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फरीदाबाद. हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में सोमवार से दो दिन की डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो गई है. हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने सरकार पर वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए सामूहिक अवकाश लेने का फैसला किया. हड़ताल का सीधा असर फरीदाबाद के बीके अस्पताल में देखने को मिल रहा है, जहां सुबह से ही मरीज लंबी लाइनों में खड़े होकर परेशान हो रहे हैं. कई लोग छुट्टी लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं. इलाज के लिए आए लोगों की हालत यह है कि घंटों इंतजार के बाद भी न तो पर्ची मिलने की उम्मीद दिख रही है और न ही डॉक्टरों की कोई व्यवस्था नज़र आ रही है.
Local18 से बातचीत में मरीजों ने अपनी परेशानियां खुलकर सामने रखीं. मुन्नी देवी ने बताया कि वह सुबह से लाइन में खड़ी हैं, लेकिन अभी तक किसी तरह की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है.वहीं इलाज करवाने आई निशा ने कहा कि वह अपनी बेटी को दिखाने आई थीं. बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल से उन्हें बीके अस्पताल में रेफर किया गया, लेकिन यहां पर्ची का काउंटर तक नहीं खुला. उनका कहना था कि अगर काउंटर ही बंद है तो इलाज कैसे होगा? ओल्ड फरीदाबाद से आई महिला फ़ुलजन ने भी बताया कि वह काफी देर से लाइन में हैं, लेकिन अब तक कोई सुविधा शुरू नहीं हुई. डबुआ कॉलोनी से आए अजीत ने कहा कि 9 बजे खुलने वाला काउंटर 11 बजने के बाद भी बंद है जिससे लोग बेहद परेशान हैं.
राजस्थान से इलाज कराने आए विनोद ने बताया कि वह काफी उम्मीद लेकर यहां आए थे, लेकिन काउंटर बंद होने के कारण उनका भी नंबर नहीं लग पा रहा है. संजय कॉलोनी से आई रिंकू देवी ने कहा कि वह 10–15 मिनट से लाइन में खड़ी हैं, लेकिन अंदर कोई हलचल नहीं है. तिगांव से आई शीतल ने भी यही शिकायत दोहराई कि लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है. लेकिन काउंटर खोलने तक की व्यवस्था नहीं दिख रही. वहीं राजकुमार शाह ने बताया कि डॉक्टर ने एक्स-रे करवाने को कहा था लेकिन मशीन खराब बताई जा रही है. उन्होंने कहा कि गरीब आदमी आखिर किसके पास जाए?
बड़खल से आए झुलकर मेन ने बताया कि उनके पिता पिछले 8–10 दिनों से बीके अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई. उन्हें आज हड़ताल के बारे में पता चला. वह पेंट का काम करते हैं और अपने बीमार पिता को लेकर बेहद परेशान हैं. उनका कहना है कि अगर हड़ताल पहले पता होती तो शायद वे कोई दूसरा इंतजाम कर पाते.
हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल की क्या वजह है?
डॉक्टरों की मांगों पर बात करें तो डॉक्टर अंजली ने बताया कि उनकी प्रमुख मांग है कि डायरेक्ट SMO की भर्ती बंद की जाए. उन्होंने कहा कि कई डॉक्टर 20–22 साल नौकरी करने के बाद SMO बनते हैं लेकिन रिटायरमेंट तक सिर्फ 6 महीने SMO की पोस्ट पर काम कर पाते हैं. ऐसे में जूनियर डॉक्टरों को सीधे SMO पद पर भर्ती करना वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ अन्याय है.
12 साल बाद सरकार ने उठाया कदम तो भड़के डॉक्टर
डॉ. एम.पी. सिंह, जो एसोसिएशन के स्टेटवाइज़ प्रेसिडेंट हैं ने बताया कि उनकी दो बड़ी मांगें पिछले 12 साल से लंबित हैं. पहली डायरेक्ट SMO भर्ती बंद हो. क्योंकि इनमें खास लोगों को ही मौका मिलता है. दूसरी, लंबे समय से काम कर रहे डॉक्टरों को प्रमोशन और आर्थिक लाभ दिया जाए. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी का एक बड़ा कारण यह भी है कि चिकित्सा कर्मियों को उचित प्रमोशन नहीं मिलता. कोविड के समय की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों के डॉक्टरों ने डबल सैलरी की मांग की थी लेकिन हरियाणा के डॉक्टरों ने सिर्फ समाज सेवा को प्राथमिकता दी और बिना अतिरिक्त सुविधा के काम किया. गौरतलब है कि अस्पताल में हालात यह हैं कि मरीजों की लंबी लाइनें, बंद काउंटर, रुकें हुए टेस्ट और रिपोर्टों की देरी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. हड़ताल के कारण दो दिन तक स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ेगा.
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