मो. नियाज असदुल्ला का कॉलम: जेन-ज़ी के युवा नौकरियों में टालमटोल बर्दाश्त नहीं करते Politics & News

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3 दिन पहले

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मो. नियाज असदुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यूके में विजिटिंग प्रोफेसर

यमन के शांति कार्यकर्ता तवाक्कुल करमन ने एक बार कहा था कि युवा एक क्रांति हैं; उन्हें रोका नहीं जा सकता, उन पर अत्याचार नहीं किया जा सकता और उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता। यह बात बांग्लादेश में 5 अगस्त को बिल्कुल सच साबित हुई।

शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद करमन के साथी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने इसे बांग्लादेश का दूसरा स्वतंत्रता दिवसघोषित कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण की हद से ज्यादा राजनीतिक प्रणाली के खिलाफ अहिंसक छात्र विरोध के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही सरकार विरोधी जेन-ज़ी क्रांति में बदल गया था। इस युवा विद्रोह ने एक ऐसे समाज को उद्वेलित कर दिया, जो पहले ही जीने की बढ़ती लागतों, भ्रष्टाचार और असहमतियों पर हिंसक कार्रवाई से बेहद नाराज था।

बांग्लादेश का राजनीति से प्रेरित जॉब-कोटा सिस्टम हसीना की वादाखिलाफी और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया था। नौकरियां पैदा करने में सरकार की विफलता ने लाखों युवाओं को बेरोजगारी की गर्त में झोंक दिया था।

बढ़ती आकांक्षाओं- सीमित अवसरों की बेमेल जोड़ी से एक पूरी पीढ़ी हताश थी। विकास के लाभ सरकार के नजदीकी कारोबारियों और राजनीतिक कुलीनों को मिल रहे थे। निजी क्षेत्र बढ़ती वर्कफोर्स को समायोजित करने के लिए हांफने लगा था। महिला श्रमिकों का अनुपात घट रहा था।

निजी क्षेत्र के लिए नौकरियां सृजित करने के बजाय सरकार ने विवादास्पद मेगा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अपनाया। जैसे-जैसे राज्य की नौकरशाही का आकार बढ़ता गया, सिविल सेवकों के लाभ और वेतन बढ़ने लगे और निजी क्षेत्र में निवेश के लिए धन की किल्लत होती चली गई।

मानो इतना काफी नहीं था तो हसीना की हुकूमत समय के साथ-साथ और तानाशाहीपूर्ण भी होती चली गई। धांधली वाले तीन चुनावों ने उन्हें 16 वर्षों तक सत्ता में रखा और इस अवधि में सैकड़ों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया या वे परिदृश्य से चुपचाप विलुप्त कर दिए गए।

अब मोहम्मद यूनुस ने बागडोर संभाली है, जो 16 अन्य सलाहकारों के साथ एक नई कार्यवाहक सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। यह एक विडंबनापूर्ण परिघटना है, क्योंकि हसीना लंबे समय से यूनुस के उस ग्रामीण बैंक को नष्ट करने की कोशिश कर रही थीं, जिसने गरीबों का समर्थन करने के लिए माइक्रो-फाइनेंस के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई थी।

बांग्लादेश की कानूनी प्रणाली को हथियार बनाते हुए हसीना ने यूनुस के खिलाफ लगभग 200 झूठे आरोप लगाए। लेकिन अब बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के लिए नई सरकार को एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना होगा।

यकीनन, इसके बावजूद लोकतंत्र की वापसी की कोई गारंटी नहीं है। चुनावी लोकतंत्र को बनाए रखने वाले जरूरी संस्थान खोखले हो चुके हैं। हसीना की रुखसती के बाद बांग्लादेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची थी, जिसके कारण अराजकता और हिंसा में वृद्धि हुई।

पहले से इस बात के चिंताजनक संकेत हैं कि अन्य राजनीतिक दल प्रमुख संस्थानों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, नवनियुक्त अटॉर्नी जनरल, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हैं।

कोई भी मुख्यधारा की पार्टी भ्रष्टाचार और दमन की विरासत से अछूती नहीं है, और सभी जल्दबाजी में चुनाव कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यूनुस का अंतरिम शासन कोई बदलाव ला पाने में सक्षम न हो।

जिस तरह ‘अरब स्प्रिंग’ जल्द ही ‘अरब विंटर’ में बदल गया था, वही हाल बांग्लादेश के लोकतंत्र में आई नई करवट का न हो जाए। लेकिन एक बड़ा फर्क है। अरब में हुआ विद्रोह आंशिक रूप से इसलिए विफल हुआ था, क्योंकि उसमें युवाओं की भूमिका सीमित थी।

इसके विपरीत, बांग्लादेशी प्रदर्शनकारी जेन-जी से वास्ता रखने वाले हैं और वे केवल एक तानाशाह के तख्तापलट तक ही सीमित नहीं रहे हैं। अंतरिम सरकार बनने से पहले, छात्रों और बॉय स्काउट्स ने यातायात पुलिस, सफाई कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के कर्तव्यों का पालन करते हुए खालीपन को भरने के लिए कदम बढ़ाया था। मुस्लिम छात्र स्वयंसेवकों ने मंदिरों की रखवाली की और हिंदू समुदायों की रक्षा की, जो कि एक उत्साहजनक संकेत था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बांग्लादेशी युवा राजनीतिक एजेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं और आगे क्या होने वाला है, इसके लिए एक रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। सेना या मुख्यधारा के राजनीतिक दलों द्वारा सत्ता सम्भालने का इंतजार करने के बजाय उन्होंने यूनुस को बागडोर सम्भालने के लिए मना लिया।

यूनुस की अंतरिम सरकार ने भी नेतृत्व की अधिक समावेशी शैली को अपनाया है और दो छात्र नेताओं को कैबिनेट में नियुक्त किया है। जब तक युवा आंदोलन प्रतिबद्ध रहता है, तब तक यह ‘बांग्ला स्प्रिंग’ जारी रहेगा।
(© प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

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