भारतीय धागे से भरा बांग्लादेश का टेक्सटाइल मार्केट: मिल मालिकों ने 1 फरवरी से कामकाज बंद करने की चेतावनी दी, 10 लाख नौकरियां खतरे में Today World News

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ढाका7 मिनट पहले

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बांग्लादेश में 78 प्रतिशत यार्न (धागे) भारत से इंपोर्ट होता है।

बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है। टेक्सटाइल मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जनवरी के अंत तक यार्न (धागे) के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा खत्म नहीं करती, तो 1 फरवरी से देशभर की मिलों में काम बंद कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के कॉमर्स मंत्रालय ने नेशनल रेवन्यू बोर्ड को इंपोर्टेड यार्न पर ड्यूटी-फ्री सुविधा खत्म करने की सिफारिश की है।

मिल मालिकों का कहना है कि भारत से आने वाला सस्ता यार्न घरेलू बाजार में भर गया है। इससे लोकल इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है। बराबरी की प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है।

10 लाख से ज्यादा लोगों की रोजगार खतरे में बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTM) ने सरकार को आगाह किया है कि अगर 1 फरवरी से मिलें बंद होती हैं, तो करीब 10 लाख मजदूरों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है। इससे सामाजिक तनाव भी बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने अब तक वैट में किसी राहत का ऐलान नहीं किया है।

50 से ज्यादा मिलें बंद, ₹9 हजार करोड़ का यार्न मार्केट में कई सालों से बांग्लादेश के गारमेंट निर्माता भारत से कॉटन यार्न और चीन से पॉलिएस्टर यार्न का इंपोर्ट करते रहे हैं। बीते तीन-चार महीनों में गैस की कमी, अनियमित सप्लाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने और दिक्कतें पैदा कर दी है।

BTM के अनुसार, सस्ते भारतीय यार्न के बड़े पैमाने पर इंपोर्ट की वजह से बाजार में करीब 12 हजार करोड़ टका का यार्न बिना बिके पड़ा है। अब तक 50 से ज्यादा टेक्सटाइल मिलें बंद हो चुकी हैं और हजारों मजदूरों की नौकरियां जा चुकी हैं। कई मिल मालिकों को बैंक कर्ज चुकाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

78 प्रतिशत यार्न भारत से इंपोर्ट हो रहा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में बांग्लादेश ने करीब 2 हजार करोड़ डॉलर के 70 करोड़ किलोग्राम यार्न का इंपोर्ट किया, जिसमें से 78 प्रतिशत हिस्सा भारत से आया।

स्पिनिंग मिल मालिकों की मांगें

  • मिल मालिकों ने 10 से 30 काउंट वाले कॉटन यार्न के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को खत्म किया जाए।
  • सस्ती और बिना रुकावट गैस सप्लाई, मुस्किन के समय वैट में राहत, बैंक कर्ज पर कम इंटेरेस्ट दर और सरकार के साथ सीधी का रास्ता हो।

इधर गारमेंट इंपोर्टर भारतीय यार्न की क्वालिटी और नियमित सप्लाई को बेहतर बताते हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट रोके जाने से लागत बढ़ेगी और ग्लोबल मार्केट में बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है।

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