भारत में रसोई गैस इमरजेंसी लागू: सरकार ने सभी तेल कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश दिया; ईरान-इजराइल जंग बढ़ी तो किल्लत होगी Business News & Hub

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नई दिल्ली21 मिनट पहले

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ईरान-इजराइल जंग अगर बढ़ी तो भारत में रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ेगी। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर का यूज करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट की वजह से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने गुरुवार देर रात आदेश जारी किया।

इस आदेश में कहा गया है कि अब रिफाइनरी कंपनियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। यानी इन गैसों का उपयोग किसी और काम में नहीं किया जाएगा।

सरकारी कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता

आदेश के मुताबिक, सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को करनी होगी।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के लगभग 33.2 करोड़ एक्टिव LPG कंज्यूमर्स यानी उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर मिलते रहें।

क्या होता है LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन?

LPG: यह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस है, जो प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है।

प्रोपेन/ब्यूटेन: ये हाइड्रोकार्बन गैसें हैं, जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इनका यूज प्लास्टिक बनाने (पेट्रोकेमिकल्स) और फ्यूल दोनों में होता है।

रिलायंस के एक्सपोर्ट और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन पर पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) पर पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन होने से अल्काइलेट्स के प्रोडक्शन में कमी आएगी, जिसका इस्तेमाल पेट्रोल की ग्रेडिंग सुधारने में किया जाता है।

पिछले साल रिलायंस ने हर महीने एवरेज चार अल्काइलेट्स कार्गो एक्सपोर्ट किए थे। इसके अलावा सरकार ने रिफाइनर्स को यह भी साफ कर दिया है कि वे फिलहाल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इन गैसों का इस्तेमाल न करें।

कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और ट्रेड सोर्सेज का कहना है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल के बजाय LPG बनाने में इस्तेमाल करने से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा।

दरअसल, पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बाजार में LPG के मुकाबले बेहतर कीमत पर बिकते हैं। ऐसे में सरकार के इस आदेश से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

कतर में गैस उत्पादन बंद, भारत में 40% सप्लाई घटी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश कतर अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट का प्रोडक्शन रोक चुका है।

इससे भारत आने वाले जहाजों की आवाजाही रुक गई है और घरेलू बाजार में गैस की सप्लाई में 40% तक की बड़ी कटौती की गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) यानी करीब 2.7 करोड़ टन सालाना कतर से ही आयात करता है।

विदेश से आने वाली LNG को गैस में बदलकर ही CNG और PNG सप्लाई की जाती है। इसकी सप्लाई रुकने से सिटी गैस कंपनियों (CGD) ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG के दाम बढ़ सकते हैं।

कतर की राजधानी दोहा के औद्योगिक इलाके में 1 मार्च 2026 को ईरानी अटैक के बाद धुआं उठता दिखा।

कतर की राजधानी दोहा के औद्योगिक इलाके में 1 मार्च 2026 को ईरानी अटैक के बाद धुआं उठता दिखा।

तेल और गैस सप्लाई करने का रास्ता लगभग बंद

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना है। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जिससे होकर कतर और यूएई जैसे देश अपना तेल और गैस निर्यात करते हैं। ईरान और इजरायल जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है।

  • जहाजों की संख्या घटी: 28 फरवरी को इस रास्ते से 91 जहाज गुजरे थे, जो अब घटकर सिर्फ 26 रह गए हैं।
  • भारत की निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। पेट्रोनेट के तीन बड़े जहाज-दिशा, राही और असीम-फिलहाल कतर के रास लफान पोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

प्लांट पर ड्रोन हमला, LNG का प्रोडक्शन रुका

कतर-एनर्जी के मुताबिक, ईरान ने कतर के ‘रास लफान’ और ‘मेसाईद’ इंडस्ट्रियल सिटी स्थित प्लांट पर ड्रोन से हमला किया था। सुरक्षा कारणों से कंपनी ने LNG का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है।

पिछले हफ्ते अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर स्ट्राइक की थी, जिसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है।

ईरान ने कतर के 'रास लफान' स्थित प्लांट पर ड्रोन से हमला किया था। सुरक्षा कारणों से कंपनी ने LNG का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है।

ईरान ने कतर के ‘रास लफान’ स्थित प्लांट पर ड्रोन से हमला किया था। सुरक्षा कारणों से कंपनी ने LNG का प्रोडक्शन फिलहाल रोक दिया है।

CNG कंपनियों ने सरकार को लिखी चिट्ठी, संकट की चेतावनी

गैस की किल्लत को देखते हुए ‘एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज’ (ACE) ने सरकारी कंपनी गेल (GAIL) को पत्र लिखकर स्पष्टता मांगी है। कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से आने वाली सस्ती गैस नहीं मिली, तो उन्हें ‘स्पॉट मार्केट’ से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी।

  • कीमतों में अंतर: स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत फिलहाल 25 डॉलर प्रति यूनिट पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस से दोगुनी से भी ज्यादा है।
  • EV की ओर शिफ्ट होंगे लोग: कंपनियों को डर है कि अगर CNG के दाम बहुत ज्यादा बढ़े, तो लोग परमानेंटली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर शिफ्ट हो जाएंगे, जिससे गैस सेक्टर को बड़ा नुकसान होगा।

पेट्रोनेट LNG ने जारी किया ‘फोर्स मेजर’ नोटिस

भारत की सबसे बड़ी गैस आयात करने वाली कंपनी पेट्रोनेट LNG ने कतर की कंपनी कतर-एनर्जी को ‘फोर्स मेजर’ नोटिस भेजा है। फोर्स मेजर का मतलब है कि किसी बड़ी वजहजैसे युद्ध या संकट के कारण कंपनी अभी तय समझौते के मुताबिक गैस सप्लाई नहीं कर पा रही है।

कंपनी ने गेल (GAIL), इंडियन ऑयल (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी कंपनियों को भी फोर्स मेजर नोटिस जारी कर सूचित किया है कि उन्हें मिलने वाली गैस की सप्लाई कम रहेगी। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि युद्ध के कारण होने वाले बिजनेस नुकसान पर इंश्योरेंस कवर भी नहीं मिलता है।

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न्यूज एजेंसी ANI ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर यह अपडेट सरकारी सूत्रों के मुताबिक दिया है। हालांकि सरकार अभी पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

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Source: https://www.bhaskar.com/g/business/news/india-government-orders-refiners-increase-lpg-production-middle-east-crisis-2026-137364444.html