फरीदाबाद में बना अनोखा मड हाउस ‘वनभोज’, जो 50°C की गर्मी में भी देता है ठंडक Haryana News & Updates

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फरीदाबाद: फरीदाबाद जैसे इंडस्ट्रियल शहर में जहां चारों तरफ कंक्रीट के जंगल खड़े हैं वहां अगर आपको मिट्टी, लकड़ी और पत्थरों से बना ठंडा-ठंडा ड्रीम हाउस दिख जाए तो आप भी एक बार रुककर जरूर सोचेंगे ये सच में यहीं है या किसी पहाड़ी इलाके का नज़ारा? सूरजकुंड एरिया में बना वनभोज नाम का ये मड हाउस कुछ ऐसा ही एहसास देता है. बाहर तापमान चाहे 45 से 50 डिग्री तक पहुंच जाए, लेकिन इस घर के अंदर कदम रखते ही 15 से 20 डिग्री की ठंडक अपने आप महसूस होने लगती है वो भी बिना AC और पंखे के.

30 साल पुराना आर्किटेक्चरल कमाल

Local18 से बातचीत में इकोप्लोर की फाउंडर प्रेरणा प्रसाद बताती हैं. ये घर कोई नया एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि करीब 30 साल पुराना है जिसे मशहूर आर्किटेक्ट रेवती कामथ और बसंत कामथ ने बनाया था. अब इसे वनभोज नाम से एक प्राइवेट म्यूजियम की तरह डेवलप किया गया है जहां लोग आकर न सिर्फ इस अनोखे घर को देख सकते हैं बल्कि नेचर के साथ जुड़ने का अनुभव भी ले सकते हैं.

विजिट पैकेज और एक्सपीरियंस प्लान

प्रेरणा प्रसाद ने बताया हमने इसे ऐसे ही प्रमोट किया है कि लोग समझ सकें कि मिट्टी का घर कितना कंफर्टेबल और मॉडर्न हो सकता है. यहां आने के लिए हमने तीन पैकेज रखे हैं 999 रुपये में 2 घंटे का मड हाउस टूर और फॉरेस्ट वॉक, 1999 रुपये में टूर के साथ हर्बल ड्रिंक और स्नैक्स और 2999 रुपये में 4 घंटे का एक्सपीरियंस जिसमें लंच और डेज़र्ट भी शामिल है.

बिना AC भी 20 डिग्री तक ठंडक

प्रेरणा प्रसाद ने बताया आर्किटेक्चर कॉलेज के स्टूडेंट्स से लेकर स्कूल के बच्चे तक आ चुके हैं. दिल्ली में जब प्रदूषण चरम पर होता है तब भी यहां का माहौल साफ रहता है. रात में आप आराम से तारे देख सकते हैं. अगर बाहर 50 डिग्री तापमान है तो घर के अंदर 30 से 35 डिग्री रहता है यानी कम से कम 15 से 20 डिग्री का फर्क. अभी अप्रैल में भी हमें पंखे की जरूरत नहीं पड़ रही रात में तो कंबल ओढ़ना पड़ता है.

प्राकृतिक सामग्री से बना मजबूत स्ट्रक्चर

प्रेरणा प्रसाद ने बताया इस घर की खास बात इसकी बनावट भी है. इसे हम दो मंजिला नहीं कहेंगे क्योंकि बाहर से ये चार स्टोरी जैसा दिखता है लेकिन अंदर से सीढ़ीनुमा एक ही स्ट्रक्चर है. 1994 में जब सुप्रीम कोर्ट ने यहां माइनिंग पर रोक लगाई तब इस जमीन पर इस घर का निर्माण हुआ. घर की दीवारें, छत और पूरा ढांचा पूरी तरह नेचुरल चीजों से बना है. हमारे यहां कोई प्लास्टिक नहीं है सिर्फ पत्थर, लकड़ी और मिट्टी का इस्तेमाल हुआ है. दीवारों की ईंटों को 30 दिन धूप में सुखाया गया है जिससे वो बेहद मजबूत हो जाती हैं. 30 साल से ये घर बारिश, गर्मी हर मौसम झेल रहा है और आज भी मजबूती से खड़ा है.

नेचर के साथ संतुलित जीवन की सोच

प्रेरणा प्रसाद ने बताया मेरा एक फ्लैट गाजियाबाद में 18वीं मंजिल पर है वहां भूकंप आए तो नीचे भागना भी मुश्किल है. लेकिन यहां मुझे डर नहीं लगता ये घर इतना मजबूत है कि मैं आराम से यहीं रह सकती हूं. आज जहां लोग मिट्टी के घर को गरीबी से जोड़कर देखते हैं वहीं मैं इस सोच को गलत मानती हूं. ये बिल्कुल गलत है कि मिट्टी का घर मतलब गरीब. असल में ये उन लोगों का चुनाव है जो नेचर के साथ रहना चाहते हैं. ये घर हर मौसम में फिट है. गर्मी में ठंडा, सर्दी में गर्म और बारिश में तो ऐसा लगता है जैसे हम हिमाचल या उत्तराखंड में आ गए हों.

मिट्टी का घर गरीबी नहीं, समझदारी का चुनाव

प्रेरणा प्रसाद ने बताया सर्दियों में हमारे यहां फायरप्लेस है जिसमें हम जंगल से गिरी हुई लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं. मतलब हर चीज नेचर के साथ बैलेंस में है. हम बस लोगों को ये दिखाना चाहते हैं कि मिट्टी का घर भी साफ-सुथरा मजबूत और मॉडर्न हो सकता है. कंक्रीट के इस दौर में वनभोज जैसे घर सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं बल्कि एक सोच है. जो ये बताती है कि अगर चाहें तो हम शहर में रहते हुए भी प्रकृति के करीब रह सकते हैं.

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