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चरखी दादरी। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच अब चिकित्सा पद्धतियों के लिए लोगों की सोच में बदलाव आने लगा है। जिले में इन दिनों एलोपैथी दवाओं के मुकाबले होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। शहर के सरदार झाड़ू सिंह चौक के समीप स्थित एमसीएच यूनिट में आयुष विभाग के माध्यम से संचालित होम्योपैथी ओपीडी ब्लॉक में हर रोज काफी संख्या में लोग अपनी बीमारियों के स्थायी समाधान के लिए पहुंच रहे हैं। होम्योपैथी ओपीडी में बढ़ रही मरीजों की संख्या से पता चलता है कि लोग अब मीठी गोलियों के असर पर अधिक भरोसा जताने लगे हैं। एलर्जी से पथरी के मरीज होम्योपैथी अपना रहे हैं।
हर रोज आ रहे 50 से 60 मरीज
एमसीएच यूनिट की दूसरी मंजिल पर संचालित होम्योपैथी ओपीडी में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। इस चिकित्सा पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह रोग को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित है। मरीजों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में यह पद्धति कारगर होने के साथ-साथ इसके दुष्प्रभाव भी न के बराबर हैं। विशेषकर एलर्जी, पुराने नजले और पथरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोग अब प्राथमिक उपचार के तौर पर होम्योपैथी को ही चुन रहे हैं।
सभी आयु वर्ग के लिए अनुकूल साबित हो रही पद्धति
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति हर आयु वर्ग के लिए अनुकूल साबित हो रही है। युवाओं में जहां मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का उपचार इस माध्यम से किया जा रहा है, वहीं बुजुर्गों के जोड़ों के दर्द और पुरानी व्याधियों में भी यह रामबाण सिद्ध हो रही है। महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी यहां विशेष परामर्श दिया जा रहा है। बच्चों के मामले में तो यह पद्धति वरदान मानी जा रही है। अक्सर बच्चे कड़वी दवाइयों या इंजेक्शन से डरते हैं लेकिन होम्योपैथी की छोटी-छोटी मीठी गोलियों को बच्चे बिना किसी आनाकानी के और बड़े चाव से लेते हैं जिससे उनके उपचार की प्रक्रिया काफी सुगम हो जाती है।
दादरी में तैनात होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. पूनम गर्ग डाबोदिया का कहना है कि होम्योपैथी केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक बीमारियों के उपचार में भी प्रभावी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से घिरे हैं जिनका समाधान इस पद्धति में विस्तार से उपलब्ध है। पथरी जैसी समस्याओं में भी, जहां कई बार सर्जरी की नौबत आ जाती है, होम्योपैथी दवाओं के नियमित सेवन से सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। आयुष विभाग द्वारा दी जा रही इन सुविधाओं ने आमजन को एक सस्ता और सुरक्षित विकल्प प्रदान किया है।
वर्सन :
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति वर्तमान में गंभीर से लेकर सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। लोगों में इसके प्रति विश्वास बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारी को जड़ से मिटाने में सहायक है। हमारे पास एलर्जी, नजला, पथरी और मानसिक रोगों के बहुत से मरीज आते हैं जिन्हें काफी लाभ मिल रहा है। बच्चों के लिए यह उपचार सबसे आसान है क्योंकि वे मीठी गोलियों को सहजता से ले लेते हैं।
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विश्व होम्योपैथी दिवस : एलोपैथी से हटकर होम्योपैथी की ओर रुझान, मीठी गोलियों पर बढ़ा भरोसा



