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3 घंटे पहले
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संजू और अभिषेक ने टी-20 वर्ल्ड के आखिरी तीन मैचों में ओपनिंग की।
रविवार को भारतीय टीम घर पर टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई। टूर्नामेंट शुरू होने के पहले दिन से ही टीम इंडिया खिताब की सबसे प्रबल दावेदार थी, लेकिन ट्रॉफी के आंकड़े अलग कहानी कहते थे। किसी टीम ने टी20 वर्ल्ड कप के लगातार दो संस्करण नहीं जीते थे और न ही कोई टीम घर पर यह ट्रॉफी जीत पाई थी। लेकिन भारत ने अपने खेल से इन सभी धारणाओं को गलत साबित कर दिया।
भारत ने अहमदाबाद के उस डर को भी पीछे छोड़ दिया, जो फाइनल से पहले हर फैन को सता रहा था। 2023 में टीम इंडिया इसी मैदान पर वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल हारी थी। तब टीम की छवि ऐसी बन गई थी कि वह सेमीफाइनल और फाइनल तक तो दावेदार के अंदाज में खेलती है, लेकिन आखिरी पड़ाव पर हार जाती है। 2024 में टी20 वर्ल्ड कप फाइनल और 2025 में चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर टीम ने उस छवि को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया था। फिर भी सवाल था कि क्या इस बार भी टीम बिना दबाव के उसी तरह खेल पाएगी? क्या एक लाख दर्शकों की उम्मीदों का बोझ फिर से हावी हो जाएगा? लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
टीम ने जिस एकतरफा अंदाज में 96 रन से फाइनल जीता, उसमें डर नहीं, दबदबा दिखा। लगातार दो बार स्कोरबोर्ड पर 250+ का स्कोर लगाना इस बात का सबूत था कि टीम अब डरकर नहीं खेल रही थी, बल्कि उसके पास एक परफेक्ट गेमप्लान था, जो किसी भी दबाव से बड़ा साबित हुआ। शायद उसी गेमप्लान के दम पर टीम इंडिया आईसीसी इवेंट्स के पिछले 34 मैचों में सिर्फ दो ही हारी है। मौजूदा टूर्नामेंट के टॉप-5 स्कोर में से तीन भारत ने बनाए हैं। जानिए, टी20 वर्ल्ड कप में कौन सी वे बातें थीं, जिन्होंने भारत को चैम्पियन बनाया…
गेंदबाजी: बुमराह ने एक बार फिर संभाला मोर्चा गेंदबाजी के लिहाज से यह भारत का सर्वश्रेष्ठ टूर्नामेंट नहीं रहा। सपाट पिचों पर भारत ने 21.88 के चौथे सर्वश्रेष्ट औसत और 8.48 की 9वीं सर्वश्रेष्ठ इकॉनोमी रेट से गेंदबाजी की। भारत को खासकर छठे गेंदबाज की कमी खली, क्योंकि इंग्लैंड के खिलाफ टीम 253 रन बचाते हुए भी 7 रन से जीत पाई थी। हालांकि, स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने एक बार फिर मोर्चा संभाला और 8 मैच में 14 विकेट लेकर सबसे सफल रहे। हाई स्कोरिंग मुकाबले खेलने के बावजूद उन्होंने सिर्फ 6.21 रन प्रति ओवर खर्च किए, जो टूर्नामेंट में 20+ ओवर फेंककर सबसे किफायती गेंदबाजी रही। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में बुमराह ने ही लगातार दो कसे ओवर फेंककर भारत को जिताया था।

