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फरीदाबाद: फरीदाबाद के दयालपुर गांव का हनुमान मंदिर अब किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा. पिछले कुछ सालों में इस मंदिर की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी है. दिल्ली-एनसीआर से लोग यहां माथा टेकने आते हैं अपनी मनोकामनाएं लेकर. खास बात ये कि यहां के महंत, महाराज जी ने असल में गजब की तपस्या की है इसी वजह से मंदिर की प्रसिद्धी और बढ़ गई. मंगलवार या शनिवार को तो इतनी भीड़ लग जाती है कि गिनती करना मुश्किल हो जाता है. मंदिर के अंदर 72 फीट ऊँची हनुमान जी की मूर्ति खड़ी है जो दूर से ही दिख जाती है और लोगों के मन में श्रद्धा जगा देती है.
100 साल पुराना है मंदिर
दयालपुर के रहने वाले कुंवर पाल रोज मंदिर जाते हैं पूजा-पाठ और आरती का हिस्सा बनते हैं. उनका कहना है ये मंदिर करीब 100 साल पुराना है. पहले लोग बहुत कम आते थे, लेकिन जबसे ये विशाल मूर्ति बनी तबसे दूर-दूर से लोग आने लगे. मंगलवार और शनिवार को तो कम से कम पचास गांवों से लोग पहुंचते हैं.
कुंवर पाल को इस मंदिर पर फख्र है. ये उनके गांव की धरोहर है अब तो पूरे इलाके में मशहूर हो चुका है. ये हनुमान जी की मूर्ति 2013 में बननी शुरू हुई थी और 2022 में पूरी तरह तैयार हुई. यहां शिवजी और शनि देव की भी मूर्तियां हैं. असल में पहले ये सिर्फ शिवजी का मंदिर था.
इलाज के लिए भी आते हैं लोग
महंत महाराज जी की तपस्या के किस्से भी कम नहीं हैं. उन्होंने यहां आकर अग्नि और जल की कठिन तपस्याएं की हैं. कुल दस बार हर बार 41 दिन तक. महाराज जी 2009 में आए थे और तभी से तपस्या शुरू कर दी. गांव वालों का मानना है कि उन्हीं के प्रयासों और साधना से मंदिर इतना प्रसिद्ध हुआ और कई चमत्कार भी हुए. लोग उनके पास इलाज के लिए आते हैं कई बार झाड़-फूंक करवाने, दवाइयां भी लेते हैं.
महाराज जी खुद कहते हैं कि उनका मकसद सिर्फ लोगों का भला करना है. अभी मंदिर में रामायण का पाठ चल रहा है जो सवा साल तक चलेगा 108 रामायण का पाठ होगा. दो महीने पहले शुरू हुआ ये आयोजन लोगों के विश्वास को और मजबूत कर रहा है. महाराज जी की लगन देखकर भक्तों की श्रद्धा और गहरी हो गई है.
आस्था और विश्वास का प्रतिक है मंदिर
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