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मनुष्य के जीवन में अचानक जब कुछ होता है, तब उसकी परीक्षा होती है कि वो कितना समझदार है। कैसे उसका सामना करता है। आप कितने ही समर्थ व्यक्ति हों, लेकिन विपरीत परिस्थिति आपके हाथ में नहीं है। हां, उसको संभालना आपके हाथ में है। विपत्ति में कुछ लोग निखर कर कुंदन बन जाते हैं और कुछ कोयला रह जाते हैं। रामकथा में एक बहुत अच्छा उदाहरण है। राम को राजा बनना था लेकिन कैकेयी ने निर्णय पलट दिया और राम को बुलवाया। कैकेयी के महल में राम ने देखा कि दशरथ विचलित से लेटे हुए हैं। कैकेयी आवेश में है। ऐसा दृश्य राम ने पहली बार देखा। उनके लिए पंक्ति लिखी है- प्रथम दीख दुखु सुना न काउ। पहली बार कोई दु:ख देखा। इससे पहले कभी दु:ख सुना भी न था। लेकिन राम मन ही मन मुस्कराए और कहा- जो होता है, अच्छा ही होता है। और साबित भी कर दिया कि वनवासी राम इतने लोकप्रिय हुए कि जिन्होंने अयोध्या छोड़ी, वो लोगों के दिलों में पहुंच गए। तो जीवन में जब कुछ अचानक आए, विपरीत आए, श्रीराम को याद करके अच्छे-से उसका सामना करिएगा।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जब भी विपत्ति आए, उसका अच्छे-से सामना करिएगा


