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Mobile Games: हाल ही में गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस दुखद घटना के बाद एक बार फिर बच्चों में मोबाइल हॉरर गेम्स की बढ़ती लत और उसके मानसिक प्रभाव पर सवाल उठने लगे हैं. जांच के दौरान पुलिस को लड़कियों की डायरी में कुछ डरावने मोबाइल गेम्स के जिक्र मिले, जिसके बाद माता-पिता, शिक्षक और प्रशासन सभी सतर्क हो गए हैं. हालांकि हॉरर कंटेंट बच्चों को रोमांचक लगता है लेकिन जब यह जुनून बन जाए तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं.
गाजियाबाद मामले ने क्यों बढ़ाई चिंता
पुलिस का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि मोबाइल गेम्स ही इस घटना की सीधी वजह बने. फिर भी, बार-बार उन्हीं हॉरर गेम्स का जिक्र मिलना यह सोचने पर मजबूर करता है कि लगातार डरावना कंटेंट बच्चों के दिमाग पर क्या असर डाल सकता है. खासकर तब, जब बच्चे घंटों तक फोन से चिपके रहते हैं और उन पर सही तरीके से नजर नहीं रखी जाती.
जांच में सामने आए कुछ चर्चित हॉरर गेम्स
जांच के दौरान कुछ गेम्स के नाम बार-बार सामने आए जो भारत में काफी लोकप्रिय हैं और आसानी से डाउनलोड किए जा सकते हैं. ये गेम्स फ्री या बेहद सस्ते होने की वजह से बच्चों तक तेजी से पहुंच जाते हैं जिससे उनकी पहुंच पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है.
Poppy Playtime का डरावना माहौल
Poppy Playtime बच्चों को एक सुनसान खिलौना फैक्ट्री में ले जाता है जहां अजीबोगरीब गुड़ियां, अंधेरे कोने और अचानक डराने वाले सीन मौजूद होते हैं. इसका किरदार Huggy Wuggy भले ही टीनएजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया हो लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कंटेंट बड़े बच्चों के लिए भी मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है.
The Baby in Yellow
The Baby in Yellow नाम से यह गेम जितना मासूम लगता है, असल में उतना ही खौफनाक है. इसमें खिलाड़ी एक ऐसे बच्चे की देखभाल करता है जिसके साथ धीरे-धीरे अलौकिक घटनाएं जुड़ती जाती हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों की देखभाल जैसे सामान्य विषय को हॉरर से जोड़ना छोटे बच्चों के लिए भ्रम और डर पैदा कर सकता है.
Evil Nun और Ice Scream की खौफनाक दुनिया
Evil Nun में खिलाड़ी को एक डरावने स्कूल में बंद कर दिया जाता है, जहां से एक खतरनाक नन से बचकर निकलना होता है. वहीं Ice Scream में एक आइसक्रीम बेचने वाले विलेन की कहानी है जो बच्चों का अपहरण करता है. भले ही इन गेम्स का ग्राफिक्स कार्टून जैसा हो लेकिन इनके विषय डर, कैद और अपहरण संवेदनशील बच्चों में चिंता और डर को बढ़ा सकते हैं.
माता-पिता के लिए जरूरी सावधानी
गाजियाबाद मामले में तीनों बहनें 16, 14 और 12 साल की थीं और उनका ज्यादातर समय मोबाइल पर बीतता था. जांच अभी जारी है और किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि माता-पिता को बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उनके ऑनलाइन व्यवहार को समझना चाहिए और अगर बच्चे में अचानक डर, चिड़चिड़ापन या अलग-थलग रहने के लक्षण दिखें तो बिना देर किए पेशेवर मदद लेनी चाहिए.
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