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25 मिनट पहले
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सवाल- मैं पिछले एक साल से एक लड़के के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में हूं। शुरू में तो प्यार का खुमार था, इसलिए उसकी कुछ बहुत प्रॉब्लमैटिक आदतों को मैंने इग्नोर किया। लेकिन वो आदतें अब परेशान करने लगी हैं।
प्रॉब्लम ये है कि उसके कमरे से लेकर जिंदगी तक में भयानक केऑस है। उसका कोई सामान जगह पर नहीं रहता। पूरा कमरा कबाड़खाना बना रहता है। वो अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स खुद ही रखकर घंटों ढूंढता रहता है। किचन में एक कप चाय बनाता है और पूरा किचन बिखरा देता है।
मैंने कई बार कहा, झगड़ा भी किया, लेकिन कोई असर नहीं। सुनने में बात मामूली लगती है, लेकिन अब मुझे लगने लगा है कि ये आदत डील-ब्रेकर है। मैं क्या करूं, उसे कैसे समझाऊं।
एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब: सबसे पहले तो आपका शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को इतने स्पष्ट शब्दों में लिखा है। अब ये समझिए कि रिलेशनशिप के शुरुआती दिनों में इमोशंस ज्यादा हावी होते हैं तो लोग पार्टनर के व्यवहार को नजरअंदाज कर देते हैं। इसे ‘हनीमून फेज’ कहते हैं।
समय के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, तब वही आदतें मानसिक तनाव का कारण बनने लगती हैं। यह बदलाव असामान्य नहीं है। इस तरह के व्यवहार से परेशानी और असहजता महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उस असहजता को पहचानना क्योंकि लंबे समय तक असहजता में रहना एंग्जाइटी, चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकता है। यह रिश्ते में असंतुलन पैदा कर सकता है।
आप जिस समस्या का जिक्र कर रही हैं, वह सुनने में वाकई मामूली लग सकती है। लेकिन साइकोलॉजी में यह केवल अव्यवस्था नहीं है, यह मेंटल केऑस (मस्तिष्क में बिखराव) का भी संकेत हो सकता है। जब एक व्यक्ति का केऑस दूसरे की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तब वह रिश्ता डील-ब्रेकर जैसा महसूस होने लगता है।
समस्या जहां से शुरू होती है, वहीं से ठीक भी होती है
किसी भी आदत को बदलने की पहली और सबसे जरूरी शर्त होती है- उस आदत को स्वीकार करना। लेकिन यह काम कोई दूसरा व्यक्ति नहीं करवा सकता है। जिसके साथ यह समस्या है, उसे खुद ही समस्या को स्वीकार करना होगा और उसे बदलने के लिए कदम बढ़ाना होगा।
- कौन रियलाइज करेगा कि समस्या है- वह खुद करेगा।
- कौन एक्शन लेगा- वह खुद लेगा।
- कौन ठीक करेगा- वह खुद करेगा।
- ठीक होने का फायदा किसे होगा- उसी को होगा।
आप उसे बार-बार समझा सकती हैं, लड़ सकती हैं, नाराज हो सकती हैं। लेकिन अगर उसके अंदर यह एहसास नहीं है कि “मेरी इस आदत से मेरी जिंदगी और रिश्ते दोनों प्रभावित हो रहे हैं,” तो कोई भी बदलाव कभी टिकाऊ नहीं होगा। यह बात आपको बहुत साफ तौर पर समझनी होगी कि आप किसी को बदल नहीं सकतीं। आप सिर्फ एक रास्ता दिखा सकती हैं, हाथ पकड़ सकती हैं, चलना उसे खुद होगा।

आपकी थकान जायज है
अक्सर ऐसे रिश्तों में ऐसा होता है कि एक पार्टनर मैनेजर की भूमिका में आ जाता है। वह सबकुछ संभाल रहा होता है, हर बात याद दिला रहा होता है। कुछ दिन बाद यह भूमिका थकाने लगती है। आप सिर्फ उसकी गर्लफ्रेंड नहीं रह जातीं, बल्कि उसकी लाइफ की ‘मैनेजर’ बन जाती हैं, जो उसके फैलाए केऑस को समेट रही होती है। यह थकान जायज है। यह चिड़चिड़ाहट भी जायज है।
मेंटल केऑस का असर क्या होता है?
जब घर या कमरा बिखरा रहता है, तो वो सिर्फ आंखों को नहीं चुभता, बल्कि दिमाग पर भी बोझ डालता है। आपको रोज तनाव होता है, काम करने का मन नहीं करता और इसका असर ये होता है कि रिश्ते में प्यार की जगह झगड़े बढ़ जाते हैं। साइकोलॉजी कहती है कि अव्यवस्था से एंग्जाइटी बढ़ती है, नींद खराब होती है और आत्मविश्वास भी कम होता है।

