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एक समय था जब फॉर्मूला-1 को दुनिया की सबसे तेज कार रेस के रूप में जाना जाता था। ट्रैक पर इंजन की गूंज, सेकंडों की होड़ और ड्राइवरों की तकनीकी क्षमता ही इसकी पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह खेल तेजी से बदल गया है। आज फॉर्मूला-1 केवल मोटरस्पोर्ट नहीं रहा, बल्कि ग्लैमर, मनोरंजन और लाइफस्टाइल का एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बन चुका है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी मीडिया कंपनी लिबर्टी मीडिया की रही है। कंपनी ने 2017 में फॉर्मूला-1 को अपने नियंत्रण में लिया और इसके बाद खेल की प्रस्तुति, डिजिटल रणनीति और दर्शकों तक पहुंच को पूरी तरह नए तरीके से तैयार किया। लक्ष्य साफ था- एफ1 को सिर्फ रेस नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन शो के रूप में पेश करना। इस बदलाव को गति देने में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज “ड्राइव टू सर्वाइव’ ने अहम भूमिका निभाई। इस सीरीज में रेस के पीछे की दुनिया दिखाई गई- ड्राइवरों की निजी जिंदगी, टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा, रणनीति और पर्दे के पीछे होने वाली राजनीति। इससे दर्शकों का जुड़ाव बढ़ा और लोग केवल रेस देखने के बजाय ड्राइवरों की कहानियों में भी दिलचस्पी लेने लगे। लिबर्टी मीडिया ने खास तौर पर युवाओं और नए दर्शकों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई। सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाई गई, छोटे वीडियो, गेमिंग कंटेंट और डिजिटल इंटरैक्शन को बढ़ावा दिया गया। इसका असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2018 में एफ-1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स करीब 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो चुके हैं। डिज्नी और लेगो जैसे ब्रांड्स के साथ साझेदारी कर एफ-1 बच्चों और किशोरों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहा है, ताकि आने वाले समय में दर्शकों का आधार और बड़ा हो सके। इस रणनीति का असर एफ-1 की कमाई पर भी दिख रहा है। 2025 में फॉर्मूला-1 की कुल कमाई करीब 32,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शेयर बाजार में इसकी कुल वैल्यू लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। कई देश भी इसे अपने यहां आयोजित करने के लिए बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं। चीन और सऊदी अरब जैसे देश एक ग्रां प्री रेस की मेजबानी के लिए भारी फीस चुकाते हैं, क्योंकि इससे पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है। रेस से आगे… कैसे ‘प्रीमियम लाइफस्टाइल ब्रांड’ बन गया एफ-1 फॉर्मूला-1 अब सिर्फ कार कंपनियों का खेल नहीं रहा। लग्जरी और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी तेजी से इससे जुड़ रही हैं। फ्रांस की लग्जरी समूह एलवीएमएच (लुई विटों) ने 8,300 करोड़ रुपए की 10 साल की साझेदारी की है। यह दिखाता है कि एफ-1 अब एक प्रीमियम लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म बन चुका है। एपल ने 6,200 करोड़ रुपए की बड़ी डील के जरिए इस खेल से हाथ मिलाया है, ताकि खासकर अमेरिकी बाजार में इसकी पहुंच और मजबूत हो सके। लिबर्टी मीडिया ने मोटोजीपी (बाइक रेसिंग) को भी खरीद लिया है। योजना यह है कि बाइक रेसिंग को भी उतना ही लोकप्रिय और मुनाफे वाला बनाया जा सके।
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फॉर्मूला-1 सिर्फ कारों की रेस नहीं,लाइफस्टाइल का ब्रांड बन गया: 2018 में एफ1 के ऑनलाइन फॉलोअर्स 2 करोड़ थे, जो 8 साल में 6 गुना बढ़कर 11.5 करोड़ हो गए




