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अमेरिका टैरिफ का असर दूसरे दिन भी भारतीय बाजारों पर दिख रहा है. लगातार दूसरे दिन और कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 600 नीचे फिसल गया. जबकि निफ्टी में भी करीब 200 प्वाइंट्स की गिरावट आयी है. इसी तरह से शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट दिखी. रुपये अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.99 पर पहुंच गया. इसे एक दिन पहले भी सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दिखी थी.

एक दिन पहले भारतीय बाजारों में भारी गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत समेत 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में बिकवाली तथा वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख से बाजार नुकसान में रहा। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 322.08 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,295.36 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 809.89 अंक तक लुढ़क गया था.
हालांकि, बाद में औषधि शेयरों में तेजी से बाजार नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने में सफल रहा. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.25 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,250.10 अंक पर बंद हुआ. निफ्टी एक समय 186.55 अंक तक लुढ़क गया था.
अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्क दरों का मुकाबला करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है.
वॉल स्ट्रीट पर जबरस्त असर
दूसरी तरफ अमेरिकी बाजार पर भी टैरिफ का बड़ा असर दिख रहा है. ट्रंप के इस फैसले से ट्रेड वॉर और आर्थिक मंदी के संकट अब मंडराने लगे हैं और इसका सबसे बुरा असर खुद अमेरिकी शेयर बाजारों पर हुआ. वैश्विक वित्त बाजार में चिंताओं के बीच कोविड-19 के बाद ऐसे पहली बार हुआ जब अमरेकी शेयर बाजार का ये हाल हुआ है.
एक तरफ जहां S&P 500 इंडेक्स करीब 4.8% गिर गया, जो जून 2020 के बाद एक दिन में इतनी बड़ी गिरावट है. इस गिरावट से बाजार को करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर यानी 200 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. इसके अलावा, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और नैस्डक कंपोजिट भी वही गिरवट देखी गई, जो कोरोना महामारी के वक्त 2020 में देखी गई थी. डॉउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 4% 1679 अंक और नैस्डेक कंपोजिट में 6% की गिरावट हुई.
टैरिफ के बाद कमजोर आर्थिक रफ्तार और महंगाई के आशंका के बीच वॉल स्ट्रीट लड़खड़ाता हुआ नजर आया. बड़ी टेक कंपनियों और क्रूड ऑयल के लेकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में अन्य करेंसी तक, सभी में गिरावट का दौर जारी रहा. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, हालांकि सोना की कीमत में इजाफा हुआ और निवेशकों को इसमें पैसा लगाना सबसे बेहतर लगा.
हालांकि, ये जरूर था कि वैश्विक निवेशक ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा के पूरी तरह से भलीभांति वाकिफ थे. इसलिए S&P 500 इंडेक्स की सेहत पर इसका साफ असर दिखा और इसमें रिकॉर्ड 10% की गिरावट दर्ज हुई.
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यूएस स्टॉक में हाहाकार के बाद गिरा भारतीय बाजार, 600 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी में भी गिरावट