आप क्या कर सकती हैं?
सबसे पहला और जरूरी कदम है– बाउंड्री तय करना। बाउंड्री का मतलब लड़ाई या अल्टीमेटम नहीं होता है। बाउंड्री का मतलब होता है, अपनी लिमिट साफ-साफ बताना। आप उसे यह नहीं कहें कि ‘तुम गंदे हो’ या ‘तुम कभी नहीं बदलोगे।’ उसे यह कहें कि “जब तुम्हारी ये आदतें सिर्फ तुम पर असर करती थीं, तब तक मैंने एडजस्ट किया। लेकिन अब इसका असर मेरी मानसिक शांति पर पड़ रहा है। मुझे रोज तनाव होता है, चिढ़ होती है और मुझे ऐसा लगता है कि मैं यहां खुश नहीं रह पा रही हूं।
यह कहना बहुत जरूरी है कि आपको क्या महसूस हो रहा है, न कि वह कितना गलत है।
बाउंड्री लाइन खींचें
आपको साफ कहना होगा कि मैं इस तरह नहीं रह सकती। यह लाइन डराने के लिए नहीं, खुद को बचाने के लिए खींची जाती है। अगर आप यह लाइन नहीं खींचेंगी, तो अंदर–ही–अंदर आपका गुस्सा, आपकी निराशा बढ़ती जाएगी।

मदद ऑफर करें, लेकिन जिम्मेदारी को बोझ न लें
इसके बाद दूसरा कदम है, सपोर्ट ऑफर करना। आपको सिर्फ मदद करनी है, सारा जिम्मा अपने सिर पर नहीं लेना है। आप कह सकती हैं कि “अगर तुम्हें लगता है कि अपनी आदतों को बदलने के लिए तुम्हें कोई मदद चाहिए, तो मैं साथ हूं। हम मिलकर कोई तरीका ढूंढ सकते हैं। अगर तुम चाहो तो काउंसलर से बात कर सकते हैं, कुछ सेल्फ-हेल्प वीडियो देख सकते हैं या कोई किताब पढ़ सकते हैं।” बहुत बड़ा फर्क है इन दोनों वाक्यों के बीच-
“मैं तुम्हें ठीक करूंगी”
“अगर तुम सबकुछ ठीक करना चाहो, तो मैं तुम्हारे साथ हूं”
पहला वाक्य आपको थकान देगा। दूसरा वाक्य आपको स्पेस और डिग्निटी देगा।
प्रोफेशनल मदद लेना कमजोरी नहीं
कई बार अव्यवस्था सिर्फ आलस नहीं होती। यह एकाग्रता की समस्या, स्ट्रेस या एंग्जाइटी का भी संकेत हो सकती है। ऐसे में काउंसलिंग एक बहुत हेल्दी विकल्प हो सकता है। लेकिन यहां भी शर्त वही है- वह तैयार हो। अगर वह खुद से कहता है, “हां, मुझे लगता है कि मुझे मदद चाहिए,” तो आप उसका हाथ थाम सकती हैं। अगर वह कहता है, “मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, तुम्हें ही एडजस्ट करना चाहिए,” तो यह भी एक जवाब है और उस जवाब को आपको गंभीरता से लेना होगा।

खुद को मत भूलिए
रिश्ते में रहते हुए कई बार हम खुद से यह सवाल पूछना भूल जाते हैं- क्या मैं यहां मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस कर रही हूं? क्या मेरी जरूरतों को गंभीरता से लिया जा रहा है? क्या यह रिश्ता मुझे सुकून देता है या सिर्फ थकान?
अगर हर कोशिश के बाद भी वह रियलाइज नहीं कर रहा है, न एक्शन ले रहा है, न मदद लेने को तैयार है, तो आप वयस्क हैं और ये सोचने में सक्षम हैं कि आपके लिए क्या सही है और क्या नहीं सही है।
आखिरी बात
हर इंसान अपनी जिंदगी के लिए खुद जिम्मेदार होता है। आप किसी को बदल नहीं सकतीं, किसी को सुधार नहीं सकतीं, जब तक वह खुद इसके लिए तैयार न हो। अगर वह रियलाइजेशन का पहला कदम लेता है, तो आप दूसरे कदम में साथ चल सकती हैं। अगर वह पहला कदम ही नहीं लेता, तो खुद को दोष मत दीजिए। कभी-कभी सबसे हेल्दी फैसला प्यार के बावजूद खुद को चुनना होता है।

आप मजबूत हैं, समझदार हैं। ये समस्या आपको तोड़ नहीं सकती। अगर वो बदलता है तो अच्छा, नहीं तो खुद को चुनें। प्यार सुकून देता है, तनाव नहीं। हिम्मत रखें, आप सही फैसला लेंगी।
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