राज्यसभा चुनाव : भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध जीते, निर्दलीय सतीश नांदल एक वोट से हारे Chandigarh News Updates

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हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के करीब सवा नौ घंटे बाद घोषित परिणाम में भाजपा और कांग्रेस ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध विजयी रहे। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को 28.66 वोट, कर्मवीर सिंह बौद्ध को 28 और सतीश नांदल को 26.34 वोट मिले। चुनाव के दौरान कुल पांच वोट रद्द हुए। इसमें कांग्रेस के चार व भाजपा का एक वोट शामिल है। कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है मैं उनका नाम नहीं लूंगा। उनका फैसला जनता करेगी। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने क्रॉस वोटिंग करने वालों को गद्दार बताते हुए कहा उनको बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में से 88 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनेलो के दो विधायकों ने मतदान से दूरी बनाए रखी और वोट नहीं डाला।

 

चार बजे मतदान समाप्त होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के दो विधायकों व कांग्रेस ने भाजपा के मंत्री अनिल विज पर मतपत्र की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा। चुनाव आयोग ने जांच के बाद मंत्री अनिल विज और कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट को वैध माना। टोहाना से कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह का वोट नियमों के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिया गया।

इनेलो ने कांग्रेस का साथ दिया : सैनी

मैंने इतिहास में पहली बार देखा कि कांग्रेस को अपने विधायकों पर विश्वास नहीं था। कांग्रेस अपने विधायकों को बंदी बनाकर अलग-अलग स्थानों पर भेजती रही। इस चुनाव में इनेलो का रोल कांग्रेस की बी टीम के रूप में नजर आया है। इनेलो ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस की मदद की है। निर्दलीय उम्मीदवार महज एक वोट से हारा है। नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री

क्रॉस वोटिंग करने वालों को जनता देखेगी : हुड्डा

इस चुनाव में हमारे सामने चुनौती बहुत बड़ी थी। हमने अग्नि परीक्षा पास की है। जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है, उन्हें जनता देख लेगी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नेता प्रतिपक्ष

बेनीवाल के वोट ने कर्मवीर को बचाया

कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल का वोट चुनाव आयोग रद्द कर देता तो परिणाम पूरी तरह से बदल जाता। यदि बेनीवाल का वोट रद्द होता तो नांदल जीत जाते और कर्मवीर बौद्ध को हारना पड़ता है। इसे ऐसे समझें। कुल वोट 82। भाजपा के 48, निर्दलीय तीन और कांग्रेस के पांच क्रॉस वोट और एक वोट रद्द यानी कुल वोट 55। इस हिसाब से जीत के लिए 27.33 वोट चाहिए होते। भाटिया को 27.33 वोट मिलने के बाद भाजपा के दूसरे सभी वोट नांदल के पास चले जाते। उनका भी कुल वोट 27.66 होता और बौद्ध को सिर्फ 27 वोट मिलते। ऐसे में बौद्ध चुनाव हार जाते।

कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया

कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी पंकज अग्रवाल के खिलाफ चुनाव आयोग को शिकायत दी है। बौद्ध ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग अधिकारी ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया। कांग्रेस के दो विधायकों के खिलाफ गोपनीयता भंग करने की शिकायत दर्ज की गई जबकि वे अपना वोट पहले ही डाल चुके थे और मतदान के समय किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। बौद्ध ने दावा किया कि उपलब्ध वीडियो फुटेज से साफ है कि आरोप सही नहीं हैं। इसके बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। वीडियो दिखाए जाने के बाद भी रिटर्निंग अधिकारी ने फुटेज देने से इन्कार कर दिया।

बेनीवाल ने मतपत्र एजेंट को दिया तो भाजपा ने बताया नियमों की अवहेलना

भाजपा की ओर से मंत्री गौरव गौतम ने निर्वाचन आयोग को शिकायत भेजकर ऐलनाबाद से कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल व टोहाना के कांग्रेस विधायक परमवीर के वोट को अमान्य घोषित करने की मांग की। शिकायत के अनुसार ऐलनाबाद से विधायक भारत सिंह बेनीवाल ने मतदान के बाद अपना बैलेट पेपर पार्टी प्रतिनिधि को सौंप दिया जो कि चुनाव नियमों के खिलाफ है। विधायक परमवीर के खिलाफ फोल्ड किए बिना बैलेट पेपर को खोलने की शिकायत दी गई है। चुनाव आचरण नियम, 1961 के नियम 39 (एए) और नियम 70 के अनुसार, कोई भी विधायक अपने बैलेट पेपर का केवल चिह्नित हिस्सा ही अधिकृत एजेंट को दिखा सकता है। इसके अलावा बैलेट पेपर किसी भी स्थिति में एजेंट को नहीं दिया जा सकता और वह मतदाता के ही पास रहना चाहिए।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से दिखाए गए वीडियो की जांच में स्पष्ट हुआ कि भारत सिंह बेनीवाल से कांग्रेस के अधिकृत एजेंट ने बैलेट पेपर को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की। इसे मतदान प्रक्रिया और गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन बताया गया है। बेदी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिए जाएं और बेनीवाल के वोट को तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित किया जाए।

संजय भाटिया, भाजपा

2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल से जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में करनाल सीट मनोहर लाल के लिए छोड़ दी और संगठन में सक्रिय हो गए। केंद्रीय नेतृत्व ने उनको बिहार और अन्य प्रदेशों के चुनाव में आगे रखा।

कर्मवीर सिंह बौद्ध, कांग्रेस

चार साल पहले हरियाणा सिविल सचिवालय से प्रशासकीय अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए। कांग्रेस एससी सेल के हिमाचल प्रदेश प्रभारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में मुलाना हलके से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन टिकट नहीं मिला।

जनता की भावना को देख लिया फैसला : इनेलो

इनेलो के दोनों विधायक आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला ने मतदान से दूरी बनाई। इनेलो अभय सिंह चौटाला और आदित्य देवीलाल ने कहा कि जनता की भावना को देखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया है। उनके मुताबिक राज्य की जनता भाजपा और कांग्रेस दोनों से परेशान है। इसलिए पार्टी ने किसी का समर्थन नहीं करने का निर्णय लिया।

देर रात तक कांग्रेस के नेताओं की सांसें थमी रहीं

मतदान से लेकर मतगणना तक कांग्रेस नेताओं की सांसें थमी रहीं। रात करीब 10.25 बजे मतगणना शुरू हुई। मतपेटी खुलने के बाद कांग्रेस को उस समय झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनके चार वोट रद्द हो गए हैं। इसकी सूचना मिलते ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा फिर से मतगणना स्थल पर पहुंचे और काफी गहमा-गहमी भी हुई। कांग्रेस के कई विधायकों के लटके चेहरे देख चर्चा शुरू हो गई कि कांग्रेस के हाथ से सीट निकल जाएगी लेकिन जब वोटों की गिनती पूरी हुई तो कांग्रेस सीट जीतने में कामयाब रही।

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