रश्मि बंसल का कॉलम: बड़े आइडिया का इंतजार न कीजिए, एक शब्द से प्रेरणा लीजिए Politics & News

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5 घंटे पहले

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रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर

डॉक्टर साहिब शादी में गए। चार लोगों से मिले। सब ने अपनी हड्‌डी-पसलियों की शिकायत करते हुए मुफ्त सलाह ली। वकील साहिबा पार्टी में पहुंचीं तो मधुमक्खी की तरह पब्लिक उनके इर्द-गिर्द भिनभिना रही थी। फिल्मी सितारों के तलाक जो हैंडल करती हैं, क्यों ना उनसे हम भी कुछ फ्री एडवाइज ले लें। इसी तरह जब मैं किसी फंक्शन में जाती हूं, लोग पूछते हैं, आप क्या करते हो? मैं किताब लिखती हूं। अच्छा, मैं भी किताब लिखने की सोच रहा हूं, जनाब कहते हैं।

आसपास बढ़िया पकवान मिल रहे हैं, लेकिन वो सिर्फ मेरा दिमाग खाना चाहते हैं। पहला सवाल- टाइम कितना लगेगा? भाई, आप दो महीने में किताब लिख सकते हो, या फिर पांच साल भी लग सकते हैं। वैसे आजकल तो आप चैटजीपीटी की मदद से 5 मिनट में भी शब्दों का कारवां तैयार कर सकते हो। मगर आप क्यों लिखना चाहते हो, और किस बारे में?

लिखने का एक रीजन होता है कि अपने अंदर की आवाज को मौका मिले कुछ कहने का। इस तरह की लेखनी को कहते हैं जर्नलिंग। यह आप करते हैं अपने लिए। ख्याल-जज्बे, दबे हुए सपने, सब कुछ कागज पर डालकर मन हल्का होगा और स्पष्ट भी। तो ये हो गई एक तरह की सेल्फ-थैरेपी। दूसरा होता है शौक- किसी को गाने का, किसी को पेंटिंग का, तो कोई लिखने का शौकीन।

शौक एक ऐसी एक्टिविटी होती है, जो आप पैसों के लिए नहीं, अपने आनंद के लिए करते हैं। कुछ लोग नहाते समय गाना गुनगुनाते हैं। कुछ नोटबुक में कविता लिखते हैं। शौकिया गायक छोटी-सी गेदरिंग में फरमाइश आने पर कुछ सुना देता है, लोग ताली बजाते हैं। इसी तरह, शौकिया कवि चार लाइन फेसबुक पर डालकर लाइक्स पाता है। इसका मतलब यह नहीं कि गायक अरिजीत सिंह बन पाएगा या वो कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की टक्कर का।

खैर, आजकल अगर कोई अपनी किताब छपाना चाहता है, तो उसे प्रकाशक की भी जरूरत नहीं। कई लोग किताब छापने को धंधा बना चुके हैं। लाख-दो लाख खर्च करो, एक पुस्तक की 100 कॉपी वो प्रदान करेंगे, जिसके कवर पर आपका नाम हो। अब रही बात- इसे पढ़ेगा कौन? ऐसी किताब की सेल दुकान से मुश्किल है, सो आप ऑनलाइन बेचेंगे।

कुछ लोग आपका मन रखने के लिए लिंक पर क्लिक करके पर्चेस भी कर लेंगे। किसी बोर दोपहरी में, जब सोशल मीडिया से पेट भर चुका हो, वो आपकी किताब खोलकर पढ़ने का एहसान भी कर देंगे। अब सिर्फ एक चीज मायने रखती है- क्या आपके शब्दों में मिठास है, कहानी कुछ खास है? मेरे दिल की बात समझने की शक्ति आपके पास है? अगला पन्ना पलटे बिना मुझे नींद नहीं आएगी। जानना जरूरी है कि स्टोरी कहां जाएगी। किताब में दम है तो ठीक है, नहीं तो रद्दीवाला नजदीक है।

तो मुफ्त की सलाह जो चाहते हैं, लीजिए। अगर लिखने का सोच रहे हैं, तो सोचना बंद- पहले कुछ कीजिए। किताब है बड़ी बात, पहले करते हैं शुरुआत। आंखें बंदकर, कल्पना की नदी में कूद जाइए। उसी फ्लो में बहते हुए, अंतरात्मा से कुछ ऊपर लाइए। बड़े आइडिया का इंतजार न कीजिए, किसी एक शब्द से ही प्रेरणा लीजिए। चलो मैं बताती हूं शब्द- ‘कुर्सी’।

कुर्सी मिलती है घर में, स्कूल में, ऑफिस में… इट इज एवरीवेयर। लेकिन कुर्सी पर कौन बैठा है, क्यों और कैसे? कल्पना कीजिए, बनेगी कहानी वैसे। आधे घंटे का समय है आपके पास। लिख डालिए, कुछ रोचक-सा, कुछ खास। 600 शब्द से कम होनी चाहिए, भेजिए ईमेल से, मेरा जवाब पाइए। सब से बेहतर कहानी को मिलेगा इनाम। बाकी सब को भी सादर प्रणाम। आखिर आपने पाया एक अनमोल अहसास। लेखक वही, जिसे मिले लिखने से उल्लास। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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