वॉट्सएप के एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर सवाल: मुकदमे में दावा- मेटा आपके प्राइवेट चैट्स देख सकता है; कंपनी ने आरोपों को फर्जी बताया Today Tech News

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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग एप वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर आरोपों के घेरे में है। सैन फ्रांसिस्को की एक फेडरल कोर्ट में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनी यूजर्स के उन चैट्स को भी देख सकती है, जिन्हें वह एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड (E2E) बताकर पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है।

ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स के एक ग्रुप ने यह क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया है। अमेरिका की एक कोर्ट में दायर मुकदमे में कहा गया है कि मेटा और वॉट्सएप अपने अरबों यूजर्स को सुरक्षा के नाम पर गुमराह कर रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कंपनी के पास लगभग सभी प्राइवेट बातचीत को स्टोर करने, उसका एनालिसिस करने और उसे एक्सेस करने की क्षमता है। वहीं मेटा ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि यह मुकदमा पूरी तरह से आधारहीन है और वे याचिकाकर्ताओं के वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

मुकदमे में क्या है मुख्य आरोप?

मुकदमे में कहा गया है कि वॉट्सएप का यह दावा कि सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकते हैं, असल में गलत है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, मेटा के पास ऐसी तकनीक और एक्सेस है, जिससे वह यूजर्स के मैसेजेस को देख सकता है। इसमें कुछ व्हिसलब्लोअर्स के हवाले से भी जानकारी दी गई है। जिन्होंने दावा किया है कि मेटा के कर्मचारी जरूरत पड़ने पर यूजर्स के डेटा तक पहुंच बना सकते हैं।

यह मुकदमे काल्पनिक कहानी

मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा, ‘यह दावा करना कि लोगों के वॉट्सएप मैसेज एनक्रिप्टेड नहीं हैं, पूरी तरह से गलत और हास्यास्पद है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि वॉट्सएप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है, जो सुरक्षा के मामले में दुनिया भर में मानक माना जाता है। कंपनी ने इस मुकदमे को फिक्शन (काल्पनिक कहानी) करार दिया है।

5 देशों के यूजर्स ने की शिकायत

इस कानूनी कार्रवाई में भारत भी शामिल है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स इस क्लास-एक्शन सूट का हिस्सा हैं। अगर कोर्ट इसे क्लास-एक्शन के तौर पर मंजूरी दे देती है, तो दुनिया भर के करोड़ों यूजर्स इस मुकदमे के दायरे में आ सकते हैं और भविष्य में मेटा को भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

क्या होता है एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन?

वॉट्सएप का दावा है कि उसके एप पर होने वाली हर चैट एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होती है। इसका मतलब है कि जब आप कोई मैसेज भेजते हैं, तो वह एक सीक्रेट कोड में बदल जाता है जिसे केवल रिसीवर का फोन ही डिकोड कर सकता है। कंपनी का कहना है कि बीच में न तो वॉट्सएप और न ही उसकी पेरेंट कंपनी मेटा इस मैसेज को पढ़ सकती है। ताजा मुकदमे ने इसी दावे की सच्चाई पर सवाल उठाए हैं।

पहले भी विवादों में रही है मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी

मेटा (पहले फेसबुक) का प्राइवेसी रिकॉर्ड काफी विवादित रहा है। साल 2020 में कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल के बाद कंपनी को 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा था। इसके अलावा सितंबर 2025 में वॉट्सएप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अताउल्लाह बेग ने भी आरोप लगाया था कि करीब 1,500 इंजीनियरों के पास यूजर्स के डेटा का अनियंत्रित एक्सेस है।

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