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अंबाला: इन दिनों भारत की सड़कों पर हादसे आम हो गए हैं. सुबह अखबार खोलो तो हर पन्ने पर सड़क दुर्घटनाओं की खबरें मिलती हैं. लोगों की ज़िंदगी इतनी तेज़ हो गई है कि सबको जल्दी-जल्दी घर पहुंचना है हर काम फटाफट निपटाना है. बस यही जल्दीबाज़ी कई बार जान पर भारी पड़ जाती है. एक हादसा किसी परिवार की खुशियां ही नहीं उनकी पूरी दुनिया छीन लेता है, लेकिन अंबाला के अशोक सोलंकी और जगदीश चंडोक ने हालात से हार नहीं मानी. इन्होंने ठान लिया कि अब और लोगों की जान नहीं जाने देंगे. दोनों का तरीका अलग है, लेकिन सोच एक… लोगों को सड़क पर सतर्क रहने की सीख देना.
अशोक सोलंकी की बात करें, तो वो पिछले कुछ सालों से बाइक सवारों में हेलमेट पहनने की आदत डालने की कोशिश कर रहे हैं. रोज़ देखते हैं कि लोग बिना हेलमेट निकल जाते हैं. कोई कहता है अरे घर के पास ही तो जाना है, तो वहीं किसी को हेलमेट बोझ लगता है. लेकिन हादसे रास्ता नहीं देखते न दूरी पूछते हैं.
आपकी जान आपके घरवालों के लिए अनमोल
अशोक सड़क पर ऐसे लोगों को रोकते हैं पहले सलाम करते हैं फिर हाथ जोड़कर कहते हैं भाई साहब हेलमेट जरूर पहनो आपकी जान आपके घरवालों के लिए अनमोल है. सिर्फ कहने भर से नहीं वो अपने पास से हेलमेट दिखाकर समझाते हैं. कई बार तो किसी को हेलमेट पहनाकर ही भेजते हैं. उनका मानना है सबसे ज़्यादा मौतें सिर में चोट लगने से होती हैं और ये सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से. जब तक उनमें जान है वो लोगों को समझाते रहेंगे क्योंकि एक इंसान के जाने से पूरा परिवार टूट जाता है.
रिफ्लेक्टर टेप दिखने में मामूली है लेकिन काम बहुत बड़ा करता है
खुद के पैसों से खरीदते हैं रिफ्लेक्टर टेप
जिंदगी बचा सकती है रोड सेफ्टी सावधानी
इन दोनों की सोच एकदम साफ है हादसे टाले जा सकते हैं बस थोड़ी सी जिम्मेदारी चाहिए. अगर हर कोई हेलमेट पहने, सीट बेल्ट लगाए रफ्तार पर काबू रखे और अपनी दूसरों की सुरक्षा को समझे तो बहुत सी जिंदगियां बच सकती हैं. अशोक सोलंकी और जगदीश चंडोक जैसे लोग समाज के लिए मिसाल हैं. इन्होंने दिखा दिया कि बदलाव सिर्फ सरकार से नहीं आम आदमी से भी शुरू हो सकता है. सड़क सुरक्षा कोई मुश्किल चीज नहीं है हेलमेट, सीट बेल्ट, संयम और रिफ्लेक्टर टेप ये चार बातें कई परिवारों को टूटने से बचा सकती हैं.
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