रुचिर शर्मा का कॉलम: सोने के दामों में तेजी से आई चमक का रहस्य क्या है? Politics & News

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वर्षों तक उछाल के बाद सोने की कीमतें अब ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी हैं, जहां अब ‘स्टोरीटेलिंग’ उसकी दिशा तय कर रही है। सोने के दाम उन बुनियादी शक्तियों से मुक्त हो चुके हैं, जो लंबे समय तक उसके उतार-चढ़ाव के नियम तय करती रही थीं। अब वह वैश्विक जोखिम और अनिश्चितता की कहानियों के सहारे ऊपर बढ़ रहा है। विश्लेषकों को तो यह दौर 1970 के दशक के ‘गोल्ड रश’ जैसा लगने लगा है। सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता रहा है, क्योंकि उसकी कीमतें सदियों तक मुद्रास्फीति की दर के साथ कदम मिलाती रही हैं। हालांकि बीच-बीच में उसमें भी गिरावट और उछाल आते रहे हैं। उछाल आम तौर पर उस कालखंड में आते थे, जब वास्तविक ब्याज दरें घटती थीं। जब बचत खातों या बॉन्ड्स में रखे धन पर रिटर्न कम होता था तो लोग अपनी संपत्ति सोने में स्थानांतरित करने लगते थे। यह पैटर्न 2023 में बदलना शुरू हुआ। ब्याज दरें अतीत की तुलना में ऊंची थीं और बढ़ रही थीं, फिर भी सोने की कीमतें चढ़ने लगीं। इसका प्रमुख कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीद में वृद्धि थी, जो अपनी होल्डिंग्स को डॉलर से हटाना चाहते थे। यह वही डॉलर है, जिसे अमेरिका ने रूस पर लगाए प्रतिबंधों में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था। तब से सोने की कीमतें आसमान छू चुकी हैं। किंतु जिसे मैंने कभी विदेशी केंद्रीय बैंकों के नेतृत्व में डॉलर-विरोधी क्रांति कहा था, वह अब इसकी व्याख्या करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पिछले एक वर्ष में केंद्रीय बैंकों की खरीद की गति धीमी पड़ गई है। ऊंची कीमतों के चलते उपभोक्ताओं की हिचकिचाहट से गहनों की मांग में गिरावट आई है। इसके विपरीत, भारत से लेकर चीन और अमेरिका से लेकर यूके तक सभी प्रमुख बाजारों में निवेशकों की मांग विस्फोटक रूप से बढ़ी है। पिछले वर्ष वैश्विक स्तर पर सोने की कुल खरीद में निवेशकों की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 35% तक पहुंच गई। सोने के सभी निवेश योग्य रूपों- बिस्किट और सिक्कों से लेकर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स तक- में निवेश का तेज प्रवाह नजर आने लगा। विशेषकर भारतीयों को सोने के प्रति विशेष लगाव के लिए जाना जाता है। आकलनों के अनुसार भारतीय घरों में विश्व का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार है : 28,000 टन, जो कुल वैश्विक भंडार का 14% है। किंतु पिछले वर्ष भारतीयों ने भी सोने के आभूषणों पर कम और सोने से जुड़े निवेश उत्पादों पर अधिक व्यय किया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि भारत में गोल्ड ईटीएफ का असाधारण उछाल नए उत्पाद प्रस्तावों की एक शृंखला को प्रेरित कर रहा है, जो इस वर्ष भी इस तेजी को बनाए रखने में सहायक हो सकता है। संक्षेप में, सोना अब मुख्यतः वित्तीय मांग से संचालित हो रहा है और यह बदलाव उसके मूल्यांकन की पारम्परिक समझ को उलट रहा है। सोने की कीमत को समझाने के लिए लंबे समय से प्रयुक्त मॉडल- जिनमें वास्तविक बॉन्ड यील्ड्स और मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं शामिल थीं- अब निष्प्रभावी हो चुके हैं। सोने में तेजी के पक्षधर यह तर्क दे रहे हैं कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अतीत की गोल्ड सुपर-साइकिल्स की पृष्ठभूमि जैसा है- यानी 2000 के दशक और विशेष रूप से 1970 के दशक जैसे लंबे और प्रबल तेजी के दौर। किंतु आज की मुद्रास्फीति जिमी कार्टर के दौर के डबल-डिजिट स्तरों के आसपास भी नहीं है। और यह तर्क देना कठिन है कि ट्रम्प, टैरिफ और यूक्रेन जैसी अनिश्चितताएं आज उतनी ही अधिक विचलित करने वाली हैं, जितनी उस समय तेल प्रतिबंध, वियतनाम युद्ध और ईरान बंधक संकट थे। एक अन्य तर्क यह है कि सोना डॉलर के अवमूल्यन से बचाव के साधन के रूप में फल-फूल रहा है। किंतु यदि ऐसा है तो डॉलर के अन्य विकल्प जैसे बिटकॉइन क्यों गिरावट में हैं और अमेरिकी शेयरों तथा बॉन्ड जैसे अन्य डॉलर-आधारित एसेट्स क्यों टिके हुए हैं? यही कारण है कि सोने के प्रबल समर्थक कहते हैं कि इस पीली धातु में अभी और ऊपर जाने की पर्याप्त गुंजाइश है। और वे सही भी हो सकते हैं। पिछले दस वर्षों में यह तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। किंतु 1970 के दशक की बारह गुना वृद्धि की तुलना में यह बहुत अधिक नहीं है। उस समय तो मात्र दो महीनों में सोने की कीमतें दोगुनी हो गई थीं। मैं कई वर्षों से सोने के प्रति सकारात्मक रुख रखता रहा हूं, लेकिन अब मैं अधिक तटस्थ हूं। अनियमित कथानकों से संचालित होने वाले बाजार में यह जान पाना कठिन होता है कि कौन-सा नैरेटिव वास्तविक है और टिकेगा। यदि आप और सोना खरीदना चाहते हैं, तो आपको बस विश्वास बनाए रखना होगा। सोने के प्रबल समर्थक कहते हैं कि इस पीली धातु में अभी और ऊपर जाने की पर्याप्त गुंजाइश है। पिछले दस वर्षों में यह तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। किंतु 1970 के दशक की बारह गुना वृद्धि की तुलना में यह बहुत आवक नहीं है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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