शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही? Health Updates

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Do You Really Need To Detox Your Body: आज हर कोई सेहत को लेकर जागरूक है, लेकिन परेशानी यह है कि जानकारी जितनी ज्यादा मिल रही है, भ्रम भी उतना ही बढ़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल सलाह, पुराने घरेलू नुस्खे और “एक उपाय, हर बीमारी का इलाज” जैसे दावे लोगों को आसानी से प्रभावित कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि कई बार बिना जांचे-परखे लोग ऐसी बातों पर भरोसा कर लेते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता.

मेडिसिन एक्सपर डॉ. अनन्या मेहता बताती हैं कि ज्यादातर हेल्थ मिथ्स इसलिए टिके रहते हैं क्योंकि उनमें सच्चाई का थोड़ा-सा अंश होता है, जिसे समय के साथ बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया जाता है.

गलतफहमी 1: शरीर को बाहर से डिटॉक्स करना जरूरी

डिटॉक्स टी, जूस और पाउडर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शरीर को अंदर से साफ कर देंगे. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक शरीर को अलग से डिटॉक्स की जरूरत ही नहीं होती. डॉ. मेहता कहती हैं कि लिवर और किडनी दिन-रात शरीर से गंदगी बाहर निकालने का काम करते हैं. डिटॉक्स के नाम पर लंबे समय तक सिर्फ लिक्विड लेने से शरीर कमजोर हो सकता है और जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है.

गलतफहमी 2: ज्यादा विटामिन लेने से सेहत और बेहतर हो जाती है

विटामिन जरूरी हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा लेना फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है. डॉक्टरों के अनुसार कुछ विटामिन शरीर में जमा हो जाते हैं और अधिक मात्रा में लेने पर टॉक्सिक असर डाल सकते हैं. आम लोगों के लिए संतुलित भोजन ही काफी होता है, जब तक किसी खास कमी की पुष्टि न हो.

गलतफहमी 3: जो नेचुरल है, वह नुकसान नहीं करता

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि हर्बल या देसी चीजें पूरी तरह सुरक्षित होती हैं. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. डॉ. मेहता बताती हैं कि कई प्राकृतिक तत्व दवाओं की तरह ही शरीर पर असर डालते हैं और दूसरी दवाओं के साथ रिएक्शन भी कर सकते हैं. इसलिए बिना सलाह के सप्लीमेंट या काढ़े लेना सही नहीं है.

गलतफहमी 4: डॉक्टर के पास तभी जाएं, जब बीमारी हो

कई लोग तब तक डॉक्टर से दूरी बनाए रखते हैं, जब तक परेशानी बढ़ न जाए. एक्सपर्ट का कहना है कि रेगुलर हेल्थ चेकअप से बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है. देर करने पर इलाज मुश्किल और महंगा दोनों हो सकता है.

गलतफहमी 5: उम्र बढ़ने पर दर्द होना तय

उम्र के साथ शरीर में बदलाव आते हैं, लेकिन लगातार दर्द को “नॉर्मल” मान लेना सही नहीं है. डॉ. मेहता के मुताबिक लंबे समय तक रहने वाला दर्द किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.

सेहत से जुड़े भ्रम क्यों बनते हैं खतरा?

गलत धारणाएं सिर्फ जानकारी को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि सही इलाज में देरी, गलत फैसलों और बेवजह की चिंता का कारण भी बनती हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि अधूरी या गलत जानकारी कई बार बीमारी से भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है.

सही और गलत में फर्क कैसे करें?

डॉक्टरों की सलाह है कि भरोसा केवल प्रमाणित और वैज्ञानिक स्रोतों पर करें. चमत्कारी इलाज या तुरंत असर के दावों से बचें. किसी भी बड़े फैसले से पहले डॉक्टर से सलाह लें. इसके अलावा ऐसी जानकारी पर सवाल उठाएं जो इलाज से दूर रहने को कहे. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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