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गैस संकट ने बदली रसोई की तस्वीर. फरीदाबाद में सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों से लोग परेशान, ढाबे-रेस्टोरेंट भी बेहाल. मजबूरी में फिर लौटा चूल्हे का दौर कोयला और लकड़ी की बिक्री में 40% तक उछाल, लोग लंबी लाइनों से हारकर अपना रहे पुराने तरीके.
फरीदाबाद: इन दिनों ईरान, इजरायल-अमेरिका युद्ध के चलते गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी मची हुई है. फरीदाबाद में सिलेंडर मिलना किसी जंग से कम नहीं हैं. लोग सिलेंडर लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़े हैं लेकिन फिर भी खाली हाथ लौट रहे हैं. ऊपर से गैस के दाम भी बढ़ गए हैं ये तो मानो परेशानी पर परेशानी है खासकर कमर्शियल सिलेंडर मिलना तो और भी मुश्किल हो गया है और जिन्हें मिल रहा है वे भी काफी महंगा खरीद रहे हैं. ढाबे और रेस्टोरेंट वाले तो बहुत ज्यादा परेशान हैं.
इस वजह से फरीदाबाद में यहां कोयला और लकड़ी की बिक्री तेजी से बढ़ गई है. फरीदाबाद में करीब 40% तक ज्यादा कोयला और लकड़ी बिकने लगी है क्योंकि लोगों को मजबूरी में फिर उसी पुराने तरीके पर लौटना पड़ रहा है जैसे पहले अपने घरों में चूल्हे पर खाना बनाते थे. अब फिर लोग दुकानों पर कोयला और लकड़ी खरीदने पहुंच रहे हैं.
कोयला-लकड़ी वालों की हुई चांदी
बल्लभगढ़ की अनाज मंडी में कोयला-लकड़ी विक्रेता तरुण चौहान ने Local18 से बातचीत में बताया मेरी दुकान काफी पुरानी है. जब मैं चौथी क्लास में था तब से दुकान पर आ रहा हूं. अब मेरी उम्र 27 साल है. तरुण ने बताया हम रेस्टोरेंट वालों को कोयला-लकड़ी सप्लाई करते हैं. गैस की कमी और बढ़ी हुई कीमतों के चलते हमारी दुकान की बिक्री में करीब 40% ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. ग्राहक गांवों से आते हैं रेस्टोरेंट और ढाबे वाले आते हैं. तरुण ने बताया जो हमारे दुकान पर ग्राहक आते हैं वो कहते हैं कि हार्ड कोयला दो क्योंकि सिलेंडर बहुत महंगे मिल रहे हैं कमर्शियल सिलेंडर जो पहले 2000 रूपये का था अब 5000 रूपये में मिल रहा है.
क्या है रेट
तरुण ने कहा अब लोग फिर से लकड़ी और कोयला खरीद रहे हैं घर वाले भी आ रहे हैं. एक बोरी में 45 से 50 किलो कोयला रहता है रेट 40 से 45 रुपए किलो है अच्छी क्वालिटी का 45 रूपये किलो और लकड़ी 12 से 14 रूपये किलो. यही पुराने रेट हैं लेकिन सेल खूब बढ़ गई है. जो आदमी महीने के 12000 रूपये कमाता है वो गरीब आदमी कैसे इतने महंगे का सिलेंडर खरीदेगा? तीन-तीन दिन लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा तो लोग मजबूरी में लकड़ी और कोयला लेकर ही घर जा रहे हैं.
पुराने दिन फिर से लौटे
तरुण ने हंसकर बताया जैसे पहले लोग चूल्हे पर रोटी खाते थे वही दिन फिर से आ गए हैं. हमारी खुद की भट्टी है मेवात साइड से कोयला लाते हैं. तरुण ने कहा साफ दिख रहा है लोग फिर से पुराने तरीके पर लौटने लगे हैं सिलेंडर की जगह अब चूल्हा और कोयले की मांग बढ़ गई है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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