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मोहाली में इंसानियत को शर्मशार कर देने वाली घटना हुई है। डेराबस्सी के बरवाला रोड पर गांव भगवानपुर के पास एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। तीन दिनों से बीमार हालत में एक व्यक्ति सड़क किनारे बेंच पर पड़ा रहा और तीन दिन में लाखों लोग वहां से गुजरे, लेकिन किसी ने बीमार व्यक्ति की मदद नहीं की। आखिरकार इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतक का पेट बुरी तरह फूला हुआ था और वह गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। पिछले तीन दिनों से वह उसी बेंच पर बेसहारा पड़ा रहा। राहगीरों ने उसे देखा, लेकिन न तो किसी ने अस्पताल पहुंचाया और न ही समय पर प्रशासन को सूचना दी। एक ओर सरकार स्वास्थ्य योजनाओं के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी कर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। पूरा प्रशासन स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनवाने में व्यस्त दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, एक बीमार और लाचार व्यक्ति तीन दिन तक सड़क किनारे पड़ा तड़पता रहा और उसे इलाज तक नसीब नहीं हुआ।
जब 10 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज के दावे किए जा रहे हैं तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसे जरूरतमंद तक यह सुविधा क्यों नहीं पहुंची। अगर मौके पर प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सहायता ही उपलब्ध नहीं तो फिर ऐसे कार्ड और योजनाओं का वास्तविक फायदा क्या है।
बेसहारा और गंभीर रूप से बीमार लोगों की पहचान की जाए
यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। यदि समय रहते उसे अस्पताल पहुंचाया जाता तो संभव है उसकी जान बच सकती थी। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में बेसहारा और गंभीर रूप से बीमार लोगों की पहचान कर तत्काल चिकित्सा सहायता और आश्रय की व्यवस्था की जाए। साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोहराई न जाएं। यह मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। संपर्क करने पर थाना प्रभारी सुमित मोर ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच की जाएगी।
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मर गई इंसानियत: तीन दिन तक तड़पता रहा व्यक्ति, लाखों लोग गुजरे; किसी ने मदद नहीं की, इलाज न मिलने से मौत


