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हरियाणा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा।
हरियाणा के मानेसर लैंड स्कैम मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अब पंचकूला स्थित सीब
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सीबीआई पहले ही इस मामले में कोर्ट में चालान दाखिल कर चुकी है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब विशेष अदालत ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ आरोप तय करेगी और इसके बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। सीबीआई ने अपनी जांच में कई अनियमितताओं का हवाला देते हुए पूर्व सीएम समेत अन्य आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सीबीआई जांच के आदेश गौरतलब है कि मानेसर लैंड स्कैम की जांच का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। अदालत ने पाया था कि वर्ष 2007 में तत्कालीन हुड्डा सरकार द्वारा अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला दुर्भावनापूर्ण था और इसे धोखाधड़ी की श्रेणी में माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बिचौलियों द्वारा कमाए गए अनुचित लाभ की जांच करने और राज्य सरकार को “एक-एक पाई वसूलने” का निर्देश दिया था।
यहां जानिए अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ…
- हुड्डा ने ये लगाई थी याचिका : हुड्डा ने पंचकूला विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मामले की सुनवाई स्थगित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का रास्ता साफ हो गया था।हुड्डा की ओर से दायर याचिका में विशेष सीबीआई अदालत के 19 सितंबर को पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई। सीबीआई अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी और अगली सुनवाई पर आरोप तय करने का निर्देश भी दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला : हाईकोर्ट में पूर्व सीएम हुड्डा की ओर से वकीलों ने तर्क दिया कि निचली अदालत का आरोप तय करने का फैसला अवैध था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सह-आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसलिए, अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करना “मुकदमे को अलग-अलग हिस्सों में बांटने” के समान होगा, जो अवैध था।
- हुड्डा सहित कई पूर्व अधिकारी आरोपी : हुड्डा की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि विशेष अदालत ने उनकी अर्जी केवल इस आधार पर खारिज कर दी कि सर्वोच्च न्यायालय ने केवल उन आरोपियों की कार्यवाही पर रोक लगाई है, जिन्होंने विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की थीं। हुड्डा सहित कई पूर्व अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जो विशेष सीबीआई अदालत में लंबित है।
केस में 34 के खिलाफ 80 हजार पन्नों की चार्जशीट
केंद्रीय एजेंसी ने सितंबर 2015 में जांच शुरू की थी और 2018 में हुड्डा समेत 34 लोगों के खिलाफ 80,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि सरकारी उद्देश्यों के नाम पर गुरुग्राम जिले के मानेसर और आसपास के गांवों के किसानों से सस्ते दामों पर सैकड़ों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया।
बाद में रियल एस्टेट कंपनियों, बिल्डरों और कॉलोनाइजरों को बेहद रियायती दरों पर जमीन के लाइसेंस जारी कर दिए गए। इसी साल जनवरी में सीबीआई ने मामले के शीघ्र निपटारे की मांग करते हुए तर्क दिया था कि पिछले चार वर्षों से आरोपियों के पक्ष में स्थगन आदेश जारी है।
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मानेसर लैंड स्कैम में पूर्व सीएम हुड्डा को झटका: हाईकोर्ट ने याचिका डिसमिस की; अब CBI स्पेशल कोर्ट में होगी सुनवाई, आरोप तय होंगे – Haryana News
