ने संभाली है। ग्रहण से पहले ही सभी भोग तैयार कर लिए जाएंगे। ग्रहण काल में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे, हालांकि भजन-कीर्तन निरंतर चलता रहेगा। ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
सेक्टर-20 में भी होगा विशेष उत्सव
सेक्टर-20 स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में भी जन्मोत्सव को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। मठ प्रबंधन के अनुसार यहां भी संकीर्तन, कथा और प्रसाद वितरण के साथ श्रद्धापूर्वक उत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता और खगोलीय संयोग के अद्वितीय मेल ने इस वर्ष की गौर पूर्णिमा को श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष बना दिया है।
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श्री चैतन्य महाप्रभु का 540वां जन्मोत्सव आज: बना अद्भुत संयोग, बना 1486 जैसा ही तिथि ग्रहण योग


