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1 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
कुछ बातों को देव कृपा और देव प्रकोप मानना बंद करना चाहिए। बाढ़ आती है, हमारा कुछ नुकसान होता है, शरीर बीमार होता है तो हम कह देते हैं कि भगवान की इच्छा है। या उसने कृपा की है या वो नाराज है। लेकिन ये अधूरा सत्य है।
अगर प्रकृति प्रकोप कर रही है तो उसे केवल देव इच्छा न मानें, उसमें हमारा भी योगदान है। कुछ ना कुछ हमने प्रकृति के साथ ऐसी छेड़छाड़ की है कि वो पलटकर आ रही है। ये दुनिया बड़े अच्छे ढंग से ईश्वर ने बनाई है। इसमें किया हुआ व्यर्थ नहीं जाता।
हमारे ऊपर जब भी संकट आए, सबसे पहले हम अपनी भूमिका देखें कि इसमें हमारा क्या योगदान है? आज से रौद्र नाम का संवत्सर आरंभ हो रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष गुरु रहेंगे राजा और मंगल होंगे मंत्री। गुरु के कारण धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी, तो यह वर्ष हमारे लिए आध्यात्मिक साधना के लिए बड़ा सहयोगी है।
इस वर्ष संकल्प लें कि थोड़ा अपने भीतर की यात्रा को बढ़ाएंगे। और चूंकि मंगल मंत्री हैं तो अग्नि, हिंसा, यह सब प्रकरण होते रहेंगे, पर यह हिंदू वर्ष अपनी आत्मा से जुड़ने के लिए बहुत अवसर देगा।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: नववर्ष आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत सहयोगी है



