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रूस के अस्पताल में भर्ती बूटा सिंह ने वीडियो जारी कर सरकार से भारत आने की अपील की
पंजाब के मोगा का बूटा सिंह रूस-युक्रेन युद्ध में बुरी तरह से घायल हो गया है। इस समय वह वहां के सरकारी अस्पताल में इलाज करवा रहा है। बूटा सिंह चक कनियां कलां के रहने वाले हैं। अक्टूबर 2024 में वे पढ़ाई के लिए रूस गए थे। सिंह ने बताया कि यहां उसे एक मह
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बूटा सिंह ने वीडियो कॉल पर बताया कि मैं घायल हालत में तीन दिन में बड़ी मुश्किल से शहर तक पहुंचा। इस वक्त उसका मॉस्को के अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसका जबड़ा अभी कुछ हद तक ठीक हो गया है। अभी डॉक्टर कह रहे हैं कि एक आपरेशन होना है। अब मेरे पास पैसे नहीं हैं। किसी तरह से मुझे वापस बुलाया जाए। उसने बाकी भारतीय युवकों से भी अपील की कि रूस मत आओ। यहां ज्यादा कमाई नहीं है। अगर आप अफोर्ड कर सकते हैं तभी आओ। यहां आने के बाद भी सेना में जाने के झांसे में मत आना।
बूटा सिंह ने कहा-
मुझे आर्मी कैंप में भेज दिया और यहां पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। मुझे वर्दी दी गई और मौत की धमकी देकर युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया। ड्रोन हमले में मैं घायल हो गया। एक महीने से इलाज चल रहा है।


बूटा सिंह की मां परमजीत कौर और बहन कमरजीत ने बताया कि बूटा सिंह का रूस-युक्रेन युद्ध में जबड़ा टूट गया है।
सिलसिलेवार पढ़ें कैसे बूटा सिंह रूस पहुंचा…
- यू ट्यूब से ढूंढा एजेंट, उसी ने पढ़ाई के लिए भेजा: बूटा सिंह की बहन करमजीत ने बताया भाई विदेश जाना चाहता था। इसके लिए उसने अक्टूबर में यूट्यूब पर एक ट्रैवल एजेंट का वीडियो देखा। उसने उसे दिए गए नंबर पर कॉल की और पढ़ाई के रूस जाने की इच्छा जताई। इसके बाद एजेंट ने उससे कहा कि वह उसे भेज देगा। रूस में पढ़ाई कनाडा के मुकाबले सस्ती है। उसने उसे रूस भेजने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए मांगे।
- पैसा नहीं था तो जमीन बेची, कुछ उधार लिया: करमजीत ने बताया कि भाई ने रूस जाने के बारे में परिवार से बात की। उसने बताया कि रूस जाने में 4 लाख रुपए के करीब खर्च आएगा। परिवार ने सोचा कि बेटा विदेश जाकर कमा लेगा। घर की गरीबी भी दूर हो जाएगी। इसके लिए मां ने अपने गहने गिरवी रख दिए और ब्याज पर पैसे उधार लिए। कुछ जमीन भी बेची और कर्ज भी लिया। इसके बाद अक्टूबर 2024 में वह रूस पहुंच गया।

अब जानिए बूटा सिंह के साथ रूस में क्या हुआ…
- पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए करने लगा काम: बूटा सिंह ने बताया कि पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वह रूस से मॉस्को में दिहाड़ी करने लगा। कभी किसी दुकान पर काम मिल जाता तो कभी कंस्ट्रक्शन साइट पर। बूटा सिंह के मुताबिक इससे भी खर्च नहीं निकल रहा था और वह स्थायी नौकरी की तलाश करने लगा। इस दौरान उसकी मुलाकात रूस की ही एक महिला से हुई। वह महिला उसे नौकरी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गई। उसने उसके साथ एक कागज पर डील साइन करवा ली।
- आर्मी ने कंस्ट्रक्शन का काम बताया हथियार चलाना सिखाए: महिला ने उससे कहा कि रूस की आर्मी में कंस्ट्रक्शन का काम है। सेना में काम के लिए उसे हथियार चलाने की बेसिक ट्रेनिंग जरूरी है। इस तरह से महिला ने उसे धोखे में रखकर रूस के सैन्य कैंप में भेज दिया। यहां पर उसे 10 दिन रखा गया और सैनिकों ने बंदूक सहित अन्य हथियार चलाने सिखाए। इसके बाद मॉस्को से उसे बॉर्डर पर भेज दिया गया। उससे कहा गया कि बॉर्डर पर काम है। तुम्हारे साथ दो सैनिक भी जाएंगे। यहां बॉर्डर पर आकर उससे कहा गया कि उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़ना है।
- डेढ़ महीना पहले ड्रोन ब्लास्ट में जबड़े में स्प्रिंकल लगे: डेढ़ महीना पहले यूक्रेन की तरह से ड्रोन अटैक हुआ। ड्रोन के कुछ स्प्रिंकल उसके जबड़े में लगे और वह वहीं गिर गया। बमबारी में उसके साथ मौजूद दोनों सैनिक मर गए। उसे होश आया तो वह किसी तरह तीन दिन चलते हुए मॉस्को शहर पहुंचा। यहां कैंप में आकर अपनी हालत बताई, जिसके बाद सैनिकों ने उसे यहां के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया। अब उसका जबड़ा कुछ ठीक है। लेकिन न तो उसके पास भारत लौटने के लिए पैसे हैं और न ही कोई रोजगार।

गांव में बूटा सिंह का गली में आखिरी घर चक कनिया कलां गांव के अंदर बूटा सिंह गांव की एक आखिरी गली में है। यहां उनकी मां परमजीत कौर, छोटी बहन करमजीत कौर और पिता राम सिंह रहते हैं। बूटा सिंह की मां परमजीत कौर भावुक होते हुए कहती हैं कि हम सरकार से अपने बेटे को वापस लाने की मांग करते हैं। बूटा सिंह के परिवार का कहना है कि उनके बेटे को फंसाया गया है। उसने 12वीं तक पढ़ाई की थी और परिवार की आर्थिक तंगी के कारण रूस चला गया था।

मोगा के कनियां कलां गांव में बूटा सिंह का घर।
सीचेवाल भी उठा चुके हैं राज्यसभा में मुद्दा 24 जुलाई को राज्यसभा सदस्य बलबीर सिंह सीचेवाल ने भी इस मामले को लेकर राज्यसभा में मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन ने कहा कि संबंधित रूसी अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करें। विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस स्थित भारतीय केंद्रों ने रूसी सशस्त्र बलों में सेवा समाप्त कर चुके भारतीय नागरिकों को भारत लौटने में सहायता प्रदान की है, जिसमें यात्रा दस्तावेजों में सहायता और आवश्यकतानुसार हवाई टिकट उपलब्ध कराना शामिल है।


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मोगा के युवक को रूस में जबरन युद्ध में धकेला: ड्रोन अटैक में जबड़ा टूटा, मॉक्को में चल रहा इलाज, वीडियो कॉल पर बताया – Jalandhar News



