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कुम्हारिया निवासी अंकित जांगड़ा और विजय पूनिया रोजगार की उम्मीद आंखों में लिए करीब 14 माह पहले रूस गए थे। परिजनों ने कल्पना भी नहीं की थी कि उनके लाल ठगों के चक्कर में फंसकर इस हालात में पहुंच जाएंगे कि सकुशल वापस लौटना तक मुश्किल हो जाएगा। हुआ भी कुछ ऐसा ही। शनिवार को अंकित का शव कंकालनुमा हालत में ताबूत में लौटा। अंतिम दर्शन के वक्त परिजनों की चीख निकल पड़ी। घर में कोहराम मच गया। यह देख ग्रामीण भी भावुक हो गए। दोपहर में गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
रघुबीर ने बताया कि शव देखकर लग रहा है कि भाई अंकित की मौत काफी समय पहले हो चुकी थी। तीन माह पहले रूस स्थित भारतीय दूतावास से परिवार के दो सदस्यों का डीएनए भी मंगवाया गया था। भाई ने पहले ही बता दिया था कि उन्हें जबरन युद्ध में धकेला जा रहा है। पिछले सात माह से उससे संपर्क नहीं हो पाया था। इससे अंदेशा हो गया था कि वह ठीक नहीं है। उसकी सुरक्षित वापसी के लिए जंतर-मंतर पर धरना भी दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। संवाद
ताबूत में रूसी सेना की वर्दी
जिस ताबूत में अंकित का शव आया उसमें रूसी सेना की वर्दी भी थी। इससे परिजन को गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अंकित की चिता के साथ वर्दी को भी जला दिया।
मैं झांसे में नहीं आया तो बच गया: सोनू
कुम्हारिया निवासी सोनू भी स्टडी वीजा पर रूस गया था। उसने बताया कि वह मई 2024 में मॉस्को गया था और रेस्टोरेंट में नौकरी की। फरवरी 2025 में अंकित भी वहां आ गया। दोनों ने कुछ समय तक एक साथ काम किया। इस दौरान अंकित और विजय का संपर्क एक महिला से हुआ जिसने 11 भारतीय युवकों के साथ उन्हें कुछ और काम का लालच दिया। इसके बाद जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया। सोनू ने बताया कि वह उस महिला के झांसे में नहीं आया और इसी साल जनवरी में सुरक्षित घर लौट आया।
12वीं पास करने के बाद गया था अंकित
रघुबीर ने बताया कि अंकित 12वीं की पढ़ाई पूरी कर परिवार का सहारा बनने के लिए 14 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। इसमें फरीदाबाद की एक एजेंट ने उसकी मदद की थी। अंकित ने मॉस्को के एमएसएलयू कॉलेज में विदेशी भाषा कोर्स में दाखिला लिया। पिता रामप्रसाद ने बताया कि अंकित ने पढ़ाई के दौरान फ्री टाइम में किसी रेस्टोरेंट में हेल्पर का काम शुरू किया ताकि अपना खर्चा निकालने के साथ ही घर पर पैसे भेज सके।
दोबारा वीजा पर गया था विजय
विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। वीजा नहीं बढ़ा तो एक महीने बाद ही लौट आया। इसके बाद अक्तूबर 2024 में दोबारा गया। छह महीने वहां रहकर मार्च 2025 के आखिर में फिर गांव लौट आया। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर फिर रूस चला गया। अब उसका कोई अता-पता नहीं है। रघुवीर ने बताया कि एक महिला ने अंकित व विजय के साथ 13 अन्य भारतीय लोगों को रूसी सेना में नौकरी दिलाने का लालच दिया था।
बचा लो…हम कभी भी मारे जा सकते हैं
11सिंतबर 2025 को जारी वीडियो में अंकित के पीछे विजय सहित कई भारतीय युवक खड़े हैं। अंकित कहता है कि उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर प्रशिक्षण के लिए भेज दिया। इसके बाद युद्ध के लिए युक्रेन बॉर्डर पर जाने को कहा गया। हमने गुहार लगाई कि युद्ध में न भेजें। हमें कुछ नहीं आता। इस पर उन्हें मारने की धमकी दी गई। वह अपने साथ के लोगों को अपना परिचय देने के लिए कहता है। सब बारी-बारी से अपना नाम बताते हैं और भारत सरकार से बचाने की गुहार लगाते हैं। अंकित कहता है कि यह शायद आखिरी वीडियो है। बचा लो..हम कभी भी मारे जा सकते हैं।
पूरे गांव के लोग पीड़ित परिवार के साथ हैं। अंकित की मौत से सभी गमजदा हैं। स्थानीय प्रशासन, सीएम और भारत सरकार से भी मदद की गुहार लगाई थी लेकिन कुछ नहीं किया। – सुरेश सिंह, सरपंच, गांव कुम्हारिया
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