[ad_1]
हिसार। रामपुरा मोहल्ला स्थित गीता भवन में आयोजित राम कथा के आठवें दिन आचार्य कविता कांत वाजपेयी रामायणी ने कहा कि विषमता से समता की स्थापना ही राम राज्य का प्रमुख लक्षण है। राम राज्य तपस्या, त्याग और साधना की पृष्ठभूमि पर आधारित होता है।
आचार्य वाजपेयी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने बाली का वध कर सुग्रीव को और रावण का वध कर विभीषण को राज्य सौंपा। उत्तर-दक्षिण के भेद को समाप्त कर रामेश्वरम की स्थापना की और पशुओं में भी मानवता का संदेश देकर मानवीय मूल्यों का संचार किया। उन्होंने कहा कि रावण जैसे अनाचार और दुराचार के प्रतीक का अंत सदाचार की विजय का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि 14 वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हुआ और राम राज्य की स्थापना हुई, जहां ईर्ष्या, द्वेष और विषमता का भाव समाप्त हो गया। राम राज्य में शासन नहीं, बल्कि अनुशासन था, इसलिए श्रीराम आज भी लोगों के हृदय सिंहासन पर विराजमान हैं।
कथा से पूर्व भजन गायक सुमित मित्तल, जितेश राखा और शुभम अरोड़ा ने भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संस्था की प्रधान उषा बख्शी, सचिव कृष्ण शर्मा, उपप्रधान कृष्ण महता, कोषाध्यक्ष धर्मबीर ग्रोवर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। संस्था की प्रधान उषा बख्शी ने बताया कि 27 मार्च को सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक रामायण पाठ का भोग और भजन संकीर्तन होगा, जिसके बाद प्रसाद वितरित किया जाएगा।
[ad_2]
विषमता से समता राम राज्य का प्रमुख लक्षण : आचार्य कविता कांत वाजपेयी




