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TRAI on Foreign SIM: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मंगलवार को एक अहम सिफारिश जारी की है जो खास तौर पर उन IoT और मशीन-टू-मशीन (M2M) डिवाइस से जुड़ी है जिन्हें केवल निर्यात (Export) के लिए तैयार किया जाता है. इसमें विदेशी टेलीकॉम कंपनियों के SIM और eSIM कार्ड के इस्तेमाल को लेकर नया रेगुलेटरी ढांचा सुझाया गया है.
DoT के अनुरोध पर आया TRAI का फैसला
यह सिफारिश संचार मंत्रालय के तहत आने वाले दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुरोध के बाद सामने आई है. DoT ने TRAI से यह स्पष्ट करने को कहा था कि Export के लिए बने M2M और IoT डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले विदेशी SIM/eSIM कार्ड के आयात, बिक्री और उनके लिए NOC (No Objection Certificate) जारी या नवीनीकरण की शर्तें क्या होनी चाहिए.
तेजी से बढ़ते सेक्टर के लिए हल्का रेगुलेशन
TRAI ने माना कि IoT और M2M सेक्टर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और यहां अब तक एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की कमी थी. इसी को ध्यान में रखते हुए, टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 के तहत एक “लाइट-टच” ऑथराइजेशन सिस्टम का प्रस्ताव रखा गया है ताकि कंपनियों पर बेवजह का बोझ न पड़े.
‘International M2M SIM Service Authorisation’ की नई कैटेगरी
TRAI ने एक नई श्रेणी बनाने की सिफारिश की है जिसे International M2M SIM Service Authorisation नाम दिया गया है. इसके तहत भारतीय कंपनियां कानूनी तौर पर विदेशी SIM और eSIM कार्ड हासिल कर सकेंगी और उन्हें उन डिवाइस में इस्तेमाल कर सकेंगी जो विदेशों के बाजार के लिए बनाए जा रहे हैं.
पूरी तरह ऑनलाइन और आसान प्रक्रिया
नई व्यवस्था के अनुसार ऑथराइजेशन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी. आवेदन ऑनलाइन किया जा सकेगा और मंजूरी ऑटो-जेनरेटेड व डिजिटल साइन के साथ मिलेगी.
भारत के कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड कोई भी कंपनी इसके लिए आवेदन कर सकती है. TRAI ने न तो कोई एंट्री फीस रखी है, न ऑथराइजेशन चार्ज और न ही न्यूनतम इक्विटी, नेटवर्थ या बैंक गारंटी की शर्त. केवल 5,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी और मंजूरी 10 साल तक वैध रहेगी.
टेस्टिंग के लिए भारत में सीमित इस्तेमाल की छूट
क्वालिटी चेक और टेस्टिंग की जरूरत को देखते हुए TRAI ने यह भी सुझाव दिया है कि विदेशी SIM/eSIM कार्ड को भारत में टेस्टिंग के लिए अधिकतम 6 महीने तक एक्टिव रहने की अनुमति दी जाए. इससे मैन्युफैक्चरर्स को प्रोडक्ट की जांच में सहूलियत मिलेगी.
भारतीय मैन्युफैक्चरर्स की जरूरतों को मिला समर्थन
TRAI ने बताया कि स्मार्ट मीटर, कनेक्टेड व्हीकल, इंडस्ट्रियल सेंसर और अन्य IoT डिवाइस बनाने वाली भारतीय कंपनियों को अक्सर विदेशी SIM एम्बेड करनी पड़ती है, ताकि जिस देश में डिवाइस भेजा जा रहा है वहां बिना रुकावट नेटवर्क कनेक्टिविटी मिल सके.
सुरक्षा और एक्सपोर्ट के बीच संतुलन
रेगुलेटर का कहना है कि एक साफ और मजबूत नियम ढांचा न सिर्फ एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगा, बल्कि सुरक्षा और नियमों के पालन से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करेगा. TRAI ने DoT को सलाह दी है कि वह वित्त और वाणिज्य मंत्रालय समेत अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ मिलकर एक समन्वित नीति तैयार करे.
Make in India को मिलेगा बूस्ट
TRAI के मुताबिक, यह प्रस्तावित ढांचा सरकार की Make in India पहल को मजबूती देगा. इससे भारत में बनने वाले IoT और M2M प्रोडक्ट्स की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और देश घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत ग्लोबल हब बन सकेगा.
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