- संजू के आते ही स्ट्राइक रेट में 20% का इजाफासंजू सैमसन के टॉप ऑर्डर में आते ही भारत के टॉप-3 बल्लेबाजों ने अगले चार मैच में 566 रन ठोक दिए।
- संजू से पहले भारत का शुरुआती 10 ओवर में स्पिन के खिलाफ रन रेट सबसे खराब 6.95 का था। जब संजू आए तो स्पिन के खिलाफ औसत 36.75 हो गया, जो टूर्नामेंट में बेस्ट था। रन रेट उछलकर 8.64 हो गया।
- इसकी वजह थी कि जो ऑफ स्पिन अभिषेक को फंसा रही थी, संजू उसे टैकल कर दे रहे थे। एक अन्य फायदा यह हुआ कि इशान नंबर-3 पर चले गए। स्पिन के खिलाफ संघर्ष कर रहे तिलक को नंबर-5 पर तेज गेंदबाजों को हिट करने का रोल मिल गया।
- तिलक ने डेथ ओवर्स में 248 के स्ट्राइक रेट से 25 गेंद में 62 रन जड़े। यानी, सिर्फ संजू के आने से बैटिंग का हुलिया बदल गया। फाइनल में अभिषेक ने ऑफ स्पिनर फिलिप्स का ओवर खेलने की जिम्मेदारी संजू को दी और 18 गेंद में फिफ्टी जड़ गए।
संजू सैमसन 2.0: इंपैक्ट में कोहली को पीछे छोड़ा; 175+ के स्ट्राइक रेट से सबसे तेज वर्ल्ड कप
- 2023 में पहली 23 पारियों में केवल एक फिफ्टी जड़ने वाले संजू ने 2024 के अंत में 5 हफ्ते के भीतर 3 टी20 शतक ठोके थे। हालांकि, जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 10, 6, 0, 24, 6 रन बनाकर ड्रॉप हुए, वर्ल्ड कप में वापसी ऐतिहासिक रही।
- तीन नॉकआउट मैचों में सैमसन ने 199 की स्ट्राइक रेट से 275 रन बनाए। वे 5 पारियों में 321 रन बनाकर ओवरऑल रन-स्कोरर लिस्ट में तीसरे नंबर पर रहे। सेमीफाइनल-फाइनल को मिलाकर 178 रन बनाए, जो कोहली (2014) के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से भी 23% ज्यादा है।
- टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास में किसी भी बैटर ने 175+ की स्ट्राइक रेट से सैमसन से ज्यादा रन नहीं बनाए हैं। टूर्नामेंट में भारत के दूसरे टॉप स्कोरर इशान किशन (317) हैं, जिन्होंने 9 मैच खेले हैं।
टीम बैलेंस:संजू के आने से तैयार हो गया परफेक्ट टॉप-3, अभिषेक को स्पेस मिला, तिलक का रोल बदला
टी-20 गेम में टीम का टॉप-3 कैसी बल्लेबाजी करता है, इससे मैच का नतीजा तय हो सकता है। फाइनल में भारत के टॉप-3; संजू, अभिषेक और इशान की तिकड़ी ने 92 गेंदों में 195 रन जोड़े। यह टूर्नामेंट इतिहास के किसी भी मैच में टॉप-3 का सबसे बड़ा योगदान था।
लेकिन भारत का टॉप-ऑर्डर टूर्नामेंट के शुरू में इतना परफेक्ट नहीं था। शुरुआती 5 मैचों में भारत के टॉप-3 ने 320 रन बनाए थे, जिसमें औसत सिर्फ 21.33 था। उस समय अभिषेक और इशान ओपनिंग कर रहे थे, जबकि तिलक नंबर-3 पर उतर रहे थे। तीनों लेफ्ट हैंडर्स बैटर थे, जिन्हें विपक्षी ऑफ स्पिन से बांध दे रहे थे।
अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 के पहले मैच में हार के बाद मैनेजमेंट बदलाव करने को मजबूर हो गया। बेंच से सैमसन की प्लेइंग इलेवन में एंट्री हुई और स्थिति बदल गई। संजू सैमसन के आते ही अगले चार मैचों में औसत दोगुना से ज्यादा बढ़कर 51.45 हो गया।
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