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राजकृष्ण सैनी ने अंबाला में योग को समाज सेवा से जोड़ा, भारतीय योग संस्थान हरियाणा के प्रधान बने, 310 योग केंद्र स्थापित किए और 100 से अधिक योग शिक्षक प्रशिक्षित किए हैं.
अंबाला. भारत में योग केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह हजारों सालों पुरानी एक जीवनशैली है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का रास्ता दिखाता है. इसके साथ ही आज जब जीवन तेज़ रफ्तार और तनाव से भरा हुआ है, तब योग की आवश्यकता पहले से कहीं ज़्यादा महसूस की जा रही है.
दरअसल, अंबाला शहर के कैथ माजरी निवासी 75 वर्षीय राजकृष्ण सैनी भी आज केवल एक योग साधक नहीं, बल्कि योग को जीवन और समाज सेवा से जोड़ने वाले प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं. वर्ष 1994 में सर्वाइकल समस्या से राहत पाने के लिए उन्होंने योग अपनाया था ओर योग से स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद उन्होंने इसे गहराई से सीखा और दूसरों को भी योग करने के लिए प्रेरित करना शुरू किया हैं.
शुरुआत में वह अम्बाला सिटी के जैन स्कूल में योग अभ्यास करते थे,लेकिन वर्ष 1997 में हरियाणा शिक्षा बोर्ड भिवानी में स्थानांतरण के दौरान उन्होंने वहां योग केंद्र की शुरुआत की.साल 2008 में सेवानिवृत्ति के बाद से उन्होंने स्वयं को पूरी तरह योग सेवा के लिए समर्पित कर दिया ओर वर्ष 2009 में भारतीय योग संस्थान के हरियाणा प्रांत प्रधान बनने के बाद उनके कार्यकाल में प्रदेश के योग केंद्रों की संख्या 63 से बढ़कर 310 हो गई, जो हरियाणा में योग विस्तार की मजबूत मिसाल है.
लोकल 18 को योग साधक राजकृष्ण सैनी ने बताया कि वह 1994 से योग कर रहे हैं ओर इसकी शुरुआत सर्वाइकल की समस्या से निजात पाने के लिए की थी. उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे वक्त बदलता गया और फिर साल 2009 में वह हरियाणा प्रांत के भारतीय योग संस्थान के प्रधान बन गए. उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शन में 100 से अधिक योग शिक्षक प्रशिक्षित हो चुके हैं और अब वह शिक्षक दूसरे हजारों लोगों को योग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उन्हें भारतीय योग संस्थान हरियाणा का संरक्षक बनाया गया है,इसके बावजूद वह रोजाना अम्बाला के विभिन्न योग केंद्रों में लोगों को निःशुल्क योग सिखाते हैं. अब तक अम्बाला में ही करीब 50 योग शिक्षक तैयार कर चुके हैं,ओर वह चाहते हैं कि आज हर वर्ग का व्यक्ति योग सीखे.
उन्होंने बताया कि योग के साथ सामाजिक सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. वह ओंकार सेवा सोसाइटी और सैनी सभा से भी जुड़े हैं,ओर अस्पतालों में मरीजों को भोजन वितरण जैसे सेवा कार्यों में नियमित सहयोग करते हैं. उनका बताया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन व सकारात्मक सोच का रास्ता भी है. उन्होंने कहा कि आजकल के युवा मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर काफी ज्यादा काम करते है जिसके कारण उनके शरीर में सर्वाइकल जैसी समस्या बन जाती है. ऐसे में वह योग अपनाकर बिल्कुल ठीक रह सकते हैं. उन्होंने बताया कि वह योग को लेकर वह काफी ज्यादा लोगों को प्रेरित कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने यमुनानगर से लेकर चंडीगढ़ तक अपने कई केंद्रों में लोगों को योग करना सिखाया है.
About the Author
Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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