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अंबाला: हर मां-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा किसी ऐसे स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी करे, जिसमें उसे हर तरह की सुख सुविधा मिले और साथ वह आने वाले दिनों में एक अच्छे मुकाम तक पहुंच सके. कुछ ऐसा ही जोश बच्चों में भरने का कार्य देशभर के सैनिक स्कूल रक्षा मंत्रालय के तहत कर रहे हैं और इनका मकसद भी इन स्कूलों के माध्यम से ऐसे युवाओं को चुनना है, जो यहां से निकलकर देश की सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भागीदार निभा सकें.
इन स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए बच्चों को छठी कक्षा में ही शामिल होना पड़ता है और इसके लिए लाखों बच्चों का एक एग्जाम होता है, जिसमें कुछ चुनिंदा बच्चे ही उस एग्जाम को पास कर पाते हैं. वही हिमाचल में मौजूद आर्मी पब्लिक स्कूल दगशाई भी उन चुनिंदा स्कूलों में शामिल है, जहां पर अपने बच्चों को पढ़ाने का हर मां-बाप का एक सपना होता है, क्योंकि यहां पर हर साल छठी कक्षा से बच्चों के एडमिशन किए जाते हैं और उसके लिए देशभर से लाखों बच्चे पहले एक पेपर को देते हैं, जिनमें से सिविल कैटेगरी में से 4 से 5 बच्चे ही पास हो पाते हैं.
अंबाला ने होनहार का हुआ सेलेक्शन
बता दें कि अंबाला के फारूख खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पांचवीं कक्षा के छात्र सचकिरत सिंह ने भी इस बार लाखों बच्चों में से NDA (एपी स्कूल दगशाई) की परीक्षा को पास करके अपने माता-पिता का नाम रोशन कर दिखाया है और वह अब वहीं से अपनी आगे की पढ़ाई को पूरी करेगा. जब से सचकीरत सिंह ने यह परीक्षा पास की है, तब से उनके घर में बधाई देने वाले लोगों का ताता लगा हुआ है. वह एक-दूसरे का मुंह मीठा करके इस खुशी के पल को एक-दूसरे के साथ सांझा कर रहे हैं.
घरवालों ने किया पूरा सपोर्ट
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए सचकीरत सिंह ने बताया कि वह पांचवी कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं ओर अब उनका आर्मी पब्लिक स्कूल दगशाई का पेपर क्लियर हुआ है. उन्होंने कहा हमेशा एक सपना देखा था कि वह भी हिमाचल के सबसे अच्छे स्कूल एपीएस दगशाई में अपनी पढ़ाई पूरी करें, जिसके लिए उनके अध्यापक और परिजनों ने खूब मेहनत करके उन्हें इस परीक्षा को लेकर तैयार करवाया था.
उन्होंने कहा कि आर्मी पब्लिक स्कूल दगशाई की पढ़ाई देश के सभी स्कूलों के मुकाबले में सबसे ज्यादा बेहतर है और अब वह चाहते हैं कि बड़े होकर आर्मी ज्वाइन करें. उन्होंने बताया कि रोजाना इस पेपर को पास करने के लिए आठ घंटे पढ़ाई करके तैयारी पूरी की थी. आज जब लाखों बच्चों में से पांच बच्चे ही उस स्कूल के लिए सिलेक्ट हुए हैं, तो उसमें मेरा भी नाम अंबाला से शामिल हुआ है. काफी ज्यादा अच्छा लग रहा है और आने वाले दिनों में इसी तरह अपने परिवार का नाम रोशन करुंगा.
सिविल कैटेगरी से 5 बच्चों का सिलेक्शन
वही सचकीरत सिंह के अध्यापक अरुण खरबंदा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में एपीएस दगशाई एक मात्र ऐसा सैनिक स्कूल है, जहां पर एडमिशन लेने के लिए लाखों बच्चे एक परीक्षा देते हैं और उनमें से मात्र सिविल कैटेगरी में पांच बच्चे ही सिलेक्ट हो पाते हैं. उन्होंने कहा कि सचकीरत सिंह ने उस परीक्षा में टॉप किया है और अब उन्हें भारत के सबसे बेहतर स्कूल में शामिल होने के लिए बुलाया गया है.
उन्होंने बताया कि अब सचकीरत अपनी 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई उसी स्कूल में पूरी करेगा और वहां पर पढ़ने वाले बच्चों को कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी भी पढ़ाई के साथ-साथ करवाई जाती है. उन्होंने बताया कि इस आर्मी पब्लिक स्कूल दगशाई में सिविल कैटेगरी बच्चे की सालाना फीस 400000 रुपए तक होती है. इसमें सभी तरह की सुविधा जैसे कि रहना, खान-पान सब कुछ शामिल रहता है. उन्होंने बताया कि इंडियन आर्मी एयरफोर्स और नेवी में हर साल यहां से बच्चे शामिल होते हैं और हर माता-पिता का एक सपना होता है कि उनका बच्चा इस स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी करके एक अच्छी जॉब हासिल करें.
कक्षा 5 और 9 के लिए आवेदन
वही मिली जानकारी के अनुसार, आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) दगशाई, हिमाचल प्रदेश में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए कठिन प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है. प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली (AISSEE-like) कठिन परीक्षा में सफलता के बाद ही दाखिला मिलता है और इसके लिए कक्षा 5 और 9 के लिए आवेदन आधिकारिक वेबसाइट exams.nta.ac.in/aissee पर किया जा सकता है.
वही यह स्कूल समाज के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बच्चों को राष्ट्र के सशस्त्र बलों और अन्य प्रसिद्ध व्यवसायों में एक अधिकारी के रूप में शानदार करियर बनाने में सक्षम बनाता है, क्योंकि यह स्कूल कैडेटों के सर्वांगीण विकास पर जोर देता है. यहां छात्रों को देश की रक्षा सेवाओं में अधिकारियों के रूप में नेतृत्व करने के लिए तैयार किया जाता है, जिससे छात्रों में शरीर, मन और चरित्र के गुण यहां विकसित किए जाते हैं, ताकि आज के छात्र कल के अच्छे और उपयोगी नागरिक बन सकें. साथ ही वे अपने माता-पिता और राष्ट्र की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकें.
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