लूट-चाकू मारने के 3 दोषियों को 7-7 साल की सजा: मोहाली कोर्ट ने सुनाया फैसला, चावल उतारने आया था ट्रक ड्राइवर, छह साल पुराना मामला – Mohali News Chandigarh News Updates

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मोहाली जिले के जीरकपुर में 5 साल पहले एक ट्रक ड्राइवर के साथ हुई लूट और चाकूबाजी की वारदात में मोहाली की स्पेशल कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। मोहाली कोर्ट ने सभी को अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने सेक्शन 201 (सबूत मिटाना) में बरी कर दिया है, लेकिन बाकी धाराओं में दोषी ठहराया है। इसमें 392 (लूट), 308 (ह्त्या की कोशिश), 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट), 342 (गलत तरीके से कैद करना) और धारा 506 (धमकी) शामिल है। बदमाशों ने जस्सी का छीना था पर्स ये मामला 27 अक्टूबर 2020 की रात का है। शिकायतकर्ता राजेश कुमार उर्फ जस्सी अपने कैंटर (HR-69A-6917) लेकर रमादा होटल के पास खड़ा था। वो चावल के बोरे उतारने की जगह पूछ रहा था। तभी तीन युवक आए। एक नीली चेक वाली शर्ट में और दो रंग-बिरंगे कपड़ों में थे। उन्होंने गंदी-गंदी गालियां दीं और जस्सी को घेर लिया। चेक शर्ट वाला बदमाश डंडा लेकर था, बाकी दो चाकू लेकर आए थे। उन्होंने पीठ, कंधे, पेट और बाएं हाथ पर जमकर वार किए। एक ने तो कहा कि, इसकी गर्दन काट दो, मार डालो। बदमाशों ने जस्सी का पर्स छीन लिया, जिसमें 6 हजार रुपए, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी की आरसी थी। बदमाशों ने साथ ही गले से चांदी की चेन भी उतार ली। मारपीट और लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश बालटाना गोदाम की तरफ भाग गए। सिक्योरिटी गार्ड ने बचाया जस्सी को एक सिक्योरिटी गार्ड ने बचाया और GMCH सेक्टर 32, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर पर कुल 19 घाव थे, जिसमें छाती और पेट में चाकू के गहरे वार थे। इंटरकोस्टल ट्यूब डालनी पड़ी। हालत बहुत नाजुक थी। गलत जांच का फायदा नहीं दे सकते इस मामले में जीरकपुर थाना पुलिस ने 5 नवंबर 2020 को राज कुमार नामक गवाह की सूचना पर तीनों को गिरफ्तार किया था। ये तीनों रायपुर खुर्द, चंडीगढ़ में किराए पर रहते थे। दोषियों की पहचान अर्जुन कुमार निवासी बिहार, लक्ष्मन कुमार निवासी नेपाल और आशीष राणा रूप में हुई थी। कोर्ट में पीड़ित जस्सी ने सभी आरोपियों को पहचाना और हथियार भी दिखाए। मेडिकल रिपोर्ट से साफ हुआ कि घाव खतरनाक थे। कोर्ट ने सेक्शन 34 (साझा इरादा) लगाया, क्योंकि तीनों ने मिलकर प्लानिंग की थी। डिफेंस वकील ने कहा कि जांच में CCTV फुटेज नहीं लगे, हथियार FSL नहीं भेजे गए। लेकिन जज ने कहा कि गलत जांच से आरोपी को फायदा नहीं मिल सकता। जब पीड़ित की गवाही भरोसेमंद हो।

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